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सीएम ने वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी पर 36 घंटे की चर्चा की विपक्ष को दी चुनौती, जानें- शिवपाल को क्यों कहा चच्चू

Updated at : 12 Aug 2023 2:12 AM (IST)
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सीएम ने वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी पर 36 घंटे की चर्चा की विपक्ष को दी चुनौती, जानें- शिवपाल को क्यों कहा चच्चू

विधान सभा में मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि समस्या का समाधान निर्भर करता है कि सलाहकार कैसा है, दुर्योधन के पास शकुनी थे और अर्जुन के पास श्रीकृष्ण . सीएम ने शिवपाल पर तंज कसते हुए कहा कि सही निर्णय नहीं लिया तो 2027 में आप ही क्लीन बोल्ड होने वाले हैं चच्चू.

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लखनऊ. सीएम योगी ने वन ट्रिलियन इकॉनमी के विषय पर अखिलेश यादव को आईना दिखाया और चर्चा की चुनौती भी दी. उन्होंने कहा कि मैं कह रहा हूं कि वन ट्रिलियन डॉलर को लेकर 36 घंटे की चर्चा हो जाए. लेकिन आप तो सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर भी बात करने के लिए सदन में नहीं रुके और पलायन कर गए थे. आप समस्याओं को छिपाते थे तो समाधान क्या निकालते. हमने समस्याओं को स्वीकारा भी और उसका समाधान भी निकाला. समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि आपका सलाहकार कैसा है. याद रखना, दुर्योधन के पास शकुनी थे और अर्जुन के पास श्रीकृष्ण. इनकी रुचि का विषय यूपी का विकास कभी रहा ही नहीं. इनके एजेंडे का हिस्सा, गांव, किसान, नौजवान, इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है. इनके विजन का हिस्सा व्यक्तिगत विकास है. अगर इनके पास विजन होता तो यूपी नंबर वन हो गया होता.

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डबल इंजन की सरकार ने यूपी की इनकम को किया डबल

सीएम योगी ने विधान सभा में कहा कि नेता विपक्षी दल मुझसे ये पूछ रहे थे कि यूपी की इकॉनमी क्या वन ट्रिलियन डॉलर की हो पाएंगी. उन्हें शक इसलिए है कि 1947 से 2017 तक इनके पास कोई विजन ही नहीं था. डबल इंजन सरकार के कार्यों का परिणाम है कि हमें यूपी की इनकम को दोगुना करने में सफलता मिली है. सबके संयुक्त परिश्रम से प्रदेश की जीडीपी दोगुनी हो चुकी है. 2017 में यूपी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में 14वें नंबर पर था आज ये दूसरे नंबर पर है.

आपके जनरल नॉलेज पर मुझे तरस आता है

सीएम ने कहा कि आप पूछते हैं कि वॉटर वे कहां है. आप बलिया, वाराणसी और गाजीपुर जाएं और देखें कि वाटर वे का उपयोग हो रहा है या नहीं. यूपी के पोटेंशियल को आगे बढ़ाने के लिए वॉटर वे अथॉरिटी का निर्माण इस कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए ही हुआ है. उन्होंने कहा कि आश्चर्य होता है कि नेता प्रतिपक्ष पूछते हैं कि यूपी में फ्रेट कॉरीडोर कहां पर है. आपके इस जनरल नॉलेज पर मुझे तरस आती है. दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन उत्तर प्रदेश में है. बोड़ाकी और दादरी में मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है. मल्टी मॉडल फ्रेट विलेज का कार्य वाराणसी में तेज गति से चल रहा है. जनता जानती है कि आप लोग बोलते कुछ और हैं और करते कुछ और, इसीलिए जनता ने आपको हमेशा जवाब दिया है.

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आपको यूपी का विकास नहीं दिखता

सीएम योगी ने अंत में कहा की क्या बदलाव आपको नहीं दिख रहा. यूपी के बारे में देश दुनिया की जो धारणा बदली है वो आपको नहीं दिखती. आपको इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं दिखता. यूपी के परसेप्शन को आपने बिगाड़ने का काम किया. नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया था. हमने इसे बदलने का काम किया है.एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि डकैती में 80 प्रतिशत, लूट में 69 प्रतिशत, हत्या में 40 फीसदी की कमी, बलवा में 61 फीसदी, रोड होल्डअप में 100 प्रतिशत, फिरौती के लिए अपहरण में 70 फीसदी की कमी आई है. आपके समय में डीजीपी नहीं बल्कि सामान्य जिलाधिकारी का कार्यकाल 6 माह था जो आज बढ़कर 18 महीने हो गया है.

शिवपाल के सहारे मुख्यमंत्री ने कई बार अखिलेश यादव को भी घेरा

सीएम योगी विधानसभा में शुक्रवार को एक अलग ही मूड में नजर आए. 2 घंटे 11 मिनट की अपनी स्पीच में उन्होंने कई बार विपक्षी विधायक शिवपाल यादव पर हल्के फुल्के अंदाज में व्यंग्य भी किया तो शिवपाल के माध्यम से अखिलेश को भी निशाने पर लिया. अखिलेश पर तंज कसते हुए सीएम योगी ने शिवपाल से कहा कि कहा कि चच्चू कुछ तो सिखाया करो, समय का सदुपयोग करो. चच्चू अगर आपने सही निर्णय नहीं लिया तो 27 में आप ही क्लीन बोल्ड होने वाले हैं. अभी से तय कर लो आप.

आपके साथ ये लोग कभी न्याय नहीं करेंगे

सीएम ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब परिवार में सत्ता का संघर्ष बढ़ता है तो कुछ न कुछ चीजें तो सामने आएंगी. शिवपाल जी के प्रति हमारी सहानुभूति है. आपके साथ अन्याय हुआ है. आपके साथ ये लोग न्याय करेंगे भी नहीं. उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति सर्पदंश और सांड़ से मरे, इन सभी को आपदा घोषित करने वाला यूपी देश का पहला राज्य है. हम तो सांड़ की नंदी के रूप में पूजा करते हैं. शिवपाल जी आप नहीं करते क्या? तो कुछ तो समझाया करें इन्हें. सीएम योगी ने कहा कि 2012 से 17 के बीच प्रदेश की जनता चाचा-भतीजे के बीच द्वंद्व का शिकार होती रही. भतीजे को लगता था कि चाचा हावी ना हो जाएं, इसलिए पैसे नहीं देते थे. उन्होंने कहा कि एमएसपी क्या होता है शायद नेता विरोधी दल को पता नहीं है. शिवपाल जी को ये बताना चाहिए.

मानसून सत्र में 33 सदस्यों ने बाढ़ और सूखा पर रखे विचार रखे

– सदन में सीएम योगी ने कहा कि पिछले एक घंटे से मैं नेता विरोधी दल के विचारों को सुन रहा था और एक घंटे के भाषण में बाढ़ और सूखा से संबंधित मुद्दों पर उन्हें सिर्फ गोरखपुर का जल जमाव याद आया और बाकी कुछ भी नहीं.

– नेता विरोधी दल के वक्तव्य को देखकर यही लगा कि 2014, 2017, 2019 और 2022 का जो जनादेश है वो जनता ने ऐसे ही नहीं दिया.दुष्यंत कुमार ने इस पर बहुत अच्छी बात कही है कि तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीं नहीं और कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीं नहीं.उन्हें जमीनी हकीकत की कोई जानकारी नहीं है.

– तुलसीदास जी ने ये बात कही भी है कि समरथ को नहीं कोई दोष गोसाईं…ऐसे ही लोगों पर बातें अक्षरशः ठीक बैठती हैं, क्योंकि जो लोग जन्म से चांदी के चम्मच से खाने के आदी हैं वो गरीब-किसान-दलित की समस्या और उसकी पीड़ा को क्या समझेंगे.उन्होंने अति पिछड़ों और पिछड़ों के साथ क्या व्यवहार किया था, ये पूरा देश जानता है.

– महान किसान नेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने कहा था कि देश की प्रगति का मार्ग इस देश के गांव, गलियों, खेत और खलिहानों से होकर जाता है.चौधरी चरण सिंह की बातों को वास्तव में समाजवादी पार्टी ने अपने कालखंड में थोड़ा भी ध्यान में रखा होता तो उत्तर प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक किसानों ने उनके कालखंड में आत्महत्या नहीं की होती.

– मुझे चौधरी चरण सिंह की बातों के साथ ही महान साहित्यकार राम कुमार वर्मा जी की पंक्तियां याद आती हैं जिन्हें ध्यान में रखकर डबल इंजन की सरकार काम कर रही है.यह देश के अन्नदाता किसानों के लिए समर्पित पंक्तियां थीं कि हे ग्रामदेवता नमस्कार, सोने चांदी से नहीं किंतु तुमने मिट्टी से किया प्यार, हे ग्राम देवता नमस्कार.सोना-चांदी से प्यार करने वाले लोग अन्नदाता किसान के महत्व को नहीं समझेंगे.उसकी पीड़ा को भी नहीं समझ पाएंगे.

– अगर भारत की खेती की बात होती है तो नेता विरोधी दल, उससे बाड़ी शब्द भी जुड़ता है.पशुपालन भी उसका पार्ट है.और जिस सांड़ की आप बात कर रहे हैं न वो भी उसी का हिस्सा है.आपके समय में वो बूचड़ खाने के हवाले होता था, हमारे समय में यही पशु धन का पार्ट बना हुआ है.

– लगता है पेपर की कटिंग पर होमवर्क करते समय शिवपाल जी ने कुछ पुरानी कटिंग भी बीच में रखवा दी थीं.क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब परिवार में सत्ता का संघर्ष बढ़ता है तो कुछ न कुछ चीजें तो सामने आएंगी.शिवपाल जी ने इतना पापड़ बेला है तो कुछ तो सामने आएगा.शिवपाल जी के प्रति हमारी सहानुभूति है.आपके साथ अन्याय हुआ है.आपके साथ ये लोग न्याय करेंगे भी नहीं.

वन्य जीव और मानव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में लाए : सीएम

– ये सरकार पहली सरकार है जिसने अन्नदाता किसानों के हित में दो अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाए थे. हमने अपने पहले कार्यकाल में वन्य जीव और मानव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में लाने का काम किया.

– कोई व्यक्ति सर्पदंश और सांड़ से मरे, इन सभी को आपदा में घोषित करने वाला यूपी देश का पहला राज्य है. हम तो सांड़ की नंदी के रूप में पूजा करते हैं. शिवपाल जी आप नहीं करते क्याय़ तो कुछ तो समझाया करें इन्हें.

– बिजनौर के किसानों की चर्चा नेता विरोधी दल कर रहे थे, आपको पता होना चाहिए कि 20 तेंदुओं को वहां से निकाला गया है और रेस्क्यू टीमें वहां लगातार कैंप कर रही हैं. हम किसान को सुरक्षित रखेंगे, साथ ही वन्यजीवों को रेस्क्यू करके सुरक्षित करने का कार्य भी करेंगे.

– नेता विरोधी दल से पूछना चाहता हूं कि पीएम आवास योजना से लाभान्वित 55 लाख लोग पीडीए के पार्ट नहीं हैं क्या? क्यों नहीं अबतक इन्हें आवास मिला था, क्योंकि वो दलित और गरीब थे. 2017 से अबतक 55 लाख लोगों को आवास दिलाये गये हैं.

– लोहिया आवास में आप सपा के कैडर को आवास देते थे. सपा कार्यालय ये तय करता था कि किसको आवास मिलना है. जब पीएम आवास की घोषणा हुई, तब केंद्र में कांग्रेस और प्रदेश में सपा की सरकार थी, उस वक्त की सूची को हमने स्वीकार करते हुए सभी को मकान देने का कार्य किया है.

– जब मोदी जी की सरकार आई तब भारत सरकार कहती थी कि आवास लीजिए और ये कहते थे कि दलित हमारा वोट बैंक नहीं है. ये लोग आवास देते ही नहीं थे. लगभग ढाई वर्ष तक ये सरकार में रहे. 2017 में जब हमारी सरकार आई उसके बाद 55 लाख गरीबों को आवास दिया गया है, जिसमें से 44 लाख से अधिक आवास में गृह प्रवेश भी हो चुका है.

– डबल इंजन सरकार ने एक और काम किया है. प्रयागराज में एक भूमाफिया की जमीन को मुक्त कराके 76 गरीबों को वहां भी आवास देने का कार्य किया गया है.

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अनुज शर्मा

लेखक के बारे में

By अनुज शर्मा

Senior Correspondent

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