कोलकाता : शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षा रत्न देकर सम्मानित किया गया

Updated at : 06 Sep 2018 9:13 AM (IST)
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कोलकाता : शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षा रत्न देकर सम्मानित किया गया

कोलकाता : राज्य सरकार की ओर से शिक्षक-दिवस के माैके पर बुधवार को नजरूल मंच पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें प्राथमिक, माध्यमिक, मदरसा व उच्च माध्यमिक स्तर पर शिक्षा में बेहतरीन काम करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को भारत-रत्न देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में कई स्कूलों के बेहरीन प्रदर्शन को भी सराहा गया. […]

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कोलकाता : राज्य सरकार की ओर से शिक्षक-दिवस के माैके पर बुधवार को नजरूल मंच पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया.
इसमें प्राथमिक, माध्यमिक, मदरसा व उच्च माध्यमिक स्तर पर शिक्षा में बेहतरीन काम करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को भारत-रत्न देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में कई स्कूलों के बेहरीन प्रदर्शन को भी सराहा गया. इस माैके पर मुख्य अतिथि के ताैर पर उपस्थित राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में प्रत्येक बच्चे को अच्छी शिक्षा देने के लिए सरकार भरसक कोशिश कर रही है.
न केवल मिड डे मील बल्कि ड्रेस, किताबें, ड्रेस, कन्याश्री व स्कॉलरशिप जैसी सुविधाओं के जरिये बच्चों को शिक्षा की ओर आकर्षित किया जा रहा है, जिससे बंगाल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहे. मंत्री ने कहा कि कई खाली पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की भी प्रक्रिया जारी है. मेधा के आधार पर भर्ती की जा रही है.
इसमें सरकार यह कोशिश करेगी कि जो भी महिला शिक्षिका नाैकरी के लिए आवेदन करेगी, उनको निवास स्थान (होम डिस्ट्रिक्ट) में ही नियुक्ति की व्यवस्था की जाये, जिससे उनको कोई समस्या न हो. हम चाहते हैं कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्ष का स्तर ऊंचा उठे. समाज के प्रत्येक छात्र के भविष्य निर्माण में शिक्षक की अहम भूमिका है. शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए ही शिक्षक-दिवस का महत्व है. शिक्षक जीवन में हमेशा सम्माननीय हैं.
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री द्वारा महिला शिक्षिकाअों को तरजीह देने वाले बयान से शिक्षक संगठनों में नाराजगी है. कई शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में टीचर की नियुक्ति में कोई भी भेदभाव नहीं किया जा सकता है, यह भारतीय संविधान में भी बोला गया है. परीक्षा के बाद चयन होता है, इंटरव्यू होता है, उसके बाद मेधा व मेरिट के आधार पर पोस्टिंग की जाती है. इसमें महिला या पुरुष कोई भी हो सकता है.
केवल महिलाओं को घर के पास के सेंटर में भर्ती करने की बात कहना मंत्री को शोभा नहीं देता है. इस विषय में बंगीय शिक्षा-ओ शिक्षा कर्मी समिति के सहसचिव सपन मंडल का कहना है कि ऐसी बात नहीं है कि हमको समाज की महिलाओं के प्रति सम्मान या सहानुभूति नहीं है लेकिन नियुक्ति मेरिट के आधार पर ही होने की प्रक्रिया है. सरकार ने लोगों के सामने वादा तो कर लिया है लेकिन इसको पूरा कैसे करेगी.
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