नीति आयोग निरर्थक : ममता

Updated at : 08 Jun 2019 5:32 AM (IST)
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नीति आयोग निरर्थक : ममता

टकराव : 15 जून को नीति आयोग की बैठक में नहीं शामिल होंगी सीएम पीएम की अध्यक्षता में 15 को होगी बैठक कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिर केंद्र की यूपीए सरकार की नीतियों के खिलाफ खड़ी हुई हैं. मुख्यमंत्री ने 15 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की होनेवाली बैठक […]

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टकराव : 15 जून को नीति आयोग की बैठक में नहीं शामिल होंगी सीएम

पीएम की अध्यक्षता में 15 को होगी बैठक
कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिर केंद्र की यूपीए सरकार की नीतियों के खिलाफ खड़ी हुई हैं. मुख्यमंत्री ने 15 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की होनेवाली बैठक में शिरकत करने से इनकार करते हुए इसे ‘निरर्थक’ करार दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नीति आयोग की बैठक में नहीं शामिल होने के निर्णय की जानकारी दी है.
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सुश्री बनर्जी ने कहा कि नीति आयोग के पास न तो कोई वित्तीय शक्तियां हैं और न ही राज्य की योजनाओं में मदद के लिए उसके पास शक्ति है. ऐसे में किसी भी प्रकार की वित्तीय शक्तियों से वंचित ऐसी संस्था की बैठक में शामिल होना, उनके लिए निरर्थक है.
शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में एक प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बैठक से राज्य को कोई फायदा ही नहीं, तो वहां क्यों जाना. इससे बेहतर योजना आयोग था, जहां राज्यों की योजनाओं पर भी चर्चा होती थी और उनकी बातों को भी सुना जाता था. योजना आयोग के माध्यम से राज्यों को फंड भी मुहैया कराया जाता था. मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि सहकारी संघवाद को बढ़ाने और संघीय नीति की मजबूती के लिए अंतरराज्यीय परिषद (आइएससी) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
उन्होंने कहा : पिछले साढ़े चार साल में नीति आयोग से प्राप्त अनुभव ने मेरे पहले के विचार को बल दिया कि हमें संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित अंतरराज्यीय परिषद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और देश की प्रमुख इकाई के तौर पर आइएससी को अपने कार्य के निष्पादन के लिए इसमें समुचित संशोधन कर इसके कामकाज का दायरा बढ़ाना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा : इससे सहकारी संघवाद को बढ़ावा मिलेगा और संघीय नीति को मजबूती मिलेगी. मैंने बार-बार कहा है राष्ट्रीय विकास परिषद, जो काफी हद तक दम तोड़ चुकी है, उसे भी अंतरराज्यीय परिषद की इस विस्तृत संवैधानिक संस्था में मिलाया जा सकता है. देश के विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए मोदी 15 जून को नीति आयोग की संचालन परिषद की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता करनेवाले हैं. हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी कैबिनेट के अन्य मंत्री उनकी ओर से बैठक में हिस्सा लेंगे या नहीं.
इससे पहले भी ममता बनर्जी कई बार नीति निर्माता थिंक-टैंक की बैठकों में शामिल नहीं हुई थीं और योजना आयोग को भंग कर नये ढांचे के निर्माण को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर कर चुकी हैं. उन्होंने पिछले साल बैठक में पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधित्व के लिए राज्य के वित्त मंत्री डॉ अमित मित्रा को भेजा था. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री से चर्चा किये बगैर नीति आयोग के गठन की एकतरफा घोषणा की गयी.
उन्होंने नीति आयोग के अधिकारियों और एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के बयानों का उदाहरण दिया, जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के प्रयास के तहत थिंक-टैंक को धन आवंटित करने की शक्ति प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था. राज्य में तृणमूल और भारतीय जनता पार्टी के बीच बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच बनर्जी का नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं होने का यह फैसला सामने आया है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले वह प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल नहीं हुईं थी.
राज्य में राजनीतिक हिंसा में भाजपा के 54 कार्यकर्ताओं की हत्या के दावे को ‘गलत’ ठहराते हुए उन्होंने 30 मईको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आने से मना कर दिया था.
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