उपचुनाव l प्रदेश भाजपा ने तृणमूल कार्यकर्ताओं पर लगाया था धांधली का आरोप
कोलकाता : उलबेड़िया लोकसभा व नोआपाड़ा विधानसभा केंद्र में हुए उपचुनाव में प्रदेश भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया था कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर रिगिंग और बूथ दखल किया है. यहां पर लोकतंत्र खतरे में है. प्रदेश भाजपा की ओर से आरोप तो लगाये गये लेकिन पुनर्मतदान की मांग नहीं की गयी. इस बाबत भाजपा हाई कमान की ओर से मिले संकेत को जोड़ कर देखा जा रहा है. हालांकि प्रदेश भाजपा के नेता इस उपचुनाव को ममता बनर्जी की लोकप्रियता से जोड़कर देख रहे हैं. वह यह जताना चाहते हैं कि ममता के विकल्प के रूप में भाजपा को सामने लाने के लिए यह उपचुनाव एक तरह से अग्नि परीक्षा है क्योंकि सबंग चुनाव की तरह इस बार भी भाजपा दूसरे नंबर पर आती है तो वह लोग जनता को यह संदेश देने में सफल रहेंगे कि कांग्रेस अब बंगाल में खत्म हो गयी है और वामपंथी हाशिये पर हैं. भाजपा इसका राष्ट्रीय स्तर पर लाभ लेने की फिराक में है.
भाजपा का लक्ष्य कांग्रेस मुक्त भारत करना है. उसके इस लक्ष्य में तृणमूल कांग्रेस बंगाल में सबसे बड़ी सहयोगी के रूप में उभरी है. ममता ने कांग्रेस को बंगाल में शिखर से शून्य पर पहुंचा दिया है. इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को टक्कर देने वाला वाममोर्चा खासकर माकपा खुद अपने अंदरूनी लड़ाई में बुरी तरह उलझी हुई है. ऐसे में अगर भाजपा को नंबर दो का स्थान मिलता है तो वह फायदे में रहेगी. यही वजह है कि चुनाव के दौरान हिंसा व रिगिंग के साथ बूथ दखल का आरोप लगाते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि पश्चिम बंगाल की चुनाव पद्धति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. जबरन वोट लेने की प्रवृति लगातार बढ़ रही है. यहीं वजह है कि ममता पर भरोसा करके उन्हें सत्ता में लानेवाली जनता आज उनसे डर रही है. तृणमूल कांग्रेस लगातार ममता बनर्जी की लोकप्रियता की बात करती है तो उसको आम जनता को मौका देना चाहिए कि मुख्यमंत्री कितनी लोकप्रिय हैं. लोगों को कम से कम अपनी मर्जी से वोट देने दिया जाता तो हकीकत का पता चल जाता.
दहशत के साये में चुनाव का सिर्फ रो रहे हैं रोना
प्रदेश भाजपा महासचिव देवश्री चौधुरी का कहना है कि सभी बुथ पर केंद्रीय बल मौजूद नहीं था. शांतिपूर्ण चुनाव की बात पश्चिम बंगाल में बेमाने ही रही है. चुनाव आयोग को वह लोग पूरा तथ्य देकर यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि बंगाल में रिगिंग और दहशत के साये में चुनाव हुआ है, लेकिन कोई नेता पुनर्मतदान की मांग नहीं कर रहा है.
