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उद्योग के लिए जमीन की रजिस्ट्री फीस 6 गुना अधिक देने के बाद अड्डा की एनओसी पर फॉस्बेक्की ने उठाये सवाल

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Bengal news : फॉस्बेक्की के सदस्यों के साथ बैठक करते जिला शासक.
Bengal news : फॉस्बेक्की के सदस्यों के साथ बैठक करते जिला शासक.
प्रभात खबर.

Bengal news, Asansol news : आसनसोल (पश्चिम बंगाल) : फेडरेशन ऑफ साऊथ बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (Federation of South Bengal Chamber of Commerce and Industries- Fosbecci) के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाला ने कहा कि किसी प्रस्तावित उद्योग के लिए जमीन खरीदने के समय रजिस्ट्री फीस (Registry fee) साधारण जमीन की तुलना में 6 गुना तक अधिक भुगतान करना पड़ता है. रजिस्ट्री के समय ही जमीन का चरित्र इंडस्ट्री हो जाता है. ऐसे में जमीन का पुनः कन्वर्शन करने के लिए आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (Asansol Durgapur Development Authority- ADDA) की एनओसी (NOC) की जरूरत क्यों है? सरकार या तो रजिस्ट्री फीस में छूट दे या अड्डा की एनओसी में छूट दे. उद्योगपति या व्यवसायी 2 जगह क्यों पैसों का भुगतान करे.

इसके अलावा अन्य मुद्दों को लेकर गुरुवार को जिला शासक पुर्णेन्दू कुमार माजी के साथ उनके कार्यालय में फॉस्बेक्की के प्रतिनिधियों की बैठक हुई. उद्योग के लिए सकारात्मक वातावरण के साथ प्रशासनिक नियमों में सहूलियत देने की मांग की गयी. श्री माजी ने सभी मुद्दों पर सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि मांगों का ज्ञापन दें. सभी विभागों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक कर सभी जटिलताओं को समाप्त करने का प्रयास किया जायेगा. उपाध्यक्ष आरपी खेतान के साथ अन्य सदस्य भी उपस्थित थे.

अध्यक्ष श्री अग्रवाला ने कहा जिला शासक ने कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus infection) के समय ही यहां का प्रभार लिया. उनसे साथ फॉस्बेक्की के सदस्यों की यह पहली औपचारिक बैठक थी. जिला में ट्रेड लाइसेंस (Trade license) और होल्डिंग टैक्स (holding tax) को लेकर काफी लंबे समय से चल रही समस्या, उद्योग के लिए बेहतर माहौल, बिजली, पानी, सड़क के साथ नये उद्योग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम (Single window system) लागू करने के मुद्दे पर चर्चा हुई.

श्री अग्रवाला ने कहा कि किसी भी नये उद्योग को स्थापित करने के लिए नियमों की जटिलता के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. हर जगह एनओसी लेने में काफी समय और पैसे की बर्बादी होती है. उद्योग के लिए जमीन लेने के बाद रजिस्ट्री के समय प्रस्तावित उपयोग बताया जाता है. प्रस्तावित उपयोग के आधार पर जमीन का सरकारी मूल्य निर्धारित होता है. इंडस्ट्री होने से जमीन की सरकारी कीमत 4 से 6 गुना बढ़ जाती है. उसी कीमत के आधार पर रजिस्ट्री फीस का भुगतान करना पड़ता है. पुनः उस जमीन को इंडस्ट्री में बदलने के लिए अड्डा से एनओसी लेनी होती है. जिसके एवज में मोटी फीस देनी होती है. फिर जाकर भूमि विभाग में फीस भरकर जमीन का कन्वर्शन होता है.

उद्योग के लिए एक ही जमीन का 3 जगह अतिरिक्त फीस देने के साथ समय की बर्बादी अलग है. उद्योग नीति (Industry policy) में बदलाव करने से उद्योगपतियों को राहत होगी. इलाके में उद्योग स्थापित होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. जिला शासक के साथ सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई. जिला शासक ने आश्वासन दिया कि सभी मुद्दों को लेकर फॉस्बेक्की एक ज्ञापन दें. वे इस ज्ञापन को सभी संबंधित विभागों को भेज देंगे. उसके 15 दिन के उपरांत सभी मुद्दों के समाधान को लेकर चर्चा की जायेगी. जिले में सभी चेंबर के प्रतिनिधि फॉस्बेक्की से जुड़े होने के कारण जिला शासक ने कहा कि सभी चेंबर का प्रतिनिधित्व फॉस्बेक्की करे. इससे कार्य में असानी होगी.

Posted By : Samir Ranjan.

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