कोलकाता : जलपाईगुड़ी में दिखा धार्मिक एकता का अनोखा उदाहरण, मुस्लिम शिक्षक ने हिंदू रीति-रिवाज से किया साथी का अंतिम संस्कार

Updated at : 06 Dec 2018 2:40 AM (IST)
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कोलकाता : जलपाईगुड़ी में दिखा धार्मिक एकता का अनोखा उदाहरण, मुस्लिम शिक्षक ने हिंदू रीति-रिवाज से किया साथी का अंतिम संस्कार

कोलकाता : धार्मिक एकता की इससे बड़ी मिसाल शायद ही कहीं देखने को मिले, जहां बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में एक मुस्लिम स्कूल टीचर ने अपने हिंदू साथी का अंतिम संस्कार करने के लिए अपना सिर और मूंछें मुड़वाईं. इसके बाद अशफाक अहमद ने पूरे रीति-रिवाजों के साथ संजन कुमार विश्वास का अंतिम संस्कार किया. […]

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कोलकाता : धार्मिक एकता की इससे बड़ी मिसाल शायद ही कहीं देखने को मिले, जहां बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में एक मुस्लिम स्कूल टीचर ने अपने हिंदू साथी का अंतिम संस्कार करने के लिए अपना सिर और मूंछें मुड़वाईं. इसके बाद अशफाक अहमद ने पूरे रीति-रिवाजों के साथ संजन कुमार विश्वास का अंतिम संस्कार किया.
दरअसल में संजन के परिवार में उनकी तीन बेटियां ही थीं, तो अशफाक ने उनका अंतिम संस्कार करने का फैसला किया. इतना ही नहीं, जिस तरह से हिंदुओं में परिवार के सदस्य 11 दिन का शोक मनाते हैं, वैसे ही अशफाक, उनकी पत्नी और उनका नौ साल का बेटा भी शोक मनायेंगे.
क्या है मामला
गौरतलब है कि बनेरहाट हाइस्कूल से संजन 2005 में रिटायर हुए थे, जबकि अशफाक अब भी वहीं पढ़ाते हैं. अशफाक संजन को अपना मेंटर मानते थे. 1999 में जब अशफाक ने स्कूल ज्वाइन किया था, तब से संजन ने उन्हें काफी कुछ सिखाया था.
गौरतलब है कि अशफाक के पिता अभी मुर्शिदाबाद में रहते हैं. अशफाक ने कहा : मैं उदारवादी विचारोंवाला व्यक्ति हूं और यह सब संजन सर की वजह से है. मैं हमेशा कहता हूं कि मेरे तीन पिता हैं- एक जिन्होंने मुझे जन्म दिया, दूसरे मेरे गुरु और तीसरे संजन सर. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कह रहे हैं. उन्होंने बस वही किया, जिसकी जरूरत थी.
हर वक्त मेरे साथ खड़े रहे संजन सर
अशफाक ने कहा : जब मेरा अप्वाइंटमेंट हुआ, तो कई लोगों ने इसका विरोध किया कि धर्म के आधार पर किसी की नौकरी गलत है. लेकिन संजन सर मेरे साथ खड़े रहे. उन्होंने मुझसे यह सब इग्नोर करने को कहा और तब तक मुझे अपने घर पर रखा. जब तक मुझे मेरा घर नहीं मिल गया. वह मानवता में विश्वास करते थे, धर्म में नहीं.
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