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पुरूषोत्तम एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में महिला ने दिया बच्चे को जन्म, जवानों ने नाम दिया पुरूषोत्तम

Updated at : 25 Oct 2018 2:42 AM (IST)
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पुरूषोत्तम एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में महिला ने दिया बच्चे को जन्म, जवानों ने नाम दिया पुरूषोत्तम

आद्रा : नई दिल्ली-पुरी पुरूषोत्तम एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में मंगलवार की रात एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया. वह उत्तर प्रदेश के कानपुर से पति के साथ मायके उड़ीसा के भद्रक जा रही थी. सफर के दौरान ही उसे प्रसव पीड़ा हुयी और उसने पुत्र को जन्म दिया. पुरूलिया स्टेशन पहुंचने पर रेल […]

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आद्रा : नई दिल्ली-पुरी पुरूषोत्तम एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में मंगलवार की रात एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया. वह उत्तर प्रदेश के कानपुर से पति के साथ मायके उड़ीसा के भद्रक जा रही थी. सफर के दौरान ही उसे प्रसव पीड़ा हुयी और उसने पुत्र को जन्म दिया. पुरूलिया स्टेशन पहुंचने पर रेल प्रशासन की तत्परता से उसे सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जच्चा-बच्चा दोनों को स्वस्थ करार दिया.
इस दौरान जीआरपी, आरपीएफ के अधिकारियों ने बच्चे का नामकरण भीर कर दिया. पुरूषोत्तम एक्सप्रेस में सफर के दौरान जन्म लेने के कारण उसे ‘पुरूषोत्तम’ नाम दे दिया. नामकरण से घरवाले भी काफी खुश हैं.
पति रामेश्वर पलारा ने बताया कि वे लोग उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. पत्नी दूसरी बार गर्भवती हुई थी. इस कारण उसे उसके मायके पंचकूला ले जा रहे थे. मंगलवार को कानपुर से पुरी पुरुषोत्तम एक्सप्रेस पर सवार हुए थे. पिता, माता, भैया और भाभी भी थे.
पुरूलिया पहुंचने से पहले ही गीता को प्रसव पीड़ा शुरू हो गयी. सभी घबड़ा गये और लोगों से मदद की गुहार लगाने लगे. लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली. प्रसव पीड़ा से कराह रही गीता ने ट्रेन में ही पुत्र को जन्म दे दिया. ट्रेन के पुरूलिया स्टेशन पहुंचने पर टीटी को घटना की जानकारी मिली. उसने स्टेशन प्रबंधक को मामले की जानकारी दी.
स्टेशन प्रबंधक सुमित कुमार गांगुली जीआरपी, आरपीएफ एवं महिला पुलिस कांस्टेबल को साथ लेकर प्लेटफार्म संख्या तीन पर खड़ी ट्रेन के जनरल बोगी में पहुंचे और जच्चा-बच्चा को एंबुलेंस से पुरूलिया सदर अस्पताल पहुंचाया. चिकित्सकों ने दोनों को स्वस्थ बताया है. गीता का परिवार रेलवे प्रशासन, जीआरपी एवं आरपीएफ की प्रशंसा करते नहीं थक रहा है. उनका कहना है कि रेल प्रशासन ने यदि तत्काल सहायता नहीं की होती तो कुछ भी हो सकता था. उन्होंने रेल प्रशासन के प्रति कृतज्ञता जाहिर की. पिता रामेश्वर ने कहा कि पहली संतान पुत्री है.
चलती ट्रेन में पुत्र प्राप्ति से वे काफी खुश हैं. आरपीएफ, जीआरपी के अधिकारियों ने नवजात पुत्र का नाम पुरूषोत्तम रख दिया क्योंकि इसी ट्रेन में वह अपनी मां की कोश में सफर कर रहा था. चलती हुई ट्रेन में ही उसने इस दुनिया को देखा. इस कारण पुरुषों में उत्तम ‘पुरुषोत्तम’ नाम रखा. नामकरण से रामेश्वर तथा उनके परिवार वाले काफी खुश हुये.
पुरूलिया स्टेशन प्रबंधक सुमित कुमार गांगुली ने बताया कि मंगलवार रात 7:40 पर पुरूषोत्तम एक्सप्रेस पुरूलिया स्टेशन पहुंची. ट्रेन को छोड़ने की अनाउंसमेंट हो चुकी थी. सिग्नल भी ऑन हो चुका था. ट्रेन खुलने ही वाली थी कि ट्रेन में कार्यरत ट्रेन टिकट निरीक्षक ने जानकारी दी ट्रेन के साधारण बोगी में एक महिला ने नवजात को जन्म दिया है. खबर मिलते ही ट्रेन को रोकने का फैसला किया गया.
ग्रीन सिग्नल को रेड कर दिया गया. इसके बाद आरपीएफ, जीआरपी तथा महिला कांस्टेबलों के सहयोग से तुरंत महिला तथा नवजात शिशु को तीन नंबर प्लेटफार्म से एक नंबर प्लेटफार्म पर लाया गया. वहां से एंबुलेंस की मदद से पुरूलिया सदर अस्पताल भेजा गया. चिकित्सकों ने दोनों को ही स्वस्थ बताया. इस क्रम में ट्रेन लगभग 10 मिनट तक पुरूलिया स्टेशन पर रूकी रही. इससे यात्रियों को थोड़ी परेशानी हुई. लेकिन एक यात्री तथा उसके परिवार एवं नवजात शिशु की मदद भी की गई. रेलवे इस तरह के सेवा कार्यों में हमेशा आगे रहेगा.
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