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कोलकाता : प्रतिशोध में पुलिसवालों को ही लगा ठगने, जानें पूरा मामला

Updated at : 02 Apr 2018 2:05 AM (IST)
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कोलकाता : प्रतिशोध में पुलिसवालों को ही लगा ठगने, जानें पूरा मामला

II विकास गुप्ता II कोलकाता : महज 19 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़कर गरीबी के कारण इकबालपुर इलाके का निवासी मसूद हुसैन को परिवार चलाने के लिए काम की जरूरत थी, परिवारवाले उससे उम्मीद लगाये बैठे थे, लेकिन हर जगह सिर्फ उसे निराशा ही मिल रही थी. दुकानों, दफ्तरों व कारखानों का चक्कर लगाने […]

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II विकास गुप्ता II
कोलकाता : महज 19 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़कर गरीबी के कारण इकबालपुर इलाके का निवासी मसूद हुसैन को परिवार चलाने के लिए काम की जरूरत थी, परिवारवाले उससे उम्मीद लगाये बैठे थे, लेकिन हर जगह सिर्फ उसे निराशा ही मिल रही थी.
दुकानों, दफ्तरों व कारखानों का चक्कर लगाने के बावजूद उसे रोजगार नहीं मिला. लगातार निराशा मिलने के कारण उसका मनोबल टूटने लगा.
मन में जिंदगी के प्रति नफरत घर करने लगी. ऐसे में एकाधिक शहरों का चक्कर लगाने के बाद भी काम पाने में नाकाम था. ऐसे हालत में दो से तीन बार उसका सामना कुछ पुलिसवालों से हुआ, जिनसे उसे अपने लिए अपशब्द सुनने को मिले. पता पूछने पर हुई कहासुनी में उसे एक बार पुलिसवाले के थप्पड़ का स्वाद भी चखना पड़ा.
एक बार उसे जेबकतरा व पॉकेटमार तक कह दिया गया. इस तरह से मिलने वाली जिल्लत के कारण पुलिसवालों के लिए उसके मन में गुस्सा घर कर गया. इसी गुस्से से मन में जन्में नफरत को उसने अपना ढाल बनाया और पुलिसवालों को ही ठगकर प्रतिशोध लेने की उसने साजिश रच डाली.
कैसे एक युवक के मन में पनपी नफरत
पोर्ट इलाके के पुलिस सूत्रों के मुताबिक मध्यप्रदेश की पुलिस के अधिकारी उनसे एक युवक के बारे में जानकारी मांग रहे थे. वह युवक पुलिस का ही मुखबिर था. काम के लिए रुपये लेने के बावजूद वह पुलिस का काम किये बिना ही भाग जाता था.
मध्य प्रदेश पुलिस से उसने 20 हजार रुपये नगदी व एक आठ हजार रुपये का मोबाइल फोन लिया था. लेकिन इसके बदले उसे जो काम करना था, वह उसने नहीं किया और लापता हो गया था.
काफी मशक्कत के बाद उसे पता चला कि पुलिस का वह मुखबिर मध्यप्रदेश से इकबालपुर इलाके में छिपा है. पुलिस की इस जानकारी के बाद इकबालपुर पुलिस की टीम ने काफी मुश्किल से मसूद को ढूंढ़कर गिरफ्तार किया.
मध्य प्रदेश पुलिस ने खुद को ठगी का शिकार बताया
गिरफ्तार आरोपी को अपनी गिरफ्त में लेने कोलकाता आयी मध्यप्रदेश पुलिस की टीम ने खुद को इस युवक के हाथों ठगी का शिकार बताया. पुलिस कर्मियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी पुलिस को सूचनाएं देकर अपराधिक मामलों को सुलझाने में मदद करता है.
मध्य प्रदेश पुलिस के एक थाने के मुकबिर से पता चलने के बाद तीन किलोमीटर दूर उनके थाने के प्रभारी ने भी मसूद को अपने इलाके में भी गुप्त जानकारी देने के लिए चूना था. लेकिन हाल में एक मामले को सुलझाने के लिए अहम सुराग देने के नाम पर उसने पुलिसवालों से कुल 28 हजार रुपये लिए. लेकिन सूचना देने के बजाय वह पुलिसवालों को ठगकर भाग निकला.
दिल्ली, हरियाणा व बिहार पुलिस भी इसके हाथों हुई थी ठगी का शिकार
बातों ही बातों में इकबालपुर थाने के पुलिसकर्मियों को मध्यप्रदेश के एक पुलिसकर्मी यह भी बताया कि जब मसूद की तलाश शुरू हुई तो कोलकाता पुलिस के पहले दिल्ली, हरियाणा व बिहार व मुंबई पुलिस से भी इसके बारे में जानकारी मांगी गयी.
इस दौरान पता चला कि सिर्फ मध्य प्रदेश पुलिस को नहीं, उसने दिल्ली, हरियाणा व बिहार पुलिस के कर्मियों से भी इसी तरह अपराधिक मामलों के बारे में जानकारी देने के बदले उसने पुलिसवालों से 23 से 65 हजार रुपये तक ठगे हैं. इसके कारण वे भी इस आरोपी की तलाश कर रहे हैं.
क्यों करता था पुलिसवालों से ठगी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार होने पर आरोपी ने इसके पीछे के कारण के बारे में बताया कि घर की आर्थिक हालत खराब होने के कारण 19 वर्ष की उम्र में ही उसने काम ढूंढना शुरू कर दिया.
सिर्फ कोलकाता में नहीं, ज्यादा रुपये मिलने की तलाश में उसने दिल्ली, हरियाणा और बिहार में भी काम की तलाश की. लेकिन अधिकतर जगह उसे काम के मुताबिक रुपये नहीं मिले. इसके कारण उसके अंदर का आत्मविश्वास टूटता जा रहा था. वह हतासा की जिंदगी में प्रवेश करने लगा था. इधर घरवाले उससे उम्मीद लगाये बैठे थे.
कुछ जानकारी देकर मोटी रकम ले भागना चाहता था
काम के लिए हरियाणा गये एकाधिक बार वहां के पुलिसवालों से उसकी बहस हो गयी. वह जिस पुलिसवाले से पता पूछने गया, उसी ने उसे पॉकेटमार और छिनताइबाज होने का आरोपी बता दिया.
पुलिसकर्मियों से उसकी बहस हुई, इस दौरान उन लोगों ने उसकी काफी बेइज्जती की. इसी बेईज्जति का बदला लेने के लिए उसने अपनी बेरोजगारी व आर्थिक किल्लत दूर करने के लिए इन्हीं पुलिसवालों को शिकार बनाने का फैसला लिया. विभिन्न राज्यों में जाकर इलाकों में घूमने के बाद वह एक दो जानकारी पुलिसवालों को देकर मामला सुलझाने में वह उनकी मदद करता था. फिर मौका देखकर उनसे मोटी रकम ऐंठकर भाग जाता था.
धीरे-धीरे मोटी कमाई का यह तरीका उसका धंधा बन गया. गिरफ्तार आरोपी को अपनी हिफाजत में लेने के बाद पुलिसवाले उसे मूल श्रोत में वापस लाने के लिए उसे विभिन्न तरीके से समझाकर उसे सुधारने का प्रयास कर रहे हैं.
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