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विधानसभा चुनाव: तृणमूल में तेज हुए बगावती सुर

Updated at : 07 Mar 2016 2:30 AM (IST)
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विधानसभा चुनाव: तृणमूल में तेज हुए बगावती सुर

राज्य में चुनाव की घोषणा के साथ ही शासक दल तृणमूल कांग्रेस में बगावत के सुर तेज हो गये है. वीरभूम से लेकर पार्टी मुख्यालय तृणमूल भवन तक इसकी आवाज सुनायी देने लगी है. सिंगूर व नंदीग्राम में भी असंतोष दिखने लगा है. उधर, पार्टी आलाकमान ने शांति बनाये रखने की अपील की है. कोलकाता: […]

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राज्य में चुनाव की घोषणा के साथ ही शासक दल तृणमूल कांग्रेस में बगावत के सुर तेज हो गये है. वीरभूम से लेकर पार्टी मुख्यालय तृणमूल भवन तक इसकी आवाज सुनायी देने लगी है. सिंगूर व नंदीग्राम में भी असंतोष दिखने लगा है. उधर, पार्टी आलाकमान ने शांति बनाये रखने की अपील की है.
कोलकाता: उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद से विक्षुब्ध समर्थकों ने धरना-प्रदर्शन जारी है. हालांकि टिकट बंटवारे से पूर्व ही पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने असंतुष्टों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया था कि उनका फैसला ही अंतिम होगा.
इसके बाद भी जिस तरह से नये चेहरों को टिकट देने व पार्टी के पुराने सिपहसालारों को नजरअंदाज किया गया, उसके खिलाफ जगह-जगह हंगामा व धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं. उससे चुनाव में एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर के साथ ही भीतरघात की वजह से सत्ताधारी पार्टी को चुनाव में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इससे शासक दल की सीटों पर कहां तक असर पड़ेगा, यह सवाल अनुत्तरित है. हालांकि मुकुल राय से लेकर हेवीवेट नेता शोभन चट्टोपाध्याय ने पार्टी आलाकमान के फैसले पर सहमति जताते हुए विक्षुब्धों को पार्टी के निर्देश का पालने करने की अपील की है. इसके बाद भी वीरभूम से लेकर हावड़ा तक विरोध प्रदर्शन का सिलसिला उग्र रूप से जारी है.
अब देखना यह है कि एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर से लेकर शासक दल के भीतर का अंतर्कलह से विरोधी पार्टी लाभ उठा पाती है या नहीं, क्योंकि जिस तरह से वाम मोरचा व भाजपा ने तृणमुल को शारदा से लेकर कामदुनी तक के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की थी, वह फिलहाल ठंडे बस्ते में ही दिखायी दे रही है.
वीरभूम से तृणमूल भवन तक िवरोध प्रदर्शन
दक्षिण 24 परगना के तृणमूल नेता अराबुल इसलाम के करीबी अब्दुल सत्तार मोल्ला ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पूर्व माकपा नेता रज्जाक मोल्ला को टक्कर देने के लिए मैदान में आने की घोषण कर दी है. पार्टी सूत्रों के अनुसार उनके पीछे तृणमूल के दबंग माने जानेवाले अराबुल इसलाम का कथित समर्थन है. पांडुआ में रहीम नबी को उम्मीदवार बनाये जाने को लेकर भी विरोध जारी है. बर्दवान में युवा तृणमुल के अध्यक्ष सुभाष मंडल को टिकट देने को लेकर भी जिला कार्यालय में विरोध हो रहा है. पार्टी के पुराने नेताओं का आरोप है कि वह इस इलाके के निवासी नहीं हैं. वीरभूम के मयुरेश्वर विधानसभा में अभिजीत राय की उम्मीदवारी का विरोध जारी है. यही स्थिति खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में रमाप्रसाद तिवारी की उम्मीवारी को लेकर देवाशीष चौधरी के समर्थक पार्टी कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं. वर्ष 2011 में जिस नंदीग्राम व सिंगूर विधानसभा ने शासक दल के लिए तुरूप के पत्ते काम किया था, वहां भी सिंगुर में रवींद्रनाथ भट्टाचार्य को उम्मीदवार बनाये जाने काे लेकर पार्टी में अंतकर्लह उजागर है. इस बार नंदीग्राम में सांसद शुभेंदु अधिकारी को टिकट दिया गया है, लेकिन पूर्व विधायक इलियास मोहम्मद के बेटे शेख सद्दाम हुसैन को टिकट देने की मांग पर पार्टी के अंदर विरोध के सुर तेज हो रहे हैं.
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