नेताजी के परिजन ने तृणमूल उम्मीदवार से समर्थन मांगा
कोलकाता: ‘नेताजी’ के नाम से मशहूर सुभाष चंद्र बोस के परिजन ने तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार सुगत बोस से अपील की है कि वह 1945 में महान स्वतंत्रता सेनानी के लापता होने के रहस्य से जुड़ीं फाइलें सार्वजनिक करने की उनकी मांग का समर्थन करें. सुगत नेताजी के रिश्तेदार भी हैं. ‘ओपन प्लेटफॉर्म फॉर […]
कोलकाता: ‘नेताजी’ के नाम से मशहूर सुभाष चंद्र बोस के परिजन ने तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार सुगत बोस से अपील की है कि वह 1945 में महान स्वतंत्रता सेनानी के लापता होने के रहस्य से जुड़ीं फाइलें सार्वजनिक करने की उनकी मांग का समर्थन करें. सुगत नेताजी के रिश्तेदार भी हैं.
‘ओपन प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी’ की तरफ से लिखे गये पत्र में नेताजी के परिजन ने कहा है कि अचानक उनके लापता हो जाने के रहस्य की गुत्थी सुलझाने के लिए यह जरूरी है कि केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारों के पास रखी हुईं फाइलें सार्वजनिक की जायें. ‘ओपन प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी’ में नेताजी के करीब 40 परिजन हैं. पत्र में कहा गया है : यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक के बाद एक कर भारत की सभी केंद्र सरकारों ने नेताजी से जुड़ीं फाइलों तक पहुंच कायम नहीं होने दी है, जबकि वे यह स्वीकार भी करते हैं कि ऐसे रिकॉर्ड मौजूद हैं. पत्र के मुताबिक, भारत सरकार के रुख से अन्य संप्रभु राष्ट्रीय सरकारों को भी ऐसा कोई प्रोत्साहन नहीं मिल रहा, जिससे वे नेताजी से जुड़ी कोई सूचना जारी करें.
सुगत को लिखे गये पत्र में कहा गया है : एक इतिहासकार और शिक्षाविद होने के नाते आप जानते हैं कि जानने का अधिकार लोगों के प्रशासन का मौलिक पहलू है और स्वतंत्रता प्रेमी किसी अन्य लोकतांत्रिक देश की तरह भारत के लोगों को भी इस मामले में समान अधिकार है. अंगरेजों द्वारा नजरबंद किये जाने पर नेताजी 1941 में भारत से चले गये थे, ताकि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल किया जा सके.
जापान की मदद से आजाद हिंद फौज (इंडियन नेशनल आर्मी) के गठन के बाद वह 1945 में लापता हो गये, जिससे ऐसा रहस्य पैदा हुआ, जिसकी गुत्थी आज तक नहीं सुलझ सकी. मुखर्जी आयोग ने इस विचार को खारिज कर दिया है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में हुए एक विमान हादसे में उनकी मृत्यु हुई थी. सुगत ने इस मामले पर कुछ भी कहने से यह कहते हुए इनकार कर दिया : मुङो ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है. मैं कुछ नहीं कह सकता.
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