बंगाल: 2014 की तुलना में तृणमूल को 12 सीटों का नुकसान, कांग्रेस दो पर सिमटी, वाममोर्चा का खाता तक नहीं खुला

Published at :24 May 2019 9:33 AM (IST)
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बंगाल: 2014 की तुलना में तृणमूल को 12 सीटों का नुकसान, कांग्रेस दो पर सिमटी, वाममोर्चा का खाता तक नहीं खुला

कोलकाता : पूरे देश के साथ पश्चिम बंगाल में भी भाजपा को अभूतपूर्व सफलता मिली है. पार्टी 18 सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटें मिलती दिख रही हैं. खबर लिखे जाने तक कांग्रेस दो सीटों पर आगे थी. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी बहरमपुर और अबु हाशेम खान चौधरी […]

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कोलकाता : पूरे देश के साथ पश्चिम बंगाल में भी भाजपा को अभूतपूर्व सफलता मिली है. पार्टी 18 सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटें मिलती दिख रही हैं. खबर लिखे जाने तक कांग्रेस दो सीटों पर आगे थी. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी बहरमपुर और अबु हाशेम खान चौधरी मालदा दक्षिण की सीट बचाने में सफल होते दिख रहे हैं. राज्य में लगातार 34 वर्षों तक शासन करने वाला वाममोर्चा अपना खाता तक नहीं खोल सका है. अभी अंतिम परिणाम आना बाकी है. 2014 के चुनाव में तृणमूल ने 34 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को चार, वाममोर्चा को दो और भाजपा को दो सीटें मिली थीं.

इस बार के चुनाव में राज्य की तृणमूल सरकार में मंत्री सुब्रत मुखर्जी, सांसद दिनेश त्रिवेदी, मुनमुन सेन, ममता बाला ठाकुर, डॉ रत्ना दे नाग और डॉ मानस भुइंया जैसे बड़े नेता चुनाव हार गये हैं. माकपा के मोहम्मद सलीम भी रायगंज की अपनी सीट नहीं बचा सके. भाजपा के राहुल सिन्हा को कोलकाता उत्तर में हार का सामना करना पड़ा है.

भाजपा को उत्तर बंगाल और जंगलमहल के इलाकों में बड़ी सफलता मिली है. दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, रायगंज, आसनसोल, बांकुड़ा, विष्णुपुर, हुगली, बनगांव जैसी कठिन माने जाने वाली सीटों पर भी भाजपा को विजय मिली. हालांकि तृणमलू के अभिषेक बनर्जी, माला राय, मिमी चक्रवर्ती, नुरसत जहां, सुदीप बंद्योपाध्याय, प्रसून बनर्जी, दीपक अधिकारी (देव), कल्याण बनर्जी, सौगत राय, डॉ काकोली घोष दस्तिदार, शिशिर अधिकारी, दिव्येंदू अधिकारी को सफलता हासिल हुई है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नतीजों के घोषित होने के बाद जीतने वाले प्रत्याशियों को बधाई दी. साथ ही यह भी कहा कि पराजित होने वालों की भी हार नहीं हुई है. दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा मुख्यालय में जश्न का माहौल था. कार्यकर्ता सड़क पर उतर आये और मिठाइयां बांटने लगे. इस चुनाव में सबसे बुरा हाल वाममोर्चा का रहा. राज्य में वह खाता भी नहीं खोल सका. माना जा रहा है कि माकपा का वोट सीधे भाजपा को ट्रांसफर हुआ है. 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के मुताबिक राज्य में तृणमूल को 39.05 फीसदी वोट मिले थे. माकपा सहित अन्य वाम दलों को 29.71 फीसदी, भाजपा को 17.02 फीसदी तथा कांग्रेस को 9.58 फीसदी वोट हासिल हुए थे.
हालांकि इस बार के लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 43.38 फीसदी और भाजपा को 40.2 फीसदी वोट मिले हैं. जबकि वामदलों को करीब 7.55 फीसदी वोट हासिल हुए हैं. पिछली बार के वाम दलों का वोट प्रतिशत करीब 30 फीसदी से घटकर 7.50 प्रतिशत रह गया है. यानी उनके वोट प्रतिशत में 22.50 फीसदी की कमी आयी है. भाजपा का वोट प्रतिशत पिछली बार की तुलना में 22.18 फीसदी बढ़ा है. तृणमूल का वोट प्रतिशत भी 4.33 फीसदी बढ़ा है. कांग्रेस का वोट शेयर 1.10 फीसदी घटा है. स्पष्ट है कि भाजपा को जो बढ़त मिली है वह मूल रूप से वामदलों के वोट बैंक में सेंध लगाकर मिली है.
सीटें जिन पर तृणमूल जीती/आगे है: आरामबाग, बारासात, बर्दवान पूर्व, बशीरहाट, बीरभूम, बोलपुर, डायमंड हार्बर, दमदम, घाटाल, हावड़ा, जादवपुर, जंगीपुर, जयनगर, कांथी, कोलकाता दक्षिण, कोलकाता उत्तर, कृष्णनगर, मथुरापुर, मुर्शिदाबाद, श्रीरामपुर, तमलुक और उलबेड़िया. सीटें जिन पर भाजपा जीती/आगे है: अलीपुरद्वार, कूचबिहार, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, मालदा उत्तर, रायगंज, बालुरघाट, आसनसोल, बनगांव, बांकुड़ा, बैरकपुर, विष्णुपुर, बर्दवान दुर्गापुर, हुगली, झाड़ग्राम, मेदिनीपुर, पुरुलिया और रानाघाट. कांग्रेस को मिलीं सीटें :बहरमपुर और मालदा दक्षिण
दलगत स्थिति
पार्टी – 2019- 2014
तृणमूल 22- 34
भाजपा 18- 02
कांग्रेस 02- 04
वाममोर्चा 00- 02
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