सीएम योगी के निर्देश पर भोगनीपुर की 761.41 एकड़ भूमि पर बड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Photo: PTI)
भोगनीपुर की 761.41 एकड़ भूमि पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं. थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए वर्ष 2011 में भूमि आवंटन हुआ था. थर्मल पावर प्लांट बनाने के बजाय कंपनियों ने बिना अनुमति बैंकों में आवंटित की गई जमीन गिरवी रख दी थी.
कानपुर देहात : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भोगनीपुर भूमि प्रकरण में बड़ा आदेश हुआ है. जिलाधिकारी कानपुर देहात कपिल सिंह की जांच रिपोर्ट और सिफारिश पर मंडलायुक्त कानपुर के. विजयेन्द्र पांडियन ने वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहीत लगभग 761.41 एकड़ भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं.
भोगनीपुर क्षेत्र में ‘हिमावत पावर लिमिटेड’ और ‘मैसर्स लैंको अनपरा पावर लिमिटेड’ को थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए वर्ष 2011 में जमीन आवंटित की गई थी. कंपनियों ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया और बिना सरकार की अनुमति के इस सरकारी भूमि को बैंकों में बंधक रख दिया. इन कंपनियों ने तत्कालीन अपर जिलाधिकारी ओ.के. सिंह और कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत से 400 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण ले लिया लिया. कंपनियों ने न तो प्रोजेक्ट पूरा किया और न ही बैंकों का कर्ज चुकाया, जिसके बाद बैंकों ने इस कीमती भूमि को नीलाम करने की कोशिश शुरू कर दी थी.
मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर तत्काल एक्शन
जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कराई. पता चला कि कंपनियों ने अफसरों के साथ मिलकर राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए बैंकों द्वारा की जा रही नीलामी पर रोक लगवाई और इसे सरकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित कराया. इसके बाद भोगनीपुर की तहसीलदार प्रिया सिंह की तहरीर पर थाना मूसानगर में दोनों कंपनियों, संबंधित बैंकों और पूर्व एडीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया.
भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी
कानपुर देहात के जिलाधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त कानपुर द्वारा भूमि आवंटन निरस्त करते हुए पुनर्ग्रहीत भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं. वहीं, कमिश्नर के. विजयेन्द्र पांडियन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट से यह पूरी तरह साफ है कि जमीन लेने वाली कंपनियों ने पट्टा विलेख की अनिवार्य शर्तों का खुला उल्लंघन किया है.
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By अमिताभ कुमार
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