तृणमूल कांग्रेस ने बदली रणनीति

Updated at : 13 Jun 2014 8:44 AM (IST)
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तृणमूल कांग्रेस ने बदली रणनीति

सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के नये मेयर के चुनाव को लेकर जहां एक ओर आम लोगों में उत्सुकता है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दल इस मामले को लेकर उदासीन हैं. मेयर पद के चुनाव को लेकर किसी भी राजनीतिक दलों में कोई दिलचस्पी नहीं देखी जा रही है. हालांकि कांग्रेस तथा वाम मोरचा ने […]

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सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के नये मेयर के चुनाव को लेकर जहां एक ओर आम लोगों में उत्सुकता है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दल इस मामले को लेकर उदासीन हैं. मेयर पद के चुनाव को लेकर किसी भी राजनीतिक दलों में कोई दिलचस्पी नहीं देखी जा रही है.

हालांकि कांग्रेस तथा वाम मोरचा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह मेयर पद के चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे. यह दोनों ही दल इस चुनाव में अपनी पार्टी के किसी भी उम्मीदवर को भी मैदान में नहीं उतार रहे हैं. लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अब तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है. विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तृणमूल कांग्रेस में मेयद पद के चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इस मुद्दे पर पार्टी दो धड़े में बंट गई है. एक धड़ा जहां मेयर पद का चुनाव लड़ने के पक्ष में वहीं दूसरा धड़ा मेयर पद के चुनाव में हिस्सा लेने के पक्ष में नहीं है. सूत्रों ने आगे बताया कि इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सभी 15 काउंसिलरों की एक बैठक हुई. बैठक में 16 जून को हो रहे सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर पद के चुनाव को लेकर बातचीत हुई.

सूत्रों ने आगे बताया कि कई काउंसिलरों का यह कहना था कि सिलीगुड़ी नगर निगम में चुने हुए बोर्ड के काम-काज नहीं होने के कारण नागरिक सेवाओं पर इसका बुरा असर पड़ रहा है. ऐसे में पार्टी को मेयर पद का चुनाव लड़ना चाहिए और नये सिरे से नगर निगम का बोर्ड गठन कर सिलीगुड़ी में विभिन्न नागरिक सेवाओं की फिर से शुरूआत की जानी चाहिए. दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के अन्य काउंसिलरों का कहना था कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सिलीगुड़ी निगम के बोर्ड ने नागरिक सेवाओं के मामले में काफी ढिलाई बरती. शहर के लोग पिछले कई वर्षो से तमाम तरह की नागरिक सेवाओं से वंचित हैं. ऐसे में अगर तृणमूल कांग्रेस सिलीगुड़ी नगर निगम में नये बोर्ड का गठन करती है, तो निगम के पूर्व बोर्ड के विफलता का ठिकरा भी पार्टी पर फूटने की संभावना है. ऐसी परिस्थिति में जाहिर तौर पर सिलीगुड़ी नगर निगम की स्थिति विकट होती जा रही है. 16 जून को मेयर पद का चुनाव होगा भी या नहीं, यह अभी तय नहीं है, क्योंकि अब तक किसी भी काउंसिलर ने नामांकन दाखिल नहीं किया है. ऐसी परिस्थिति में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सिलीगुड़ी नगर निगम में प्रशासक की नियुक्ति का रास्ता धीरे-धीरे साफ होते जा रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार वाम मोरचा तथा कांग्रेस के इंकार के बाद तृणमूल कांग्रेस की भी मेयर पद के चुनाव में हिस्सा लेने की इच्छा नहीं दिख रही है. ऐसे में स्वाभाविक तौर पर 16 जून के बाद राज्य सरकार को यहां प्रशासक की नियुक्ति करनी पड़ेगी. इस पद हेतु नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 14 जून है. यदि 14 जून तक किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया, तो सिलीगुड़ी नगर निगम के कमिश्नर सोनम वांग्दी भुटिया राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपेंगे. उनके रिपोर्ट के आधार पर 16 जून को होने वाले चुनाव को रद्द किये जाने की पूरी संभावना बनेगी. यहां उल्लेखनीय है कि सिलीगुड़ी नगर निगम में कुल 47 सीटें हैं. इनमें से वाम मोरचे के 18, तृणमूल कांग्रेस के 15 और कांग्रेस के 14 काउंसिलर हैं. वर्तमान नगर निगम की मियाद एक अक्टूबर को खत्म हो रही है. पिछले महीने की 20 तारीख को मेयर गंगोत्री दत्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और बोर्ड भी भंग कर दी थी.

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