कोलकाता: हाइकोर्ट ने गुरुवार को सारधा चिटफंड घोटाले के आरोपी पूर्व परिवहन व खेल मंत्री मदन मित्रा की जमानत रद्द कर दी है. उच्च न्यायालय ने उन्हें निचली अदालत में सरेंडर करने का निर्देश िदया. हाइकोर्ट के फैसले का सम्मान करने की बात कहते हुए मदन मित्रा अपराह्न सवा चार बजे के करीब अलीपुर कोर्ट में हाजिर हो गये, लेकिन हाइकोर्ट के फैसले की प्रति रात सवा 11 बजे निचली अदालत में पहुंची.
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिट्रेट (एसीजेएम) की अदालत में रात 11.30 बजे के करीब सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के बाद अलीपुर कोर्ट ने मदन मित्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का निर्देश िदया. इसके बाद मित्रा को अलीपुर जेल ले जाया गया. अगली सुनवाई तीन दिसंबर को होगी.
गौरतलब है िक अलीपुर कोर्ट के न्यायाधीश पार्थ प्रतिम दास ने गत 31 अक्तूबर को सारधा चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार मदन मित्रा को जमानत दी थी. जमानत को एकतरफा करार देकर सीबीआइ ने हाइकोर्ट से पूर्व परिवहन मंत्री की जमानत खारिज करने की अपील की थी. सारधा चिटफंड घोटाले में मित्रा को 12 दिसंबर, 2014 को गिरफ्तार किया गया था.
हाइकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश निशिथा म्हात्रे व न्यायाधीश तापस मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने मदन मित्रा की जमानत खारिज कर दी. खंडपीठ ने आदेश दिया है कि अदालत के निर्देश की प्रति मिलने के साथ ही उन्हें (मदन मित्रा) निचली अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा. मदन मित्रा के अधिवक्ता एसके कपूर ने अदालत से अपने मुवक्किल के आत्मसमर्पण के लिए सात दिन का समय की अपील की, लेकिन अदालत ने नामंजूर कर दिया. इसके साथ ही अवकाशकालीन खंडपीठ के मदन मित्रा को नजरबंद रखने के निर्देश को भी हाइकोर्ट ने खारिज कर दिया. हाइकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में मदन मित्रा को जमानत देने के निचली अदालत के आदेश पर कठोर टिप्पणी की.
मदन के वकील की क्या थी दलील: गुरुवार सुबह मामले की सुनवाई शुरू होने के साथ ही मदन मित्रा के वकील एसके कपूर ने दावा किया कि पूर्व परिवहन मंत्री के साथ संधीर अग्रवाल को भी जमानत दी गयी थी, लेकिन संधीर की जमानत खारिज करने के लिए सीबीआइ ने अर्जी नहीं लगायी. लेकिन मदन मित्रा को निशाना बनाते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज करने के लिए अपील की गयी है. इसके साथ ही सीबीआइ ने कभी भी मदन मित्रा के अस्पताल में भरती होने को लेकर आपत्ति नहीं की थी, लेकिन बुधवार को सीबीआइ ने उनके अस्पताल में भरती होने व उनकी दवाओं को लेकर कटाक्ष किया था. लेकिन उनके वकीलों ने मित्रा के परिवहन व खेल मंत्री के पद से त्यागपत्र को लेकर कोई भी बात नहीं कही. सीबीआइ के वकील ने जमानत खारिज करने के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का उल्लेख किया. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि निचली अदालत ने एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से मदन मित्रा की जमानत मंजूर की थी.
क्या कहा मदन मित्रा ने
घर से अदालत जाते समय मदन ने संवाददाताओं से कहा कि वह माननीय अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं. चूंकि अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी है. वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं. यह पूछने पर कि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे या नहीं, उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की.

