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पांच दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने की अपील

Updated at : 22 Sep 2019 2:48 AM (IST)
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पांच दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने की अपील

सांकतोड़िया : एफडीआई के विरोध में पांच दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने को लेकर चिनाकुड़ी तीन नंबर कोलियरी में खान श्रमिक कांग्रेस (बीएमएस) की आम जनसभा हुई, जिसका संचालन क्षेत्रीय जेसीसी सदस्य अशोक कुमार ने किया तथा अध्यक्षता चंपक माजी ने की. सभा में खान श्रमिक कांग्रेस बीएमएस के महामंत्री धनंजय पांडेय, गोविंदो माजी, क्षेत्रीय […]

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सांकतोड़िया : एफडीआई के विरोध में पांच दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने को लेकर चिनाकुड़ी तीन नंबर कोलियरी में खान श्रमिक कांग्रेस (बीएमएस) की आम जनसभा हुई, जिसका संचालन क्षेत्रीय जेसीसी सदस्य अशोक कुमार ने किया तथा अध्यक्षता चंपक माजी ने की. सभा में खान श्रमिक कांग्रेस बीएमएस के महामंत्री धनंजय पांडेय, गोविंदो माजी, क्षेत्रीय अध्यक्ष रामाशंकर राम, दशरथ ठाकुर, परमानंद वर्मा, बीडी कुशवाहा, लियाकत अली सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

महामंत्री धनंजय पांडेय ने कहा कि केंद्र की सरकार एक दिन की हड़ताल से झुकनेवाली नहीं है, इसलिए भारतीय मजदूर संघ ने पांच दिन की हड़ताल का निर्णय लिया है. यह आंदोलन कोयला क्षेत्र में काम करनेवाले सभी का है. उन्होंने कहा कि सरकार ने 92, पब्लिक सेक्टर में निवेश का फैसला लिया और कोल इंडिया में 100% एफडीआई करने का निर्णय भविष्य में हम सबके लिए एक खतरनाक कदम साबित होगा. आज हम कोल इंडिया में 606 मिलियन टन कोल उत्पादन किया है, फिर विनिवेश की क्या जरूरत है. उन्होंने आम जन को आगाह करते हुए कहा कि सबसे पहले आपकी कंपनी पर विदेशी नजर होगी.
सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि जब तक सरकार हमारी मांग को नहीं मानेगी, तब तक हम हड़ताल वापस नहीं लेनेवाले हैं. उन्होंने कहा कि भारत सरकार के नीति आयोग की अनुशंसा पर कोल इंडिया में विनिवेश व एफडीआई को केंद्र सरकार की कैबिनेट ने पास कर दिया. हम इसी का विरोध कर रहे हैं. सरकार को विरोध पत्र भेजा गया, लेकिन सरकार से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो हमको हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा.
बीएमएस ने पहले भी विनिवेश का विरोध किया था और मजदूरों को बताया था कि ये विनिवेश 1% से शुरू होकर 100% तक जायेगा. सरकार ने 1990 में कोल इंडिया को अपना बजटरी सपोर्ट बंद कर दिया, तब से लेकर अब तक कोल इंडिया अपने दम पर अपनी मेहनत पर अपने लाभ के हिस्से से 5 लाख 40 हजार करोड़ रुपये दी है. एफडीआई का सीधा सरल अर्थ बताते हुए कहा कि किसी एक देश की कंपनी का दूसरे देश की कंपनी में किया गया निवेश है, जिसके कारण उस कंपनी में उसको निवेश के अनुसार मालिकाना हक मिल जाता है.
देश आजाद होने के बाद 1990 तक देश में सार्वजनिक अर्थ व्यवस्था थी, लेकिन 1990 के विनिवेश, एफडीआई आने से मिश्रित अर्थ व्यवस्था का स्वरूप हो गया. अंत में संगठन के महामंत्री ने सभी कोयला कर्मियों से आग्रह किया की पांच दिवसीय हड़ताल को शत प्रतिशत सफल बनायें, ताकि केेंद्र सरकार को मजबूर होकर एफडीआई को वापस लेना पड़े.
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