UP में 30 साल बाद खुला ‘हवा महल’ का राज, SSB कैंप हटते ही शुरू हुआ काम, अब यहीं से रखी जाएगी डैम पर नजर, जानें क्यों

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30 साल बाद सिंचाई विभाग को मिला ‘हवा महल’

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30 साल बाद चूका हेड का 'हवा महल' भवन सिंचाई विभाग को वापस मिला. शारदा सागर डैम की निगरानी और अवैध गतिविधियों पर रोक के लिए इसे नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा.

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UP News: तीन दशक बाद चूका हेड का ‘हवा महल’ फिर सिंचाई विभाग के काम आएगा. एसएसबी कैंप हटने के बाद भवन अब शारदा सागर डैम की निगरानी का केंद्र बनेगा. यहां से डैम के जलस्तर और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी. खास बात यह है कि जलाशय क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी विभाग की निगरानी बढ़ेगी.

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तीन दशक बाद विभाग को वापस मिला भवन

नेपाल सीमा से सटे चूका हेड पर शारदा सागर डैम के किनारे स्थित हवा महल भवन करीब 30 साल बाद सिंचाई विभाग को वापस मिल गया है. पहले इसी भवन से विभाग के अधिकारी और कर्मचारी डैम की निगरानी और दूसरे जरूरी काम देखते थे. बाद में सुरक्षा कारणों से भवन एसएसबी को सौंप दिया गया था. यहां एसएसबी का कैंप संचालित होने लगा था.

पत्राचार के बाद एसएसबी ने सौंपा भवन

समय के साथ डैम की निगरानी को लेकर सिंचाई विभाग को पुराने भवन की जरूरत महसूस हुई. इसके बाद विभाग ने एसएसबी के अधिकारियों से पत्राचार किया. विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद एसएसबी ने हवा महल भवन को सिंचाई विभाग के शारदा सागर खंड को सौंप दिया. इससे डैम क्षेत्र में विभाग की अपनी निगरानी व्यवस्था फिर से मजबूत करने का रास्ता खुला है.

अब बनेगा शारदा सागर डैम का नियंत्रण कक्ष

भवन मिलने के बाद सिंचाई विभाग ने इसे नियंत्रण कक्ष के रूप में विकसित करने का काम शुरू कर दिया है. फिलहाल मरम्मत, साफ-सफाई और जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है. नियंत्रण कक्ष शुरू होने के बाद डैम के जलस्तर और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा. विभागीय कामकाज भी यहीं से व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा.

अवैध गतिविधियों पर भी बढ़ेगी निगरानी

शारदा सागर डैम और आसपास के जलाशय क्षेत्र में मछली पकड़ने और साइबेरियन पक्षियों के शिकार जैसी अवैध गतिविधियों की शिकायतें सामने आती रही हैं. नियंत्रण कक्ष शुरू होने के बाद विभागीय अधिकारी और कर्मचारी ऐसे मामलों पर भी नजर रख सकेंगे. नेपाल सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्र में यह व्यवस्था डैम की निगरानी और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी.

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