पंचायत चुनावों को लेकर विवाद के कारण ‘संवैधानिक संकट’
Updated at : 18 Aug 2018 2:25 AM (IST)
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नयी दिल्ली/कोलकाता : राज्य सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय से कहा कि राज्य में हाल में हुए पंचायत चुनावों से जुड़े विवाद के कारण संवैधानिक संकट पैदा हो गया है क्योंकि कई पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो गया है और नये निकायों ने काम करना भी शुरू नहीं किया है. शीर्ष न्यायालय ने इससे पहले […]
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नयी दिल्ली/कोलकाता : राज्य सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय से कहा कि राज्य में हाल में हुए पंचायत चुनावों से जुड़े विवाद के कारण संवैधानिक संकट पैदा हो गया है क्योंकि कई पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो गया है और नये निकायों ने काम करना भी शुरू नहीं किया है. शीर्ष न्यायालय ने इससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत चुनाव के लिए ईमेल से भेजे गये नामांकन पत्रों को स्वीकार करने संबंधी कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर स्थगन लगा दिया था. न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्विरोध निर्वाचित नेताओं के नाम का ऐलान गजट में नहीं करने का निर्देश दिया था.
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ को बताया गया कि अनुच्छेद 243 (ई) के मुताबिक कई पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो जाने के कारण संवैधानिक संकट पैदा हो गया है. राज्य सरकार के वकील ने कहा : पंचायतों को आवंटित धन वापस लौट जायेगा. संविधान के अनुच्छेद 243 (ई) के तहत संवैधानिक संकट पैदा हो गया है.
गांवों में विकास का काम रूक गया है. इस पर उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले पर तीन न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई कर रही है, इसलिए सभी की उपस्थिति में मामले की आगे की सुनवाई होगी. शीर्ष न्यायालय अब 20 अगस्त को इस मामले की सुनवाई करेगी.
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