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कोयला खनन का भविष्य है हाइवॉल माइनिंग प्रोजेक्ट

Updated at : 15 Jun 2024 11:02 PM (IST)
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कोयला खनन का भविष्य है हाइवॉल माइनिंग प्रोजेक्ट

इससे प्रदूषण नहीं होता, जिसके कारण ही यह परियोजना पूर्णरूप से इको फ्रेंडली है.

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आसनसोल/रानीगंज. कोल इंडिया के चेयरमैन पीएम प्रसाद ने कहा कि हाईवाल माइनिंग परियोजना पूर्णरूप से इको फ्रेंडली ही. इसमें स्वचालित मशीन को रिमोट कंट्रोल से संचालन करके कोयला का खनन होता है. जिससे किसी भी श्रमिक को जान का खतरा नहीं है. जमीन की जरूरत भी कम होती है, यह मशीन तीन सौ मीटर तक जमीन के अंदर जाकर कोयला निकाल लाती है. इससे प्रदूषण नहीं होता, जिसके कारण ही यह परियोजना पूर्णरूप से इको फ्रेंडली है. शनिवार को इसीएल कुनुस्तोरिया एरिया अंतर्गत नारायणकुड़ी खदान में चल रहे हाईवाल माइनिंग परियोजना के निरीक्षण के उपरांत चेयरमैन श्री प्रसाद ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ये बातें कहीं. उनके साथ कोल इंडिया के निदेशक (तकनीकी) बी वीरा रेड्डी, इसीएल के निदेशक (तकनीकी) नीलाद्रि राय व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे. क्षेत्रीय महाप्रबंधक सुभाष चंद्र मित्रा ने सभी का स्वागत किया. उन्होंने कहा की हाईवाल माइनिंग परियोजना कोयला खनन का भविष्य है. गौरतलब है कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के कोयला का अवदान सबसे अहम है. विकल्पों की तलाश चल रही है और कुछ विकल्पों के जरिये ऊर्जा की जरूरत को पूरा किया जा रहा है, लेकिन देश में आगामी सौ वर्षों तक कोयला की प्रमुख रहने की योजना पर कार्य चल रहा है. खनन के क्षेत्र में नए-नए मशीन व उपकरणों को उपयोगिता का आधार पर तैयार किया जा रहा है. खनन के क्षेत्र में हाईवाल माइनिंग परियोजना को देश का भविष्य बताया जा रहा है. आगामी दिनों में सभी खदानों में एक-एक करके यह परियोजना आरंभ होनेवाली है. शनिवार को नारायणकुड़ी माइन्स में कोल इंडिया के चेयरमैन श्री प्रसाद का हाईवाल माइनिंग परियोजना के निरीक्षण के बाद इस बात को काफी बल मिला है. फिलहाल इसीएल में दो खदानों में ही इस परियोजना के तहत खनन हो रहा है. आगामी कुछ महीनों में सात-आठ खदानों में यह परियोजना शुरू होगी. नारायणकुड़ी खदान में चार साल में 17 लाख टन कोयला का खनन करना है. क्षेत्रीय महाप्रबंधक श्री मित्रा ने पिछले साल छह माह में दो लाख खनन हुआ था. इस साल पांच लाख टन का लक्ष्य है. हाईवाल माइनिंग की मशीन खदान में कोयले की सिम में तीन सौ मीटर तक अंदर जाकर पिलर छोड़ते हुए कोयला काटकर लाती है. यह मशीन पूरी तरह रिमोट के कंट्रोल होती है और किसी भी श्रमिक को अंदर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी अहम है. चेयरमैन श्री प्रसाद के दौरे से सभी को काफी उत्साह मिला है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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