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अब बंगाल में भी होगा अंग प्रत्यारोपण

स्वास्थ्य विभाग ने गठित किया स्टेट आर्गन एंड ट्रांसप्लांट सेंटर आरजीकर व एनआरएस मेडिकल कॉलेज में जल्द बनेगा विशेष केंद्र आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए बनी 21 सदस्यीय कमेटी निजी अस्पतालों पर नजर रखने के लिए बना नया सेल प्रत्येक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की होगी नियुक्ति वर्ष 2014 में चेन्नई में 80 […]

स्वास्थ्य विभाग ने गठित किया स्टेट आर्गन एंड ट्रांसप्लांट सेंटर
आरजीकर व एनआरएस मेडिकल कॉलेज में जल्द बनेगा विशेष केंद्र
आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए बनी 21 सदस्यीय कमेटी
निजी अस्पतालों पर नजर रखने के लिए बना नया सेल
प्रत्येक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की होगी नियुक्ति
वर्ष 2014 में चेन्नई में 80 व मुंबई में 71 आर्गन ट्रांसप्लांट हुए
कोलकाता : अब बंगाल में भी अंग प्रत्यारोपण को विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने कवायद शुरू कर दी है. सबसे पहले राज्य सरकार यहां अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास करना चाहती है.
गौरतलब है कि कुछ दिनों से सोशल नेटवर्किग साइट पर एक शिशु की मौत को लेकर चर्चा जोरों पर थी. शिशु की भले ही मौत हो गयी है, लेकिन उसने दो लोगों को नयी जिंदगी दी है. उसकी आंख व अन्य अंगों को दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपण किया गया है.
इसी प्रकार, मुंबई में जनवरी महीने में 66 वर्षीय व्यक्ति को चिकित्सकों ने ‘ ब्रेन डेड ’ घोषित कर दिया गया था. इसके बाद उसकी दोनों किडनी व लीवर को अन्य लोगों में प्रत्यारोपण किया गया, जिससे तीन लोगों को नयी जिंदगी मिली. अंग प्रत्यारोपण की इस प्रक्रिया को कैडावेरिक ट्रांसप्लांट कहते हैं.
मुंबई व चेन्नई जैसे शहर में प्रत्येक वर्ष कम से कम 70-80 प्रत्यारोपण किये जाते हैं, जबकि बंगाल में ऐसे एक भी मामले नहीं देखे गये हैं. वर्ष 2014 में चेन्नई में 80 व मुंबई में 71 अंग प्रत्यारोपण हुए हैं. इसी प्रकार, अब राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी इसके लिए स्टेट आर्गन एंड ट्रांसप्लांट सेंटर बनाने का फैसला किया है और यह सेंटर आरजीकर व एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बनाया जायेगा. यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग के निदेशक सुशांत बनर्जी ने दी. उन्होंने बताया कि राज्य में अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को बहाल करने के लिए 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है.
इसके साथ ही निजी अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण पर निगरानी रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष सेल का गठन करने का फैसला किया है और साथ ही प्रत्येक निजी अस्पताल में एक स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति होगी, जो अंग प्रत्यारोपण से पहले पूरी जांच करेंगे और उनकी मंजूरी के बाद ही प्रत्यारोपण की अनुमति दी जायेगी.
गौरतलब है कि वर्ष 2013 में महानगर में स्थित एसएसकेएम अस्पताल को केंद्र ने अंग प्रत्यारोपण की मान्यता दी है, लेकिन वर्ष 2014 में भी यहां एक भी आर्गन ट्रांसप्लांट नहीं हुआ है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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