बागपत में 38 संगीन वारदातों का आरोपी 'विपुल खूनी' ढेर, अपराध के साथ राजनीति में भी चाहता था दबदबा

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घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी

घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी

UP News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुका कुख्यात अपराधी 'विपुल खूनी' पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया. अपराध के साथ-साथ वह राजनीति में भी दबदबा बनाना चाहता था. जानिए उसके खौफ और अपराध की दुनिया का पूरा सच.

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UP Crime News: बागपत में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात अपराधी विपुल उर्फ 'विपुल खूनी' की कहानी अपराध, दहशत और राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती रही. सुशील मूंछ गैंग का शार्प शूटर रहा विपुल पिछले करीब दो दशकों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुका था. उसके खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, अपहरण, रंगदारी और जानलेवा हमलों समेत 38 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे. पुलिस के अनुसार अपराध की दुनिया में नाम कमाने के साथ-साथ वह अपने गांव की राजनीति में भी वर्चस्व स्थापित करना चाहता था.

गांव की राजनीति में जमाना चाहता था दबदबा

अपराध के समानांतर विपुल ने पंचायत राजनीति में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की. वर्ष 2015 के ग्राम पंचायत चुनाव में उसने अपनी मां राजेश को प्रधान पद का उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्हें 99 वोटों से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में उसने अपनी पत्नी बबीता को मैदान में उतारा. इस बार भी किस्मत ने साथ नहीं दिया. बबीता को 665 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि हरेन्द्रपाल चुनाव जीत गए.

11 वर्षीय मासूम की हत्या में भी आया था नाम

विपुल का नाम लिलौन गांव में 11 वर्षीय एक बालक की हत्या के मामले में भी सामने आया था. इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था और पुलिस पर आरोपियों की गिरफ्तारी का दबाव बढ़ गया था.

सोशल मीडिया से दूरी बनाकर बचता रहा पुलिस से

पुलिस के मुताबिक विपुल ने वर्षों तक गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग रणनीति अपनाई. वह सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहता था और मोबाइल फोन का भी बेहद सीमित इस्तेमाल करता था, जिससे तकनीकी निगरानी के बावजूद पुलिस उसके ठिकाने तक नहीं पहुंच पाती थी. वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था. कई बार पुलिस ने संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन हर बार वह फरार होने में सफल रहा. कांधला में एक बार पुलिस ने उसे घेर भी लिया था, लेकिन वह मकान की छत से छलांग लगाकर भाग निकला.

2007 से शुरू हुआ अपराध का सफर

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विपुल के खिलाफ पहला मुकदमा वर्ष 2007 में हत्या के प्रयास और बलवे का दर्ज हुआ था. इसके बाद उसने 2008 में हत्या और फिर लूट, डकैती व अन्य संगीन अपराधों के जरिए अपना नेटवर्क लगातार बढ़ाया. धीरे-धीरे उसका आतंक शामली, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और दिल्ली तक फैल गया.

दिल्ली तक फैला था अपराध का नेटवर्क

विपुल पर दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में चोरी के प्रयास और डकैती जैसे मामलों में भी मुकदमे दर्ज हुए. वर्ष 2013 में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बावजूद उसका आपराधिक नेटवर्क लगातार मजबूत होता गया.

हत्या, अपहरण और रंगदारी से फैलाई दहशत

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विपुल ने कई चर्चित वारदातों को अंजाम दिया. उसने कारोबारी के अपहरण, कई हत्याओं, लूट और रंगदारी जैसी घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत फैला दी. वर्ष 2017 में सहारनपुर के मानपुर गांव में उसने अपनी बहन की ससुराल में वाहन लूट की घटना को अंजाम दिया. इसी मामले में मुखबिरी के शक में महिला प्रधान की हत्या करने का भी आरोप उस पर लगा.

दो साल पहले जमानत पर आया था बाहर

वर्ष 2017 में गिरफ्तारी के बाद विपुल कई वर्षों तक जेल में बंद रहा. पुलिस के अनुसार करीब दो वर्ष पहले वह जमानत पर जेल से बाहर आया था. बाहर आते ही उसने फिर से अपने पुराने आपराधिक नेटवर्क को सक्रिय कर लिया.

2012 में बना सुशील मूंछ गैंग का शार्प शूटर

पुलिस के मुताबिक वर्ष 2012 में विपुल कुख्यात सुशील मूंछ गैंग से जुड़ा. इसके बाद उसने गैंग के लिए कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया और जल्द ही शार्प शूटर के रूप में उसकी पहचान बन गई. बताया जाता है कि वर्ष 2014 में गांव के ही बदमाश भीम की हत्या के बाद उसके साथी उसे 'विपुल खूनी' कहने लगे और यही नाम बाद में पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा बन गया.

गवाहों को धमकाकर बनाए रखता था खौफ

पुलिस के अनुसार वर्ष 2017 में पवन हत्याकांड के गवाह अशोक कुमार को भी विपुल लगातार रंगदारी और जान से मारने की धमकी देता था. डर के कारण अशोक ने अदालत में पेशी पर जाना तक बंद कर दिया था और लंबे समय तक घर में ही रहने को मजबूर हो गए थे.

मुठभेड़ में चलीं 12 राउंड गोलियां

बागपत में हुई मुठभेड़ के दौरान विपुल ने पुलिस और एसटीएफ टीम पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं. घटनास्थल से 12 खाली कारतूस बरामद किए गए. इसी मुठभेड़ में विपुल मारा गया.

सोनीपत बना रखा था सुरक्षित ठिकाना

पुलिस जांच में सामने आया कि विपुल ने हरियाणा के सोनीपत में अपना सुरक्षित ठिकाना बना रखा था. किसी भी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद वह वहीं जाकर छिप जाता था. जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद भी वह अधिकांश समय सोनीपत में ही रह रहा था.

38 संगीन मामलों का आरोपी था विपुल

पुलिस के अनुसार विपुल  खूनी के खिलाफ बागपत, शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और दिल्ली में कुल 38 आपराधिक मामले दर्ज थे. इनमें चार हत्याएं, तीन लूट, दो डकैती, अपहरण, रंगदारी, चोरी और जानलेवा हमले जैसी कई संगीन वारदातें शामिल हैं. करीब दो दशक तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बने इस बदमाश का अंत आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में हो गया.

Input: Ravi Ranjan Kumar

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राधेश्याम कुशवाहा

लेखक के बारे में

By राधेश्याम कुशवाहा

राधेश्याम कुशवाहा को पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत उन्होंने राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में यूपी डेस्क का नेतृत्व कर रहे हैं. इन्हें धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, राजनीति, अपराध और सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग व लेखन में विशेष रुचि रखते हैं.

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