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मधुमेह के मरीजों के लिए फस्र्ट एड बॉक्स

कोलकाता: सरकारी अस्पतालों के नाम लेते ही हमारे जेहन में कई तसवीरें उभर जाती है. अस्पताल की अव्यवस्था, मरीजों से पटे परिसर व आउटडोर, अस्पताल कर्मियों की काम न करने की प्रवृत्ति आदि. राज्य के करीब 70 फीसदी आबादी इन्हीं सरकारी अस्पतालों पर इलाज के लिए निर्भर रहते हैं. इससे इन अस्पतालों पर मरीजों का […]

कोलकाता: सरकारी अस्पतालों के नाम लेते ही हमारे जेहन में कई तसवीरें उभर जाती है. अस्पताल की अव्यवस्था, मरीजों से पटे परिसर व आउटडोर, अस्पताल कर्मियों की काम न करने की प्रवृत्ति आदि. राज्य के करीब 70 फीसदी आबादी इन्हीं सरकारी अस्पतालों पर इलाज के लिए निर्भर रहते हैं. इससे इन अस्पतालों पर मरीजों का अत्यधिक दबाव रहता है. मरीजों के इस दबाव के कारण कई बार अस्पताल कर्मियों की एक छोटी से गलती भी बड़ी घटना में तब्दील हो जाती है. ऐसे में कई बार महानगर के इन बड़े अस्पतालों की छवि धूमिल होती है.

वहीं, महानगर में एक ऐसा भी अस्पताल है जहां के एक चिकित्सक इन सरकारी अस्पतालों की उक्त छवि को साफ करने में लगे हुए है. नील रतन सरकार (एनआरएस) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के इंडोक्रिनोलॉजी (मधुमेह) विभाग की ओर से मरीजों के लिए एक अनोखी पहल की गयी है.
प्राथमिक उपचार कीसभी सुविधाएं
विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर रानेन दासगुप्ता ने उक्त विभाग में मरीजों के लिए एक प्राथमिक उपचार पेटी (फस्र्ट एड बॉक्स) लगवाया है. इस पेटी में प्राथमिक उपचार के सभी चिकित्सकीय उपकरणों के साथ अचानक बढ़े हुए मधुमेह को कम करने वाली दवाएं व ओआरएस पाउडर के पाउच रखे गये हैं.

अस्पताल के तीसरे तल्ले पर आउटडोर
अब आप सोच रहे होंगे कि अस्पताल में फस्र्ट एड बॉक्स का क्या काम, तो हम आपको बता दे कि अस्पताल क ा उक्त आउटडोर तीसरे तल्ले पर चलाया जाता है. यहां लिफ्ट न होने के कारण मरीजों को पैदल ही ऊपर चढ़ना पड़ता है. इससे मधुमेह के मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

कई बार पसीने से तर बतर होने के कारण मरीज काफी कमजोरी का अनुभव करते है. मरीजों की यह थकान उनके स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव डाल सकता है. ऐसे में मरीजों को समय पर ओआरएस घोल पिला देने से काफी राहत महसूस हो सकती है. अब तक मरीजों को इस घोल के लिए कम्यूनिटी मेडिसिन जाना पड़ा था. इसके अलावा यहां पहुंचने वाले मरीज कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझने लगते हैं, तब उन्हें उक्त चिकित्सा की जरूरत पड़ सकती है.

मेडिकल बैंक बनाने की योजना
प्रोफेसर डॉ दासगुप्ता का दावा है कि न केवल राज्य में बल्कि भारत में पहली बार किसी सरकारी अस्पताल में इस व्यवस्था को चालू किया गया है. इसके अलावा इस विभाग में डॉ दासगुप्ता के नेतृत्व में ऐसी कई योजनाएं बनायी गयी है, जिसे पूरा करने के लिए हरसंभव कोशिश जारी है. इनमें इंसुलिन मेडिसिन बैंक व स्वामी विवेकानंद मेडिकल बैंक की योजना प्रमुख है. इस संबंध में उन्होंने बताया कि हर रोज कई दवा कंपनियों के प्रतिनिधि उन्हें व उनके विभाग के अन्य चिकित्सकों को कई ऐसी दवाइयां दे जाते हैं, जिससे मेडिकल बैंक बनाया जा सकता है. इससे जरूरतमंद मरीज काफी लाभांवित हो सकते हैं.

इन दोनों योजनाओं के अलावा भी प्रोफेसर डॉ रानेन दासगुप्ता एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में पहुंचने वाले मरीजों की सुविधा के लिए अन्य योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं. डॉ दासगुप्ता का कहना है कि अगर भारत के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों के चिकित्सक मरीजों को मदद करने की भावना से काम करें ,तो हमारा देश स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी मजबूत हो सकता है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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