350 करोड़ रुपये की ठगी का आरोपी तहसीन को अदालत ने भेजा 10 दिनों की पुलिस रिमांड में

पुलिस को इस धंधे से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं.
तहसीन ने अब तक नहीं बताया कि उसने पैसा का किया क्या? पुलिस को मिले हैं कुछ अहम कागजात, जिसकी चल रही है जांच
आसनसोल. वित्तीय निवेश के नाम पर कथित तौर पर 350 करोड़ रुपये की ठगी करने का मुख्य आरोपी तहसीन अहमद ने स्वीकार किया कि उसने 500 लोगों से पैसे लिये थे, जिसे वह वापस लौटा देता. हालांकि उसकी स्थिति पैसे लौटने की नहीं थी. जिसके कारण ही पिछले चार वर्षों से आसानी से चल रहे इस फर्जी कारोबार पर विराम लग गया. लोगों के पैसों का उसने क्या किया? पुलिस यह पता लगाने में जुटी है. कुछ पैसा शेयर बाजार में निवेश करने की बात भी सामने आयी है. पुलिस को इस धंधे से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं. जिसके आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कितने लोगों ने कितने पैसे लगाये और कितना वापस मिला है. पुलिस पीड़ितों से संपर्क कर रही है और उनसे भी आंकड़ा संग्रह कर रही है.रविवार को तहसीन को आसनसोल अदालत में पेश किया गया. जांच अधिकारी ने 12 दिनों की पुलिस रिमांड की अपील की, अदालत ने 10 दिनों की रिमांड मंजूर की. इन 10 दिनों में काफी कुछ तथ्य पुलिस को मिलने की संभावना है. इस मामले में दो अन्य आरोपी तहसीन का पिता शकील अहमद और भाई मोहसीन अहमद फरार हैं. पुलिस उनकी भी तलाश कर रही है. उनके पकड़े जाने से इस मामले में और भी कुछ नये खुलासे हो सकते हैं. कुछ महीनों पहले अहमद परिवार ने एक बहुमंजिला मकान बनाया है. इस मकान में लोगों के ठगी का कितना पैसा लगा है. इसकी भी पुलिस जांच कर रही है.
गौरतलब है कि आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र के जहांगीरी मोहल्ला इलाके का निवासी तहसीन अहमद पिछले करीब चार वर्षों से इलाके में चिटफंड कंपनी चला रहा था. सूत्रों के अनुसार वर्ष 2023 के इस कंपनी का व्यवसाय चरम पर था. वर्ष 2024 के अक्तूबर माह से इसमें गिरावट शुरू हुई और फरवरी 2025 तक तहसीन ने लोगों को पैसे देना बंद कर दिया. जिसके बाद से लोगों का उसपर से भरोसा उठना शुरू हुआ, जिससे उसका व्यवसाय ठप पड़ गया. पैसे आने बंद हो गये और लेने वालों की भीड़ बढ़ने लगी. आखिरकार 18 अक्तूबर को थाने में प्राथमिकी दर्ज हो गयी.कैसे होता था यह कारोबार ?
प्राथमिक जांच में यह पता चला है कि तहसीन के पास पैसा लगाने पर वह निवेशकों को प्रतिमाह 15 से 20 फीसदी तक का रिटर्न देता था. जिसमें निवेश की गयी राशि का आधा पैसा और आधा पैसा ब्याज का होता था. जिस दिन मूल पैसा खत्म हो जाता, फिर उस ग्राहक का खाता बंद हो जाता था. यह स्कीम काफी कारगर रही, मूल रकम के साथ मोटी ब्याज भी वापस आती थी. बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट पद से रिटायर हुए एक व्यक्ति ने अपनी पीएफ की पूरी राशि तहसीन के पास निवेश की थी. शुरूआत में लोगों ने काफी पैसे कमाये, बाद में सब खत्म हो गया. तहसीन लोगों से पैसे लेकर क्या करता था? कहां निवेश करता था? जिससे वह इतना मोटा ब्याज देता था, इसे किसी ने जानने की कोशिश नहीं की. प्राथमिक जांच में यह पता चला है कि एक का पैसा दूसरे को वापस लौटता था. जिसमें कुछ पैसा अपने पास रखता था. जब पैसा आने से ज्यादा देने का सिलसिला शुरू हुआ, तब यह धंधा बैठ गया और लोगों के पैसे डूब गये. जांच में काफी कुछ खुलासा होना बाकी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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