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पुलवामा टेरर अटैक : शहीद हुए बंगाल के भी दो लाल

Updated at : 16 Feb 2019 1:15 AM (IST)
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पुलवामा टेरर अटैक : शहीद हुए बंगाल के भी दो लाल

गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में पश्चिम बंगाल के दो जवान भी शहीद हुए हैं. इनमें एक जवान बबलू सांतरा हावड़ा जिले के बाउड़िया का रहनेवाला था तो दूसरा जवान सुदीप विश्वास नदिया जिले का रहनेवाला था. दुख की इसी घड़ी में जहां दोनों जवानों के परिजनों को लोग ढांढस बंधा […]

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गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में पश्चिम बंगाल के दो जवान भी शहीद हुए हैं. इनमें एक जवान बबलू सांतरा हावड़ा जिले के बाउड़िया का रहनेवाला था तो दूसरा जवान सुदीप विश्वास नदिया जिले का रहनेवाला था. दुख की इसी घड़ी में जहां दोनों जवानों के परिजनों को लोग ढांढस बंधा रहे हैं तो वहीं दोनों की शहादत को लोग याद कर रहे हैं. वहीं, राज्य के मंत्रियों व प्रशानिक अिधकािरयों ने भी शहीदों के परिजनों को हरसंभव मदद का आश्वान दिया है.

इसी वर्ष रिटायर होनेवाले थे हावड़ा के शहीद बबलू
मुख्यमंत्री ने शहीद की मां से फोन पर की बात
शनिवार शाम तक पहुंचेगा पार्थिव शरीर
हावड़ा : जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में ग्रामीण हावड़ा का एक जवान बबलू सांतरा (39) शहीद हो गया. बबलू का घर बाउड़िया थाना अंतर्गत चक्कासीपाड़ा में है. बबलू के शहीद होने की खबर मिलते ही पूरे घर आैर गांव में मातम पसरा हुआ है. घर पर शहीद की विधवा मां, पत्नी व 12 वर्षीय बेटी है. पिता का देहांत हो चुका है. घटना की खबर मिलते ही स्थानीय विधायक पुलक राय, मंत्री अरूप राय, मंत्री लक्ष्मी रतन शुक्ला शहीद के घर पहुंचे आैर परिजनों को ढांढस बंधाया.
पुलक राय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की शहीद जवान की मां बनमाली सांतरा से बात करवायी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शहीद परिवार को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है. पत्नी मीता सांतरा ने बताया कि इस वर्ष बबूल रिटायर होनेवाले थे. पिछले वर्ष दिसंबर महीने में छुट्टी पर घर आये थे. छुट्टी में घर आये बबलू ने मां से कहा था कि अब कुछ महीनों की नौकरी है. रिटायर होते ही आराम से परिवार के साथ रहूंगा. लेकिन बबलू का यह सपना अधूरा रह गया.
नदिया के सुदीप ने कहा था : जल्द लौटूंगा घर
घटना से आधे घंटे पहले फोन पर हुई थी बात कहा : पापा आप चिंता मत करना
कल्याणी. पापा मैं जल्द लौटूंगा, चिंता मत करना. घर लौटने के बाद मकान अच्छे से बनाऊंगा. इस बार जल्दी आऊंगा. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के अवंतिपोरा इलाके में आतंकियों के हमले में शहीद नदिया के सीआरपीएफ जवान सुदीप विश्वास ने घटना से पूर्व अपने घरवालों से फोन पर हुई बातचीत में यही कहा था. घटना से आधे घंटे पहले ही सुदीप विश्वास की उसके पिता से बात हुई थी. वह अपने पिता संन्यासी विश्वास से कहा था कि पापा मैं जल्द लौटूंगा, चिंता मत करना. लेकिन वह इस तरह शहीद होकर ताबूत में बंद लौट रहा है, यह किसी ने सोचा नहीं था.
सुदीप के पिता संन्यासी विश्वास ने बताया कि गुरुवार को हुई हमले की घटना के बाद से ही हम सब चिंतित थे और लगातार बेटे से संपर्क की कोशिश कर रहे थे. लेकिन फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था. जिस बात का डर था, आखिर वही हुआ. शुक्रवार सुबह से ही लगातार घर पर फोन आने लगे थे. फोन पर सिर्फ यही पूछा जा रहा था कि सुदीप के शरीर में तिल है या नहीं? चश्मा पहनता था कि नहीं? सुदीप के बारे में तरह-तरह के कई तथ्य पूछे जा रहे थे. अंत में बताया गया कि हमले में वह भी शहीद हो गया है. यह सुनते ही पूरा परिवार टूट गया. घर के लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. घर पर मातम पसरा हुआ है.
शोक में डूबा गांव, घर पर उमड़ी भीड़
घटना की खबर मिलने के बाद से ही नदिया के तेहट्ट के हांसपुकुरिया गांव पूरी तरह से शोक में डूबा है. इधर, गांव के लोगों की भीड़ सुदीप के घर पर जुटी रही. लोग एक-एक कर पहुंच रहे हैं और वृद्ध माता-पिता को सांत्वना दे रहे है. इधर, दुखद घटना को बयान करते हुए वृद्ध व असहाय माता-पिता दोनों रो पड़े और कहा कि हमारे परिवार का वही एक लाल था. हमारा एक ही सहारा था. इकलौते बेटे शहीद होने के बाद मां ममता विश्वास-पिता संन्यासी विश्वास का पूरा सहारा ही छीन गया है. बेटे के साथ ही परिवार के जैसे सारे अरमान और सपने टूट गये. वह परिवार का एकमात्र कमानेवाला था.
कई सपने थे, कुछ पूरे हुए, कुछ अधूरे रह गये
सुदीप के परिवारवालो‍ं का कहना है कि बचपन से ही उसे सेना में जाने की प्रबल इच्छा थी. चार साल पहले वह सीआरपीएफ में शामिल हुआ था. उसका सपना तो सच हुआ. वह सीआरपीएफ की 98वीं बटालियन का जवान था. लेकिन कुछ सपने उसके जाने के साथ ही अधूरे रह गये. परिवार में माता-पिता और एक बहन है. सेना में शामिल होने के बाद ही कुछ पैसे मिलने पर उसने बहन की शादी और घर बनाने में हाथ लगाया. अपनी शादी और सुंदर घर का सपना उसका अधूरा ही रह गया. सुदीप छुट्टी मनाकर 14 जनवरी को ही पुन: ड्यूटी पर आया था. इधर, उसकी शादी के लिए रिश्ते की बात चल रही थी. गुरुवार सुबह सुदीप के पिता संन्यासी विश्वास अपने बेटे से अंतिम बात किये थे.
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