UP Police Special 32: अब अपराधी नहीं सुराग बताएगा पूरी कहानी! 600 में से चुने गए 32 अफसर

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फॉरेंसिक जांच की मास्टर ट्रेनिंग लेते यूपी पुलिस के 32 अधिकारी

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यूपी पुलिस की जांच व्यवस्था को वैज्ञानिक आधार मिल रहा है. 32 अफसरों को फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग दी जा रही है. छोटे सुरागों से मजबूत होगी जांच.

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UP Police Special 32: किसी अपराध के बाद घटनास्थल पर पड़ा एक छोटा-सा सुराग भी पूरी जांच की दिशा बदल सकता है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उस साक्ष्य की सही पहचान हो और उसे सुरक्षित तरीके से जुटाया जाए. इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच व्यवस्था को वैज्ञानिक आधार देने की तैयारी तेज हुई है. छह बैच में प्रशिक्षित 600 पुलिस अधिकारियों में से 32 अफसरों को अब फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग दी जा रही है.

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600 अफसरों में से चुने गए 32 अधिकारी

उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में इन 32 अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण चल रहा है. इससे पहले छह बैच में 100-100 पुलिस अधिकारियों को 40 दिन का प्रशिक्षण दिया गया था. प्रशिक्षण के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों में से इन 32 का चयन किया गया है. आगे इनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल प्रदेश के 75 जिलों में पुलिसकर्मियों की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा.

कागजी प्रशिक्षण नहीं, घटनास्थल पर होगा अभ्यास

मास्टर ट्रेनिंग में सिर्फ विशेषज्ञों के व्याख्यान तक सीमित रहने के बजाय व्यावहारिक अभ्यास पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए कृत्रिम घटनास्थल तैयार किए जाएंगे. अधिकारियों को अलग-अलग परिस्थितियों में क्राइम सीन संभालने, साक्ष्य की पहचान करने और उन्हें सुरक्षित तरीके से जुटाने का अभ्यास कराया जाएगा. दिन और रात के अलग-अलग समय में घटनास्थल से जुड़ी चुनौतियों को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है.

छोटे सुरागों से मजबूत होगी जांच

प्रशिक्षण के दौरान तलाशी और जब्ती के नियम, क्राइम सीन नोट्स, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. फिंगरप्रिंट और खून के नमूने जैसे साक्ष्यों की पहचान, संग्रह और संरक्षण की प्रक्रिया भी सिखाई जा रही है. कोशिश है कि घटनास्थल पर मौजूद महत्वपूर्ण सुराग अनदेखे न रह जाएं और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से आगे की विवेचना में इस्तेमाल किया जा सके.

75 जिलों तक पहुंचेगी विशेषज्ञता

यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के मुताबिक, आपराधिक जांच में क्राइम सीन मैनेजमेंट की भूमिका बेहद अहम है. इसी वजह से अधिकारियों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग के जरिए तैयार किया जा रहा है. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ‘स्पेशल 32’ अधिकारी दूसरे पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करने में भूमिका निभाएंगे. इससे प्रदेश के सभी 75 जिलों में घटनास्थल प्रबंधन और साक्ष्य आधारित विवेचना की क्षमता को मजबूत करने की कोशिश होगी.

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