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जीएसटी के नियमों में संशोधन से कारोबारी नाराज, कैट ने जताया विरोध, केंद्रीय वित्त मंत्री को भेजा ज्ञापन

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पश्चिम बंगाल चैप्टर के चेयरपर्सन सुभाष अग्रवाला
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पश्चिम बंगाल चैप्टर के चेयरपर्सन सुभाष अग्रवाला
फाइल फोटो

आसनसोल (शिवशंकर ठाकुर) : केंद्र सरकार द्वारा 22 दिसंबर को जीएसटी के नियमों में संशोधन करते हुए धारा 86-बी को जोड़ने पर व्यावसायिक वर्ग ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. देश में व्यापारियों का सबसे बड़ा संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पश्चिम बंगाल चैप्टर के चेयरपर्सन सुभाष अग्रवाला ने कहा कि जीएसटी व्यापारियों के लिए जंजाल बन गया है. मासिक टर्नओवर 50 लाख रुपए से ज्यादा होने पर एक प्रतिशत जीएसटी को अनिवार्य करने से व्यापारी वर्ग काफी निराश है. इसके विरोध में कैट ने शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को एक पत्र भेजकर इस नए नियम को तुरंत स्थगित करने की मांग करते हुए व्यापारियों से सलाह कर ही इसे लागू करने की बात कही है. इसके अलावा जीएसटी और आयकर में ऑडिट का रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 जनवरी 2020 को बढ़ाकर 31 मार्च तक करने की अपील की गई है.

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पश्चिम बंगाल चैप्टर के चेयरपर्सन सुभाष अग्रवाला ने कहा कि सरकार को व्यापारियों के साथ बैठ कर जीएसटी प्रणाली की सम्पूर्ण समीक्षा करनी होगी तथा कर प्रणाली को सरल बनाना होगा. किस प्रकार कर का दायर बड़ाया जाए, जिससे केंद्र एवं राज्य सरकारों के राजस्व में वृद्धि हो, इस मुद्दे पर कैट ने चर्चा के लिए वित्तमंत्री से बैठक के लिए समय देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जीएसटी को संशोधित नियम 86बी देशभर के व्यापारियों के व्यापार पर विपरीत असर डालेगा. कोरोना के कारण व्यापार में आई अनेक प्रकार की परेशानियों से व्यापारी पहले ही त्रस्त हैं. ऐसे में यह नया नियम व्यापारियों का अतिरिक्त बोझ बनेगा. पिछले एक वर्ष से व्यापारियों का पेमेंट चक्र पूरी तरह बिगड़ गया है. लम्बे समय तक व्यापारियों द्वारा बेचे गए माल का भुगतान और जीएसटी की रकम महीनों तक नहीं आ रही है. ऐसे में एक प्रतिशत का जीएसटी नकद जमा कराने का नियम न्याय संगत नहीं है.

जीएसटी के नियमों में आए दिन संशोधन कर व्यापारियों पर बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' के सिद्धांत के खिलाफ है. इससे जीएसटी कर प्रणाली बेहद जटिल हो गई है. अनेक नियमों ने माध्यम से अधिकारियों को असीमित अधिकार दिए जा रहे हैं जिससे भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी होगी. जीएसटी का पंजीकरण रद्द करने तथा गिरफ्तार करने के नियम बेहद कठोर हैं. इसपर चर्चा किया जाना आवश्यक है. व्यापारियों से चर्चा किये बगैर उनपर मनमाने तरीके से जंयमों को लड़ दिया जा रहा है. कर प्रणाली जितनी सरल होगी उसका पालन करना उतना आसान होगा. इस मुद्दे पर जल्द केंद्रीय वित्तमंत्री के साथ बैठक कर सुलझाने की दिशा में कैट अपना प्रयास कर रही है.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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