कम्‍प्‍यूटर डाटा पर गृह मंत्रालय के फैसले से बिफरीं CM ममता, कहा- केंद्र सरकार का फैसला खतरनाक

Updated at : 21 Dec 2018 4:18 PM (IST)
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कम्‍प्‍यूटर डाटा पर गृह मंत्रालय के फैसले से बिफरीं CM ममता, कहा- केंद्र सरकार का फैसला खतरनाक

कोलकाता : केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 10 एजेंसियों को किसी के भी कम्‍प्यूटर डेटा की जांच का अधिकार दिये जाने के विवादित आदेश पर राजनीति तेज हो गयी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को ‘खतरनाक’ बताते हुए कहा कि यह हमसे हमारी आजादी छीन लेगी. […]

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कोलकाता : केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 10 एजेंसियों को किसी के भी कम्‍प्यूटर डेटा की जांच का अधिकार दिये जाने के विवादित आदेश पर राजनीति तेज हो गयी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को ‘खतरनाक’ बताते हुए कहा कि यह हमसे हमारी आजादी छीन लेगी.

मुख्यमंत्री ने ट्वीटर के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पता चला है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 10 एजेंसियों को किसी भी कम्‍प्यूटर में मौजूद, रिसीव और स्टोर्ड डेटा समेत किसी भी जानकारी की निगरानी, इंटरसेप्ट और डिक्रिप्ट करने का अधिकार दिया गया है. केंद्र सरकार का यह फैसला खतरनाक है.

उन्‍होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार लोगों के मोबाइल या कम्‍प्‍यूटर पर निगरानी करना चाहती है तो उनके पास पहले से ही यह तकनीक है. फिर आम लोगों को क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने इस संबंध में देश की जनता से राय मांगी है. उल्लेखनीय है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो से लेकर एनआईए तक 10 केंद्रीय एजेंसियां अब किसी भी कंप्यूटर में मौजूद, रिसीव और स्टोर्ड डेटा समेत किसी भी जानकारी की निगरानी, इंटरसेप्ट और डिक्रिप्ट कर सकती हैं.

गृह मंत्रालय की तरफ से जारी की गयी एक आदेश के अनुसार, 10 एजेंसियों के पास अधिकार है कि वे किसी भी कंप्यूटर के डेटा को चेक कर सकती हैं. इन एजेंसियों में इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल टैक्स बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, कैबिनेट सचिवालय (आर एंड एडब्ल्यू), डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस (जम्मू-कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और आसाम के क्षेत्रों के लिए) और पुलिस आयुक्त, दिल्ली का नाम शामिल है.

इस आदेश के अनुसार सभी सब्सक्राइबर या सर्विस प्रोवाइडर और कंप्यूटर के मालिक को जांच एजेंसियों को तकनीकी सहयोग देना होगा. अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें सात साल की सजा देने के साथ जुर्माना लगाया जा सकता है. गृह मंत्रालय ने आईटी एक्ट, 2000 के 69 (1) के तहत यह आदेश दिया है, जिसमें कहा गया है कि भारत की एकता और अखंडता के अलावा देश की रक्षा और शासन व्यवस्था बनाये रखने के लिहाज से जरूरी लगे तो केंद्र सरकार किसी एजेंसी को जांच के लिए आपके कंप्यूटर को एक्सेस करने की इजाजत दे सकती है.

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