सड़क से हाइकोर्ट तक जाने की दी धमकी

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आसनसोल : रानीगंज नगरपालिका, जामुड़िया नगरपालिका तथा कुल्टी नगर पालिका का विलय आसनसोल नगर निगम में करने के ससरकारी प्रस्ताव पर दर्ज करायी गयी आपत्तियों की दो दिवसीय सुनवाई शनिवार को कथा हॉल तथा एडीएम कार्यालय में शनिवार को संपन्न हुई. रानीगंज तथा जामुड़िया नगर पालिका के विलय पर आपत्ति दर्ज करानेवाली विभिन्न संस्थाओं से […]

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आसनसोल : रानीगंज नगरपालिका, जामुड़िया नगरपालिका तथा कुल्टी नगर पालिका का विलय आसनसोल नगर निगम में करने के ससरकारी प्रस्ताव पर दर्ज करायी गयी आपत्तियों की दो दिवसीय सुनवाई शनिवार को कथा हॉल तथा एडीएम कार्यालय में शनिवार को संपन्न हुई.
रानीगंज तथा जामुड़िया नगर पालिका के विलय पर आपत्ति दर्ज करानेवाली विभिन्न संस्थाओं से दर्जनों प्रतिनिधि मौजूद थे. बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था. इस दौरान आपत्ति पर सुनवाई करने के लिये डिप्टी मेजिस्ट्रेट रतन मजुमदार, सयांतन बोस, सौम्य चटर्जी, बाराबनी के बीडीओ उज्जवल विश्वास, जामुड़िया बीडीओ बुद्धदेव पान, सालानपुर बीडीओ, रानीगंज बीडीओ, जिला चुनाव अधिकारी सौकत गांगुली, संजय दासगुप्ता मौजूद थे. रानीगंज नगरपालिका के विलय पर 85 आपत्ति दर्ज कराने के साथ 6762 व्यक्तिगत आपत्ति दर्ज करायी गयी थी. 37 आपत्तियों की सुनवाई हुई. विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों में आरपी खेतान, सुशील गनेरीवाल, अरूण भरतीया, विजय खेतान, परवेज अख्तर, प्रदीप नंदी, श्री कृष्ण वैद्य, कन्हैया सिंह, विनोद मोदी समेत दर्जनों लोगों ने सुनवाई में भाग लिया.
जिसमें रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स, रानीगंज सिटीजन्स फोरम, सीपीडीआर, रानीगंज स्पोट्र्स एसेंबली, ग्रीन क्लब, फ्रेंडस क्लब, गायत्री प्रज्ञा मंडल, मारवाड़ी मित्र परिषद, पश्चिम बंगाल चनाचूर निर्माण संघ, डॉल्फिन क्लब समेत 40 से भी अधिक संस्थाओं ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए अपने विचार रखे.
रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स व रानीगंज सिटीजन्स फोरम के श्री खेतान ने कहा कि रानीगंज नपा की स्थापना 1876 मे की गयी थी. उस समय आसनसोल नगर निगम में की भी स्थापना नहीं हुई थी.
रानीगंज का अपना ऐतिहासिक महत्व है. रानीगंज शहर के सभी निवासी विलय के खिलाफ है. रानीगंज नपा का विलय किये जाने के बजाय इसे कॉरपोरेशन बनाकर रानीगंज के विकास पर ध्यान देनेकी जरूरत है. रानीगंज तथा आसनसोल का कोई मेल नहीं है. इसका विलय किये जाने पर लगातार आंदोलन किया जायेगा.
रानीगंज चेंबर के अरूण भरतीया ने कहा कि रानीगंज की विभिन्न संस्थाओं द्वारा विलय किये जाने पर संयुक्त रूप से 11 सूत्री आपत्ति दर्ज कराई गयी थी. रानीगंज नपा का किसी भी हालत में आसनसोल नगर निगम में विलय नहीं कराया जायेगा. रानीगंज नपा का विलय व्यवसायियों तथा आम जनता के हित में नहीं है.
विलय होने पर रानीगंज के लोगों को काम कराने के लिये 22 किलो मीटर दूर जाना पड़ेगा. जिससे काफी परेशानी होगी.
रानीगंज स्पोट्र्स एसेंबली के सुशील गनेरीवाल ने कहा कि बीते 23 मार्च को रानीगंज नपा का विलय का विरोध जताते हुए रानीगंज की विभिन्न संस्थाओं द्वारा 11 प्वाइंटस पर आधारित पत्र राज्य के डिपार्टमेंट ऑफ म्यूनिसिपल अफेयर्स के ज्वाइंट सेक्रेटरी को भेजा गया था.
रानीगंज नपा का विलय कराने के बजाय रानीगंज के आस-पास के क्षेत्रों व पंचायत समितिओं को मिलाकर इसे कॉरपोरेशन का दर्जा दिया जाये. प्रशासन द्वारा बड़े इलाकों के विकास के लिये इलाकों को बांटकर महकमा बनाया जा रहा है. जबकि इसके उल्ट आसनसोल को महानगर पालिका बनाने की प्रक्रिया किया जा रहा है. जामुड़िया तथा रानीगंज नगर पालिका का विलय किये जाने पर जोरदार आंदोलन किया जायेगा. वहं आवश्यकता पड़ने पर रानीगंज के लोग कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर न्याय की गुहार लगायेंगे.
रानीगंज इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विनोद मोदी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि रानीगंज का विलय किये जाने के बजाय इसे कॉरपोरेशन बनाया जाये. आसनसोल नगर निगम में विलय किये जाने पर रानीगंज के नागरिकों का समस्या समाधान होने के बजाय और समस्या बढ़ जायेगी. इस पर ध्यान देते हुए राज्य सरकार रानीगंज नपा को कॉरपोरेशन का दर्जा देकर इसके विकास पर ध्यान दे.
जामुड़िया चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव संजय गुप्ता ने बताया कि सुनवाई के लिये कोई पत्र नहीं मिला था. जिससे जामुड़िया चेंबर से कोई सुनवाई में उपस्थित नहीं था.
दिनों पर आपत्तियों पर हुई सुनवाई के पश्चात शनिवार को एडीएम कार्यालय में सुनवाई करने वाले अधिकारियों के साथ एडीएम (जी) उत्पल बिश्वास ने बैठक कर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की.
इस दौरान डिप्टी मजिस्ट्रेट संजय पाल आदि मौजूद थे. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार आपत्तियों पर हुई सुनवाई तथा अधिकारीयों की राय से संबंधित रिपोर्ट तैयार कर शीघ्र जिला शासक को भेजा जायेगा.
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