पंचायत चुनाव से बचना चाहते हैं भाजपा, कांग्रेस व वामो : पार्थ
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 May 2018 1:24 AM (IST)
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने गुरुवार को आरोप लगाया है कि पंचायत चुनाव में अपनी हार तय जानकर भाजपा, कांग्रेस और वामपंथी दल लगातार बहानेबाजी करते हुए चुनाव से बचना चाहते हैं. इसके लिए ये राजनीतिक दल बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं. लेकिन चुनाव आयोग ने जिस तरह 14 […]
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने गुरुवार को आरोप लगाया है कि पंचायत चुनाव में अपनी हार तय जानकर भाजपा, कांग्रेस और वामपंथी दल लगातार बहानेबाजी करते हुए चुनाव से बचना चाहते हैं. इसके लिए ये राजनीतिक दल बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं. लेकिन चुनाव आयोग ने जिस तरह 14 मई को पंचायत चुनाव की तारीख का एलान किया है, उसे मानते हुए तृणमूल कांग्रेस जनता के दरबार में जा रही है.
पार्थ चटर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पहले से ही जनता के बीच है और जनता उसके साथ है. लेकिन विरोधी दल राज्य में विकास की रफ्तार को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं. इस वजह से वे बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि राज्य चुनाव आयोग ने जब चुनाव की तारीख का एलान कर दिया, तो उसी दिन से चुनाव आचार संहिता लागू हो जाती है.
अब तक आचार संहिता लागू है. ऐसे में राज्य का आर्थिक विकास प्रभावित हो रहा है. राज्य सरकार कई योजनाओं को लागू करना चाहती है, जो कि आचार संहिता के कारण लागू नहीं हो पा रही हैं. विरोधी दल यही चाहते हैं, इसलिए वे बार-बार कोर्ट जा रहे हैं. जनता इस बात को जान गयी है, इसलिए वह विरोधी दलों को इसका जवाब देना चाहती है.
चूंकि तृणमूल कांग्रेस जनता के बीच ही रहकर काम करती है, इसलिए हमें कोई फर्क नहीं पड़नेवाला है. फर्क विरोधियों की सेहत पर पड़ रहा है. यही वजह है कि वे आदर्श व नीतियों को छोड़कर केवल तृणमूल कांग्रेस को हराने के लिए गठबंधन कर रहे हैं. राज्य की जनता उन्हें पूरा जवाब देगी.
चुनाव आयोग को पंगु बना रही तृणमूल : दिलीप
कोलकाता. प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर तृणमूल कांग्रेस उसे पंगु बनाकर सभी पावर अपने हाथ में लेना चाहती है. उसके दबाव के आगे आयोग लाचार और बेबस नजर आ रहा है. गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान दिलीप ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए काफी शर्मनाक है.
ऐसे में राज्य चुनाव आयोग को चाहिए कि वह लोकतंत्र की गरीमा को बरकरार रखते हुए चुनाव लड़ने के इच्छुक सभी लोगों को चुनाव लड़ने दे. इसके अलावा जो लोग इमेल के जरिये अपना नामांकन किये हैं, उन्हें उम्मीदवार के रूप में मान्यता दें. उन्होंने कहा कि अगर राज्य चुनाव आयोग चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाये रखता, तो जाहिर-सी बात है कि आनेवाले दिनों में लोकतंत्र के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल का सिर गर्व से ऊंचा रहता.
लेकिन तृणमूल कांग्रेस के दबाव के आगे जिस तरह से राज्य चुनाव आयोग बेबस और लाचार नजर आया, उससे पूरे देश में राज्य चुनाव आयोग की किरकिरी हुई है. मामला लगातार न्यायालय में जा रहा है, जहां पर राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार को लगातार फटकार मिल रही है.
मन्नान ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
कोलकाता : विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान ने पंचायत चुनाव को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है. श्री मन्नान ने कहा कि सर्वोच्च न्यालाय का फैसला सटीक है. सर्वोच्च न्यायालय ने बिना प्रतिद्वंद्विता विजयी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम घोषित करने पर स्थगनादेश दिया है.
उन लोगों की भी मांग थी कि 34 फीसदी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार बिना प्रतिद्वंद्विता के विजयी हुए हैं. वास्तव में वे लोगों को आतंकित कर जीते हैं तथा विरोधी दल के उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया गया है. इस बाबत सर्वोच्च न्यायालय ने सटीक फैसला किया है. उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कहा है कि पंचायत चुनाव निष्पक्ष होना चाहिए तथा सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. वे लोग भी इसकी मांग कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि वे लोग पंचायत चुनाव के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि पंचायत चुनाव हो. पंचायत कानून के तहत ही पंचायत चुनाव हो. मतदाता लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल कर पायें.
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