अपने अंदर ढूंढ़ें अपना आनंद: क्षमाराम
Author Prabhat khabar digital desk
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हावड़ा : परमात्मा प्रेम के समुद्र हैं. भगवान से हम जितना भी प्रेम करें, उन्हें कम ही लगता है पर यह प्रेम उनको बहुत अच्छा लगता है. परमात्मा एक है पर अनेक रूपों में उन्हें देखा जा सकता है. जड़ एवं चेतन रूपों में भी. कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि तुम मुझे अनेक रूपों […]
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हावड़ा : परमात्मा प्रेम के समुद्र हैं. भगवान से हम जितना भी प्रेम करें, उन्हें कम ही लगता है पर यह प्रेम उनको बहुत अच्छा लगता है. परमात्मा एक है पर अनेक रूपों में उन्हें देखा जा सकता है. जड़ एवं चेतन रूपों में भी. कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि तुम मुझे अनेक रूपों में देख सकते हो.
ब्रह्माजी के मुख से चारों वेद निकले हैं पर इतने ज्ञानी होने के बावजूद उन्हें भक्ति का बोध नहीं हुआ था, पर जब उन्हें भक्ति का बोध हुआ तब वह समझ गये कि भक्ति के बिना ज्ञान व्यर्थ है. भक्ति के अंदर कल्याण का भाव होता है. भक्ति में मांग होती है जबकि ज्ञान में मांग नहीं. ज्ञान में पुरुषार्थ की बात होती है लेकिन भक्ति में नहीं. स्वामी रामसुखदास महाराज हमेशा कहते थे, हे नाथ मैं आपको भूलूं नहीं. भगवान से हमें यही प्रार्थना करना चाहिए कि मैं आपको कभी नहीं भूलूं और आपकी कृपाओं को जगत में ढूंढता रहूं.
जैसे किसी का पांच करोड़ रुपये का हीरा कचरे में गिर जाता है, तो उसे उस हीरे को ढूंढते वक्त कचरे की बदबू परेशान नहीं करती, जब वह कचरे में हीरे को पा लेता है, तो प्रसन्न हो जाता है और स्नान करने के बाद उसमें कचरे की गंदगी का भाव नहीं आता. इसी तरह इस जगत में परमात्मा रूपी हीरा खो गया है. उसे हम खोजेंगे, तो वह तुरंत मिल जायेंगे. हमें हृदय और वाणी से परमात्मा को प्रणाम करना चाहिए.
आजकल समाज में देखा जा रहा है कि बच्चे अपने ही माता-पिता को प्रणाम नहीं कर रहे हैं, जो कि गलत है. अपने माता-पिता व बुजुर्गों को प्रणाम करना परमात्मा के प्रणाम के बराबर है. हम संसार में सुख को ढूंढते हैं, जबकि सुख तो हमारे अंदर ही है. अगर हम अपने अंदर ही सुख को ढूंढ़ेंगे, तो सुख मिलेगा और हम आनंद से भर जायेंगे.
ये बातें सिंहस्थल पीठाधीश्वर स्वामी क्षमाराम महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन करते हुए विवेक विहार क्लब हाउस सभागार में कहीं. कार्यक्रम को सफल बनाने में मनमोहन मल्ल, निर्मला मल्ल, पुरुषोत्तम पचेरिया, पवन पचेरिया, हरिभगवान तापरिया आदि सक्रिय रहे. महावीर प्रसाद रावत ने बताया कि रविवार को कथा की पूर्णाहुति होगी.
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