इंजीनियरिंग छोड़ सितार का दामन थामने वाले पं. बुद्धादित्य मुखर्जी को मिलेगा पद्मभूषण, स्वपन चौधरी और चांडी मेमन को पद्मश्री
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Jan 2019 11:29 PM
नयी दिल्ली/कोलकाता : भारत के पहले मेटलॉजिकल इंजीनियरिंग करने के बाद कला-संगीत के क्षेत्र में सितार वादन का दामन थामने वाले पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी को मोदी सरकार ने पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है. इसके अलावा, सरकार ने पश्चिम बंगाल के रुधिर विज्ञानी मेमन चांडी और बंगाल के प्रमुख तबला वादक स्वपन […]
नयी दिल्ली/कोलकाता : भारत के पहले मेटलॉजिकल इंजीनियरिंग करने के बाद कला-संगीत के क्षेत्र में सितार वादन का दामन थामने वाले पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी को मोदी सरकार ने पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है. इसके अलावा, सरकार ने पश्चिम बंगाल के रुधिर विज्ञानी मेमन चांडी और बंगाल के प्रमुख तबला वादक स्वपन चौधरी को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जायेगा. हालांकि, तबला वादक स्वपन चौधरी को पद्मविभूषण पुरस्कार से पहले ही नवाजा जा चुका है.
दरअसल, सितार वादन के क्षेत्र में पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को दुनियाभर में प्रसारित करने वाले कलाकारों में प्रमुख स्थान रखते हैं. पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी का जन्म वर्ष 1955 में सुप्रसिद्ध सितार वादक पंडित विमलेंदु मुखर्जी के घर हुआ था. उन्होंने कम उम्र में ही अमदादखानी घराने के प्रतिष्ठित कलाकार पिता विमलेंदु मुखर्जी की देखरेख में 29 वर्षों तक लगातार अभ्यास के बाद भारतीय सितार वाद्य जगत में अपना स्थान बनाया. उन्होंने बहुत ही कुशलता के साथ रागों को उनके शुद्ध रूप में चित्ताकर्षक रूप में वादन करते रहे हैं.
हालांकि, उन्होंने मेटेलॉजिकल इंजीनियरिंग में भारत के पहले स्नातक हैं, लेकिन उन्होंने इसे दरकिनार करते हुए सितार वादन की कला को विकसित करने में अपना अमूल्य योगदान दिया. वर्ष 1976 में बुद्धादित्य का सितार वादन सुनकर सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता सत्यजीत रे ने कहा था कि अद्भुत. मैं बुद्धादित्य मुखर्जी का सितार वादन सुनकर आश्चर्यचकित हो गया. उन्होंने सोवियत संघ, पश्चिम जर्मनी, युगोस्लाविया, बुल्गारिया, पोलैंड, चेकेस्लाविया, फ्रांस, इटली, अमेरिका, हालैंड, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में सितार वादन किया.
इसके अलावा, वर्ष 1947 में कोलकाता जन्मे स्वपन चौधरी भारत के प्रसिद्ध तबला वादक हैं. उन्हें वर्ष 1997 में संगीत नाटक अकादमी, भारत की नेशनल एकेडमी ऑफ म्यूज़िक, डांस एंड ड्रामा द्वारा इन्हें सम्मानित किया गया है. इन्होंने जाधवपुर विश्वविद्यालय, कलकत्ता से अर्थशास्त्र में डिग्री भी हासिल की.
ये भारतीय शास्त्रीय संगीत के कई संगीतकारों पंडित रवि शंकर, उस्ताद अली अकबर खान और पंडित जसराज शामिल हैं. इन्होंने पांच साल की उम्र में तबला सीखना शुरू कर दिया था. स्वपन चौधरी को भारत सरकार और विभिन्न संगीत संस्थानों द्वारा तबला के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया है. ये कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स, वालेंसिया, कैलिफ़ोर्निया के शिक्षण स्टाफ के भी सदस्य हैं.
विख्यात तबला वादक स्वपन चौधरी को पद्म विभूषण से नवाजा गया है. वष 1997 में संगीत नाटक अकादमी, भारत की नेशनल एकेडमी ऑफ म्यूज़िक और डांस एंड ड्रामा द्वारा इन्हें सम्मानित किया गया है.
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