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शैक्षिक क्रांति के प्रवर्तक डॉ अच्युत सामंत

कोलकाता: कीस के संस्थापक डॉ अच्युत सामंत ने अपनी असाधारण कामयाबी से पूरे भारत में शैक्षिक क्रांति ला दी है. उनके विश्व विख्यात दो शैक्षिक संस्थान-केआइआइटी (कीट) कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी और केआइएसएस (कीस),कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज आज विश्व शिक्षा जगत की अनुपम मिशाल बन चुके हैं. एक तरफ जहां कीट भारत के […]

कोलकाता: कीस के संस्थापक डॉ अच्युत सामंत ने अपनी असाधारण कामयाबी से पूरे भारत में शैक्षिक क्रांति ला दी है. उनके विश्व विख्यात दो शैक्षिक संस्थान-केआइआइटी (कीट) कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी और केआइएसएस (कीस),कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज आज विश्व शिक्षा जगत की अनुपम मिशाल बन चुके हैं. एक तरफ जहां कीट भारत के बेस्ट 30 तकनीकी कॉलेजों में से एक है, वहीं कीस विश्व का एक मात्र सबसे बड़ा आदिवासी आवासीय विद्यालय बन चुका है.
आशाओं के प्रकाश स्तंभ
अपने भाग्य और पुरु षार्थ दोनों पर विश्वास रखते हैं डॉ अच्युत सामंत. विश्वस्तरीय कीस की स्थापना और अपनी शैक्षिक पहल को डॉ सामंत ईश्वर कृपा ही मानते हैं. डॉ सामंत जब 24-25 साल के थे, वह एक इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना चाहते थे. उस वक्त उनके पास कुछ भी नहीं था. न पैसा, न ही कोई सहायक और न ही कोई सलाहकार. उन्होंने स्वयं अपनी कमाई के मात्र पांच हजार की जमा पूंजी से 1992 में कीट की स्थापना की. कीट को आगे चलाने के लिए 1995 में उनके सिर पर 15 लाख रु पये का कर्ज हो गया. एक दिन ऐसा आया कि कर्ज अदायगी में अपने को असमर्थ पाकर आत्महत्या करने की ठान ली, लेकिन भाग्य का खेल देखिए कि अचानक बिना कोई शर्त के एक बैंक सामने आया. उसने कीट भवन को देख कर कुल 25 लाख रु पये का कर्ज उन्हें दे दिया और तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. कीट में आज 22 हरे-भरे कैंपस हैं, जहां पर लगभग 100 स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्र म नियमित चलते हैं. कीट में आज लगभग 25 हजार बच्चे हैं, जबकि भारत के बेस्ट 30 कॉलेजों में से एक कीट भी बेस्ट कॉलेज है. सच तो यही है कि डॉ सामंत के सपनों को साकार करती हुई उनकी दोनों विश्व स्तरीय संस्थान कीट-कीस कुल 400 एकड़ भू-भाग पर ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर में अविस्थत हैं.
डॉ सामंत ने कीस की स्थापना 1992 में की. अपने कीट से प्राप्त आय को उन्होंने कीस में लगाया, जहां कुल 125 बंधुआ मजदूरों के बच्चे नि:शुल्क रहते और पढ़ते थे. आज कीस में ओड़िशा के आदिवासी बाहुल्य कुल 23 जिलों के 25 हजार आदिवासी बच्चे हैं. संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न संगठनों का संस्थागत सदस्य कीस है, जहां पर नियमित अंतराल में देश-विदेश के अनेक नोबेल पुरस्कार विजेता, विधिवेता, फिल्मी हस्तियां और खिलाड़ी आदि कीस प्रबंधन आदि को देखने के लिए आते रहते हैं.
सच तो यह भी है कि आज विश्व के कुल 120 विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सीधे तौर पर है. कीट के सभी नियमित कर्मचारियों एवं अधिकारियों के मासिक वेतन का तीन प्रतिशत कीस कल्याण कोष के लिए लिया जाता है. अब कीट के वैसे अभिभावकों से भी अंशदान लिया जाता है, जो कीस के कल्याण के लिए देना चाहते हैं. इस प्रकार कीस के साल भर के 90 प्रतिशत व्यय का इंतजाम कीट ही करता है, बाकि अनेक उदारमना, सहृदय व्यक्ति और संगठन भी कीस के कल्याण हेतु खुले दिल से दान देते हैं. डॉ सामंत को गुसी अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार जैसे अनेक अवार्ड मिल चुके हैं. डॉ सामंत के जीवन का लक्ष्य कीस की 30 अन्य शाखाएं ओड़िशा के 30 जिला मुख्यालयों में खोलना है. अलग-अलग प्रदेशों में 2020 तक कीस की 30 शाखाएं खोलें. पश्चिम बंगाल के आदिवासी क्षेत्रों के आदिवासी बच्चों के लिए कीस की नयी शाखा खोलने के सिलिसले में तीन साल पूर्व वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिल चुके हैं और उनकी चाहत है कि कीस की शाखाएं पूरे भारत में खोलें.
Prabhat Khabar Digital Desk
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