Footwear & Leather Policy 2025: पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में चमकेगा फुटवियर-लेदर उद्योग, लाखों युवाओं को मिलेगा रोजगार

Published by : Neha Kumari Updated At : 22 Aug 2025 2:27 PM

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सीएम योगी आदित्यनाथ

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश फुटवियर, लेदर और नॉन-लेदर क्षेत्र विकास नीति 2025 में विशेष रूप से राज्य के अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों- मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर ध्यान दिया गया है. नीति के तहत, स्टैंड अलोन फुटवियर, लेदर उत्पाद और मशीनरी इकाइयों को मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 35% तक भूमि लागत अनुदान मिलेगा, जबकि पश्चिमांचल क्षेत्र में यह 25 प्रतिशत होगा. लेदर और फुटवियर बनाने वाली कंपनियों को ज्यादा फायदा देने के लिए अतिरिक्त पूंजी निवेश सब्सिडी भी दी जाएगी.

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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश फुटवियर, लेदर और नॉन-लेदर क्षेत्र विकास नीति 2025 का सबसे बड़ा फोकस प्रदेश के अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों- मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर है. योगी सरकार ने इन इलाकों में उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए भूमि लागत अनुदान और पूंजीगत सब्सिडी में विशेष रियायतें दी हैं. इसका सीधा असर यहां के औद्योगिक विकास, रोजगार और निवेश पर पड़ेगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि औद्योगिक विकास केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित न रहे, बल्कि पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड भी देश-विदेश में औद्योगिक मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएं. नई नीति इसी विजन को आगे बढ़ाने का ठोस कदम है.

भूमि लागत अनुदान में पूर्वी यूपी को बड़ी रियायत

कास नीति 2025 के तहत, स्टैंड अलोन फुटवियर, लेदर उत्पाद और मशीनरी इकाइयों को मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 35% तक भूमि लागत अनुदान मिलेगा, जबकि पश्चिमांचल क्षेत्र में यह 25 प्रतिशत होगा. वहीं, मेगा एंकर यूनिट और क्लस्टर को इन क्षेत्रों में 80% तक भूमि लागत अनुदान का लाभ मिलेगा, पश्चिमांचल के लिए यह 75% होगा . यह लाभ विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन इलाकों में उद्योगों की स्थापना की लागत अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है. भूमि सब्सिडी का फायदा सिर्फ उसी जमीन पर मिलेगा जो औद्योगिक प्राधिकरण, राज्य सरकार के संस्थान या इस नीति के तहत बने क्लस्टर से ली गई हो. सब्सिडी की रकम जमीन के वास्तविक आवंटन मूल्य पर तय होगी, लेकिन इसमें स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस नहीं जोड़ी जाएगी. अगर कोई इकाई भूमि सब्सिडी लेती है, तो आगे मिलने वाली पूंजीगत सब्सिडी की गणना करते समय जमीन की कीमत नहीं गिनी जाएगी.

पूंजीगत सब्सिडी बनेगी उद्योगपतियों के लिए सुनहरा अवसर

लेदर और फुटवियर बनाने वाली कंपनियों को ज्यादा फायदा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार की मदद के अलावा अतिरिक्त पूंजी निवेश सब्सिडी भी देगी. इसके तहत, स्टैंड अलोन इकाइयों को मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 30% पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम 45 करोड़ (5 वर्षों में) मिलेगी. पश्चिमांचल के लिए यह 20% और अधिकतम 30 करोड़ रुपए (5 वर्षों) तक का लाभ मिलेगा. इसी तरह, एलाइड लेदर यूनिट को पूरे प्रदेश में 25% पूंजीगत सब्सिडी मिलेगी, लेकिन इन क्षेत्रों में इसे और ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी. मेगा एंकर यूनिट और क्लस्टर को यहां 35% पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम 700 करोड़ रुपए (5 वर्षों में) तक मिलेगी. एक इकाई को सालाना 140 करोड़ रुपए से अधिक लाभ नहीं मिलेगा. वहीं, पश्चिमांचल के लिए यह लाभ 120 करोड़ रुपए सालाना होगा. 

रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा पूर्वी यूपी

योगी सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों को नए निवेश और उद्योगों का गढ़ बनाना है. राजधानी लखनऊ समेत कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी, चित्रकूट, आजमगढ़ और बांदा जैसे जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. इस नीति से जहां एक ओर स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की वैश्विक पहचान फुटवियर और लेदर उत्पादों के प्रमुख निर्यातक के रूप में बनेगी.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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