42 लाख की ठगी

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||फरजी चेक के जरिये शिक्षा पर्षद को लगाया चूना, तीन गिरफ्तार|| कोलकाता: महानगर में असम की शिक्षा पर्षद का क्लोन चेक बना कर उससे 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गयी. इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के नाम निर्मल सिन्हा, जितेंद्र रत्नाकर व अभिजीत सरकार हैं. इसमें से […]

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||फरजी चेक के जरिये शिक्षा पर्षद को लगाया चूना, तीन गिरफ्तार||

कोलकाता: महानगर में असम की शिक्षा पर्षद का क्लोन चेक बना कर उससे 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गयी. इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के नाम निर्मल सिन्हा, जितेंद्र रत्नाकर व अभिजीत सरकार हैं. इसमें से निर्मल पहले ही धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार होकर जेल की सजा काट रहा है. पंजाब नेशनल बैंक से 42 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आने के बाद शक के आधार पर उससे पूछताछ की गयी. बाद में उसने इस मामले में भी शामिल होने की बात स्वीकार की. शुक्रवार को अदालत में पेश करने पर तीनों को सात अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. इस मामले में बैंक के एक कर्मचारी के भी शामिल होने की जानकारी मिली है. उसकी तलाश जारी है.

कैसे हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने बताया कि इससे पहले जून में महानगर के उल्टाडांगा इलाके में इसी तरह से 1.99 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया था. उसमें पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

गिरफ्तार लोगों में मुख्य आरोपी निर्मल सिन्हा था, जिसे सोदपुर से पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उस मामले में गिरफ्तार सभी आरोपी जेल हिरासत में हैं. इस मामले के सामने आते ही पुलिस ने जेल में जाकर सबसे पूछताछ की. पता चला कि इस मामले में भी निर्मल शामिल है. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की गयी. उसने मामले में जितेंद्र रत्नाकर व अभिजीत के नाम का खुलासा किया.

कैसे बनाते थे क्लोन चेक
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) पल्लव कांति घोष ने बताया कि बैंक में काम करनेवाले एक कर्मचारी की मदद से असम की माध्यमिक शिक्षा पर्षद के नाम पर जारी चेक की हार्ड सॉफ्ट कॉपी हासिल कर निर्मल ने क्लोन चेक तैयार किया. इसमें असली चेक का सीरियल नंबर, चेक कोड, एमसीआर नंबर हस्ताक्षर शामिल थे. इसके बाद उसने यह चेक अपने एक साथी को दे दिया. इस अकाउंट में पास हुए चेक की राशि को अपने खाते में ट्रांसफर कर तीन अकाउंट से 38.91 लाख रुपये निकाल लिये.

पहला मामला नहीं
गौरतलब है कि विगत वर्ष आठ दिसंबर को उल्टाडांगा के एक निजी बैंक में तिरुपति ट्रेडर्स नामक कंपनी की तरफ से 1.99 करोड़ का एक चेक जमा कराया गया था. यह चेक गुजरात नरेंद्र वैली फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जारी किया गया था. चेक जमा करने के तीन दिन बाद इस चेक की राशि तिरुपति ट्रेडर्स के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिये गये. बाद में चेक क्लोन की जानकारी मिलने पर इसकी शिकायत उल्टाडांगा थाने में दर्ज करायी गयी थी. पुलिस ने जांच करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया था.

क्या है मामला
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) पल्लव कांति घोष ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक की बेहला शाखा ने विगत 16 मई को बेहला थाने में फरजी चेक से 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करायी थी. शिकायत में कहा गया था कि असम की राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा पर्षद के नाम पर एक चेक उनके ब्रांच में जमा कराया गया था. चेक में एमसीआर कोड व हस्ताक्षर सही होने के कारण चेक एकदम असली दिख रहा था. चेक को कैश कर दिया गया. कैश होते ही तीन अकाउंट के जरिये 38 लाख 91 हजार रुपये निकाल लिये गये. इधर, पर्षद द्वारा ऐसा कोई चेक जारी नहीं करने की जानकारी दी गयी. इसके बाद मामले की शिकायत बैंक ने बेहला थाने में करायी.

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