राम मंदिर के पहले CEO की तलाश शुरू, सिर्फ डिग्री और अनुभव नहीं, भगवान राम के प्रति श्रद्धा होगी सबसे बड़ी योग्यता

राम मंदिर सीईओ की तलाश शुरू
Ayodhya Ram Mandi: राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की जा रही है इस पद के लिए केवल पेशेवर अनुभव ही नहीं बल्कि भगवान राम के प्रति गहरी आस्था को सबसे बड़ी योग्यता माना गया है
Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर में दान विवाद के बाद राम राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गया है. इसी दिशा में पहली बार मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. ट्रस्ट की ओर से गठित सर्च कमेटी ने साफ कर दिया है कि इस पद के लिए केवल बड़ी डिग्री, कॉर्पोरेट अनुभव या प्रशासनिक क्षमता ही काफी नहीं होगी. उम्मीदवार में भगवान राम के प्रति अटूट श्रद्धा, समाज सेवा का भाव और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करने की क्षमता सबसे अहम कसौटी होगी.
राम मंदिर के लिए क्यों जरूरी हुआ CEO
हाल ही में सामने आए दान विवाद ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए. इसके बाद ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और पेशेवर बनाने का फैसला लिया. इसी उद्देश्य से पहली बार CEO का पद सृजित किया गया है, जो मंदिर के दैनिक संचालन से लेकर वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक पूरे प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेगा.
सर्च कमेटी ने बताई सबसे बड़ी शर्त
CEO की नियुक्ति के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय सर्च कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे ने कहा कि राम मंदिर कोई सामान्य संस्थान नहीं है, इसलिए इसे केवल कॉर्पोरेट सोच रखने वाला व्यक्ति नहीं चला सकता. उन्होंने कहा कि सबसे पहली योग्यता भगवान राम के प्रति गहरी श्रद्धा होनी चाहिए. इसके बाद समाज सेवा का भाव, भक्तों के प्रति सम्मान और बड़े संस्थानों को संभालने का अनुभव देखा जाएगा.
हावरे के मुताबिक, मंदिर का CEO ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो प्रशासनिक फैसलों के साथ-साथ करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी समझ सके. उनका कहना है कि पेशेवर क्षमता जरूरी है, लेकिन आस्था और सेवा भावना के बिना इस जिम्मेदारी को निभाना संभव नहीं होगा.
CEO के पास होंगी ये बड़ी जिम्मेदारियां
राम मंदिर का CEO पूरे प्रशासन की सबसे अहम कड़ी होगा. उसके जिम्मे श्रद्धालुओं की सुविधाओं का प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, मानव संसाधन (HR), वित्तीय प्रबंधन, खरीद प्रक्रिया और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की जिम्मेदारी होगी. इसके अलावा मंदिर की आय-व्यय में पारदर्शिता बनाए रखना, दान की राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करना और भविष्य की विकास योजनाओं को लागू करना भी CEO की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा.
रोजाना दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु, इसलिए चाहिए मजबूत व्यवस्था
सुरेश हावरे ने कहा कि अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और लगभग 500 वर्षों के संघर्ष का प्रतीक है. यहां प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है. इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुव्यवस्थित मंदिर प्रबंधन प्रणाली की जरूरत है. उनका मानना है कि आने वाले समय में राम मंदिर का संचालन देश के सबसे बड़े धार्मिक संस्थानों के स्तर पर किया जाना चाहिए.
नृपेंद्र मिश्र ने भी दिया अनुभवी CEO नियुक्त करने का सुझाव
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी कहा है कि राम मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व का आस्था केंद्र बन चुका है. ऐसे में इसके संचालन के लिए अनुभवी और सक्षम CEO की नियुक्ति जरूरी है. उन्होंने कहा कि CEO ट्रस्ट के अधीन काम करे, लेकिन दैनिक प्रशासनिक और प्रबंधकीय फैसले लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता भी उसे मिलनी चाहिए. उनका मानना है कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा.
तीन सदस्यीय सर्च कमेटी करेगी चयन
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 6 जुलाई को तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था. इस समिति में सुरेश हावरे, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रदीप कोहली और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल हैं. समिति पात्र उम्मीदवारों का चयन कर ट्रस्ट को नामों की सूची सौंपेगी, जिसके बाद मंदिर के पहले CEO की नियुक्ति की जाएगी.
- खूशबू कुमारी की रिपोर्ट
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By राधेश्याम कुशवाहा
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