योगी सरकार ने प्रदेश के सभी भजन-कीर्तन मंडलियों का मांगा विवरण, जानें पंजीकरण डिटेल और गाइडलाइन

Edited by Sandeep kumar
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योगी सरकार गांवों में प्राचीन भजन-कीर्तन मंडली, रामलीला, कृष्णलीला और नाटक जैसी प्रस्तुति देने वाली संस्थाओं को अब राज्य व राष्ट्रीय पटल स्तर का मंच देगी. इसके लिए अनुभवी कलाकारों का विवरण मांगा है.

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Lucknow : उत्तर प्रदेश के गांवों में प्राचीन भजन-कीर्तन मंडली, रामलीला, कृष्णलीला और नाटक जैसी प्रस्तुति देने वाली संस्थाओं को योगी सरकार अब राज्य व राष्ट्रीय पटल स्तर का मंच देगी. ऐसे लोगों को जो कम से कम पांच सालों से समूह बनाकर धार्मिक संगीतमय प्रस्तुतियां दे रहे हैं, उनका पंजीकरण किया जाएगा. आने वाले दिनों में बड़े सरकारी आयोजनों में इन्हें प्रस्तुति का अवसर भी मिलेगा. इससे उनकी प्रतिभा से लोग वाकिफ होंगे.

डीजे के कानफोड़ू शोर के दौर में हमारी सांस्कृतिक पहचान में विशेष महत्व रखने वाली लोक मंडलियां अब लगभग विलुप्त सी हो रही हैं. एक समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों में इन मंडलियों की नियमित प्रस्तुतियां होती थीं. इन्हें सुनने, देखने के लिए लोगों की भीड़ लगा करती थी. पूर्वजों की पंरपरा को बड़े ही रोचक अंदाज में पीढ़ियों के सामने पेश किया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे समय बदला और आधुनिक उपकरणों के जरिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होने लगीं.

गांव-गांव होती है रामलीला

गांवों में रामलीला के मंचन की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है. इसमें बाहरी नहीं, बल्कि गांव के ही कलाकार राम-सीता, हुनुमान, रावण समेत रामायण के प्रमुख नायकों व पात्रों का किरदार निभाते हैं. कोरोना काल में रामलीला एकाध साल के लिए बंद हुई, लेकिन अब दोबारा शुरू हो गई. जिले के अधिकांश गांवों में भजन-कीर्तन करने वाली मंडलियां हैं. ये घूम-घूमकर अलग-अलग स्थानों पर जाकर भजन-कीर्तन और रामायण पाठ करते हैं.

मगर, डीजे के शोर में ढोल-नगाड़े और मजीरे की धुन कहीं खो सी गई. अब इस प्राचीन परंपरा को एक बार फिर पुनर्जीवित किया जाएगा. प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम की ओर से सभी जिले के जिलाधिकारियों को पत्र लिखा गया है. इस पत्र में ग्राम पंचायतवार ऐसे कलाकारों को तलाश किया जाएगा. कम से कम पांच साल तक प्रस्तुति देने का अनुभव हो.

इस पोर्टल पर कराना होगा पंजीकरण

पंजीकरण कराने वालों को https// upculture up.nic.in / hi या https// culturalevents.in/ home/registration/ पर निशुल्क पंजीकरण कराया जा सकता है.

यह होंगे फायदे

स्थानीय मेलों, त्योहरों, सांस्कृतिक विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में प्रस्तुति का अवसर दिया जाएगा.

यह है गाइड लाइन

  • कम से कम पांच साल तक कार्यक्रम करने का अनुभव हो.

  • मंडली में कम से कम पांच अधिकतम 25 सदस्य होने चाहिए.

  • अगर मंडली या दल किसी मंदिर या संस्था से जुड़ा है तो वहां का प्रमाणपत्र.

लोक कला के बढ़ावा के लिए है ये प्लान

लोक कला, संगीत व स्थानीय सभ्याचार के संरक्षण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने नई पहल करते हुए विशिष्ट पुरस्कार वितरण योजना शुरू करने जा रही है. इसके विजेताओं को पहले पुरस्कार के तौर पर 51,000, दूसरा 21,000 और तीसरा पुरस्कार 11,000 रुपए का दिया जाएगा. उत्तर प्रदेश की लोक कला, संस्कृति तथा स्थानीय सभ्याचार को संरक्षित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिए हैं.

इस अनुदान योजना के जरिए ग्राम पंचायत स्तर पर सक्रिय भजन कीर्तन मंडली, नुक्कड़ नाटक मंडली, गुरु शिष्य परंपरा, स्थानीय लोकगीत, लोकनृत्य, भजन, संस्कार गीत मंडलियों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जाएगा. वहीं, ग्राम्य, जिला व राज्य स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय लोक कला को बढ़ावा देने वाली टीमों को भी इस योजना के लिए पात्र माना जाएगा.

इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक उन्नयन, सांस्कृतिक विरासत के रक्षण, पर्यटन संवर्धन, स्वच्छ भारत मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, महिला सशक्तिकरण, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ, ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयासरत सांस्कृतिक टोलियों को पुरस्कृत किया जाएगा. वहीं, सरकार द्वारा संचालित लाभार्थी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रही सांस्कृतिक टोलियों को भी पुरस्कृत किए जाने के लिए वरीयता दी जाएगी. विजेताओं को पहले पुरस्कार के तौर पर 51,000, दूसरे पुरस्कार के तौर 21,000 व तीसरे पुरस्कार के तौर पर 11,000 रुपए की धनराशि दी जाएगी.

सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा दे रही टोलियों को पुरस्कृत करने के लिए संस्कृति विभाग में निर्णायक मंडल का चयन कर लिया गया है. इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए जिस कमेटी का गठन किया गया है उसमें संस्कृति निदेशालय के निदेशक बतौर अध्यक्ष, संस्कृति निदेशालय के वित्त नियंत्रक व जिला सूचना अधिकारी लखनऊ बतौर सदस्य तथा संस्कृति विभाग द्वारा नामित सहायक निदेशक को सदस्य सचिव के तौर पर चयनित किया गया है. पुरस्कार विजेताओं के निर्धारण में इन सभी के निर्णय ही मान्य व अंतिम माने जाएंगे.

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