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Homeराज्यउत्तर प्रदेशVaranasi: बीएचयू में 16 दिसंबर को होगा 103वां दीक्षांत समारोह, मेधावियों को पदक के साथ मिलेगा नगद पुरस्कार

Varanasi: बीएचयू में 16 दिसंबर को होगा 103वां दीक्षांत समारोह, मेधावियों को पदक के साथ मिलेगा नगद पुरस्कार

बीएचयू में 103वां दीक्षांत समारोह 16 दिसंबर को स्वतंत्रता भवन में मनाया जाएगा. टॉपर स्टूडेंट्स की लिस्ट तैयार की जा रही है. विद्या परिषद की बैठक छह दिसंबर को आयोजित होगी. कुलपति की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह में मेडल, उपाधि पाने वालों की फाइनल लिस्ट पर मुहर लगाई जाएगी.

Varanasi : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में 103वां दीक्षांत समारोह 16 दिसंबर को स्वतंत्रता भवन में मनाया जाएगा. टॉपर स्टूडेंट्स की लिस्ट तैयार की जा रही है. इस बार स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल, उपाधि देने के साथ ही नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा. दीक्षांत समारोह में केवल बीस दिन बचे हैं. ऐसे में किसे कितना गोल्ड मेडल मिलेगा, सभी को इंतजार है. फिलहाल परीक्षा विभाग ने वेबसाइट पर अभी सूचना नहीं जारी की है. संगीत एवं मंच कला संकाय में ऐसे 17 पुरस्कार हैं, जिसमें स्टूडेंट्स को 150 से लेकर 58 हजार रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाएगी. स्टूडेंट्स के नाम की एक प्रोविजनल लिस्ट भी जारी की गई है. जानकारी के मुताबिक अन्य डिपार्टमेंट की लिस्ट भी भेजी जा चुकी है. अब आपत्तियों के निस्तारण के बाद फाइनल लिस्ट जारी होने की संभावना है.

म्यूजिक डिपार्टमेंट में यह मिलेगा पुरस्कार

स्व. उस्ताद आशिक अली खान की स्मृति में 1000 रुपए

पंडित ओंकारनाथ ठाकुर मेमोरियल 58125 रुपए

मंजुला बेहन देव कैश पुरस्कार 58125 रुपए

भूपेंद्र नाथ दीक्षित कैश पुरस्कार 58125 रुपए

विंदोदिनी बी दीक्षित कैश पुरस्कार 58125 रुपए

किशोरलता वी दीक्षित कैश पुरस्कार 58125 रुपए

पंडित बलवंत राय भट्ट कैश पुरस्कार 58125 रुपए

डॉ. प्रेमलता शर्मा कैश पुरस्कार 58125 रुपए

छह दिसंबर को विद्या परिषद में लगेगी लिस्ट पर मुहर

बीएचयू में विद्या परिषद की बैठक छह दिसंबर को आयोजित होगी. कुलपति की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह में मेडल, उपाधि पाने वालों की फाइनल लिस्ट पर मुहर लगाई जाएगी. इसके अलावा समारोह से जुड़े अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा की जाएगी. बैठक की सूचना संबंधित सदस्यों को भेजी जा चुकी है.

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अब घर बैठे मिलेगी डिग्री

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शनिवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 41वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इन छोटे-छोटे बच्चों को संस्कृत विश्वविद्यालय में पढ़ते देख उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई क्योंकि ये बचपन से ही अच्छे संस्कार सीख रहे तभी ये आगे जाकर भारत का भविष्य बनेंगे तथा भारत की उन्नति में अपना योगदान देंगे. उन्होंने संस्कृत में महिलाओं व छात्राओं के द्वारा पीएचडी उपाधि प्राप्त करने पर भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे हमारी ज्ञान परंपरा विश्व में फैलेगी. उन्होंने काशी को न्याय की भूमि बताया. उपाधियां अब डिजिलॉकर में आ गयी हैं जिससे कोई छेड़छाड़ संभव नहीं है. उन्होंने मुख्य अतिथि के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की मदद के लिए तैयार है. उन्होंने कहा की महिलाएं जब शिक्षित होंगी तब सभी बुराईयां खत्म होगीं. उन्होंने इसके लिए रामायण के कैकयी द्वारा चारों भाईयों को दी गयी शास्त्र शिक्षा का उदाहरण दिया कि माँ का आदेश सर्वोपरि होता. माँ स्वतः रोटी न खाकर अपने बच्चों का पेट पालती है तथा शिक्षा दिलाती है. माता-पिता वृद्धाश्रम में पड़े हैं तो हम शिक्षित कहा से हुए. हम सभी को संकल्पित होना पड़ेगा की हम अपने माता-पिता को बुढ़ापे में वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ेंगे.

सबसे ज्यादे जातिवाद पढ़े लिखे लोगों में व्याप्त है- राज्यपाल

राज्यपाल ने सभी को आईना दिखाते हुए जातिवाद से बाहर निकलने की बात कही. सबसे ज्यादे जातिवाद पढ़े लिखे लोगों में व्याप्त है. हमें जातिवाद से बाहर निकलना होगा तभी हम अपने देश को आगे ले जा पाएंगे. पिछले दो वर्षों में जहाँ भी नियुक्ति हुई है उसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई. जो होनहार होगा जगह अब उसी को मिलेगी. पिछले 250 साल में इस विश्वविद्यालय ने भारत को अनेक विद्वान दिये हैं लेकिन पिछले 15-20 सालों में विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई है जिसपर हम सभी को सोचते हुए पुनः इस विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने को सामुहिक प्रयास करना होगा. उन्होंने कहा कि सभी के संयुक्त प्रयास से ही विश्वविद्यालय ऊँचाइयों को छू पायेगा तथा हम अपनी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम को आगे बढ़ा सकते.

डिजीलॉकर का किया उद्घाटन

राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि छात्र-छात्राओं को डिग्रियों के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे. जल्द ही छात्र-छात्राओं को डिग्रियां ऑनलाइन मिलने लगेंगी. दीक्षांत समारोह के साथ ही उपाधियों को डिजीलॉकर पर अपलोड कर दिया जाएगा. समारोह शुरू होने से पहले राज्यपाल ने जैसे ही बटन दबाया 14,167 उपाधियां डिजीलॉकर में अपलोड हो गईं. राज्यपाल ने कहा कि यह तो बस शुरुआत भर है. प्रदेश के 32 विश्वविद्यालयों में इस व्यवस्था को पूरी तरह से लागू किया जाएगा. इस सुविधा के शुरू होने के बाद छात्र-छात्राएं देश में कहीं से भी अपनी डिग्री और उपाधि प्राप्त कर सकेंगे. इससे उन्हें चक्कर काटने से निजात मिलेगी. साथ ही राज्यपाल ने संस्कृत के ऑनलाइन प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया. प्रदेश सरकार ने ऑनलाइन प्रशिक्षण केंद्र व लैब के लिए एक करोड़ 16 लाख रुपये दिए हैं. इस केंद्र से लोग घर बैठे संस्कृत के 10 पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर सकेंगे. ज्योतिष, कर्मकांड, संस्कृत भाषा शिक्षण, ज्योतिष वास्तु विज्ञान, योग, व्याकरण, दर्शन, वेदांत की ऑनलाइन कक्षाएं चलेंगी.

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