8 किलो घी का ऐसा केस, जिसने हाईकोर्ट को भी चकराया, 41 साल बाद आया वो फैसला जिसने उड़ा दिए सबके होश

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1985 की लूट से जुड़ा है मामला (AI सांकेतिक तस्वीर)

UP News: 41 साल पुराने लूट के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने शिनाख्त परेड में हुई देरी को फैसले का आधार बनाया.

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UP News: बदायूं के 41 साल पुराने लूट के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि शिनाख्त परेड में हुई लंबी देरी का संतोषजनक कारण अभियोजन पक्ष नहीं बता सका, जिसका लाभ आरोपियों को मिलना चाहिए. इसी आधार पर कोर्ट ने निचली अदालत की सजा को निरस्त कर दिया.

1985 की लूट से जुड़ा है मामला

मामला बदायूं जिले के बिसौली थाना क्षेत्र का है. 21 फरवरी 1985 को राधेश्याम शर्मा ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार, वह साइकिल से बिसौली से अपने गांव पालिया जा रहे थे, तभी चार लोगों ने उन्हें रोक लिया. आरोप था कि बदमाशों ने चाकू दिखाकर उनसे चार-चार किलो के दो डिब्बों में रखा कुल आठ किलो देसी घी, 126.50 रुपये और कुछ किराना सामान लूट लिया. इसके बाद पुलिस ने कन्हई, कल्लू, हरपाल और दलचंद को गिरफ्तार कर आरोपपत्र दाखिल किया.

शिनाख्त परेड में देरी पर उठाए सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपियों की शिनाख्त परेड उन्हें जेल भेजे जाने के करीब 42 दिन बाद और घटना के लगभग ढाई महीने बाद कराई गई. न्यायमूर्ति संतोष राय की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष इस देरी का ठोस कारण नहीं बता सका, जिससे मामले में संदेह उत्पन्न होता है और इसका लाभ आरोपियों को मिलना चाहिए.

दो आरोपियों को राहत, दो की अपील पहले ही समाप्त

बदायूं की विशेष अदालत ने 15 मई 1987 को चारों आरोपियों को पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. हाईकोर्ट ने अब कन्हई और कल्लू को बेगुनाह मानते हुए बरी कर दिया. वहीं, सह-आरोपी हरपाल और दलचंद की अपील सुनवाई के दौरान उनके निधन के कारण पहले ही उपशमित (समाप्त) हो चुकी थी.

क्रमवार समझिए:

  • 21 फरवरी 1985 – बदायूं के बिसौली थाना क्षेत्र में लूट की घटना हुई.
  • 1985 – पुलिस ने चार आरोपियों (कन्हई, कल्लू, हरपाल और दलचंद) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
  • 15 मई 1987 – बदायूं की विशेष अदालत ने चारों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई.
  • 1987 – चारों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की.
  • सुनवाई के दौरान – सह-आरोपी हरपाल और दलचंद की मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनकी अपील उपशमित (समाप्त) हो गई.
  • 3 अगस्त 2026 – इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कन्हई और कल्लू की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें बरी कर दिया.

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कोमल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न विषयों पर समाचार एवं लेख लिखती हैं. इससे पहले उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में इंटर्नशिप एवं कार्य अनुभव प्राप्त किया है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और वीडियो एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई की है. कोमल तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता में विश्वास रखती हैं तथा सरल, सटीक और प्रभावी समाचार लेखन को प्राथमिकता देती हैं.

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