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हिंदी विश्वविद्यालय हावड़ा में डाॅ. आंबेडकर पर संगोष्ठी

Updated at : 11 May 2024 12:55 AM (IST)
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हिंदी विश्वविद्यालय हावड़ा में डाॅ. आंबेडकर पर संगोष्ठी

हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के इतिहास एवं राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “डॉ. भीमराव आंबेडकर की शिक्षा संबंधित विचारों की प्रासंगिकता” पर गुरुवार को एक दिवसीय राज्य-स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

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हावड़ा. हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के इतिहास एवं राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “डॉ. भीमराव आंबेडकर की शिक्षा संबंधित विचारों की प्रासंगिकता” पर गुरुवार को एक दिवसीय राज्य-स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ संगोष्ठी के अध्यक्ष एवं हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय प्रोफेसर (डॉ.) विजय कुमार भारती द्वारा बाबा साहब की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं द्वीप प्रज्जवलन से आरंभ किया गया. कुलपति विजय कुमार भारती ने उद्घाटन भाषण में भीमराव आंबेडकर के पांच मंत्रों का उल्लेख किया. उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ चरित्र निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि शिक्षण संस्थान वे पवित्र स्थान होते हैं, जहां चरित्र का निर्माण किया जाता है. बाबा साहब के विचारों की प्रासंगिकता को दर्शाते हुए उन्होंने बताया कि वास्तव में शिक्षित व्यक्ति वह है, जिसमें समाज सेवा की भावना होती है. संगोष्ठी के प्रमुख वक्ता डॉ. आशीष मिस्त्री (कलकत्ता विश्वविद्यालय, राजनीति विभाग) ने अपने सारगर्भित व्याख्यान में डॉ. भीमराव आंबेडकर के दर्शन को अत्यंत रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया. उन्होंने ‘भारतीय ज्ञान पद्धति की आधारशिला तथा संरचना’ पर ज्ञानवर्धक एवं शोधमूलक विचार प्रकट किया. उन्होंने बाबा साहब की अप्रकाशित पुस्तक “रिडल्स इन हिंदुइज़्म” पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समाज में ‘ज्ञान के प्रजातांत्रिकरण’ की आवश्यकता पर ज़ोर दिया. राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक प्रोफेसर प्रेम बहादुर माझी ने शिक्षा को वास्तविक जीवन में प्रयोग करने की हिदायत दी. उन्होंने शिक्षित वर्ग को स्थानीय प्रशासन में सक्रियता एवं जागरूकता पर भी सवाल उठाया. विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों में ट्विंकल शर्मा, संध्या पासवान, प्रियांशु शाह, सतीश, श्रीधर भगत, मनीषा एवं इतिहास विभाग से सलमा परवीन और अनुवाद विभाग से नीतीश कुमार यादव ने बाबा साहेब के अलग-अलग विचारों से अवगत कराया. इस संगोष्ठी के सुअवसर पर इतिहास विभाग के समन्वयक डॉ. स्मिता हालदार, डॉ. इंद्रजीत यादव, डॉ. प्रियंका गुहा राय, डॉ. सौमिता मित्रा, प्रो. शत्रुघ्न कहार, राजनीति विज्ञान विभाग के प्राध्यापक प्रो. विश्वजीत प्रसाद, प्राध्यापिका संगीता बारि, हिंदी विभाग से प्राध्यापक प्रो. प्रतीक सिंह, प्रो. मंटू दास भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग की प्राध्यापिका मधुमंती गांगुली एवं सोहिनी दत्ता ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुशील कुमार पांडेय ने किया.

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