बाबरी विध्वंस मामला : बुधवार को आयेगा सीबीआई अदालत का बहुप्रतीक्षित फैसला

Updated at : 29 Sep 2020 5:14 PM (IST)
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बाबरी विध्वंस मामला : बुधवार को आयेगा सीबीआई अदालत का बहुप्रतीक्षित फैसला

लखनऊ : सीबीआई की विशेष अदालत 1992 में मुगलकालीन बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के मामले पर बहुप्रतीक्षित फैसला बुधवार को सुनायेगी. इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित 32 आरोपित हैं. विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एस के यादव ने 16 सितंबर को इस मामले के सभी 32 आरोपितों को फैसले के दिन अदालत में मौजूद रहने को कहा था.

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लखनऊ : सीबीआई की विशेष अदालत 1992 में मुगलकालीन बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के मामले पर बहुप्रतीक्षित फैसला बुधवार को सुनायेगी. इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित 32 आरोपित हैं. विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एसके यादव ने 16 सितंबर को इस मामले के सभी 32 आरोपितों को फैसले के दिन अदालत में मौजूद रहने को कहा था.

आरोपितों में वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती, उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के अलावा विनय कटियार और साध्वी ऋतंभरा शामिल हैं. उमा भारती और कल्याण सिंह कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर दो अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. अभी यह सूचना नहीं है कि फैसले के समय वे अदालत में मौजूद रहेंगे या नहीं.

कल्याण सिंह जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब ही ढांचा गिराया गया था. सिंह पिछले साल सितंबर में इस मामले की सुनवाई में शामिल हुए थे. राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी इस मामले के आरोपियों में से एक हैं. उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई अदालत को मामले का निबटारा 31 अगस्त तक करने के निर्देश दिये थे, लेकिन गत 22 अगस्त को यह अवधि एक महीने के लिए और बढ़ा कर 30 सितंबर कर दी गयी थी. सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले की रोजाना सुनवाई की थी.

केंद्रीय एजेंसी सीबीआई ने इस मामले में 351 गवाह और करीब 600 दस्तावेजी सुबूत अदालत में पेश किये. इस मामले में कुल 48 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें से 17 की मामले की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है. इस मामले में अदालत में पेश हुए सभी अभियुक्तों ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताते हुए केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर दुर्भावना से मुकदमे दर्ज कराने का आरोप लगाया था.

पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने गत 24 जुलाई को सीबीआई अदालत में दर्ज कराये गये बयान में तमाम आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वह पूरी तरह से निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक कारणों से इस मामले में घसीटा गया है. इससे एक दिन पहले अदालत में अपना बयान दर्ज करानेवाले पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने भी लगभग ऐसा ही बयान देते हुए खुद को निर्दोष बताया था. कल्याण सिंह ने गत 13 जुलाई को सीबीआई अदालत में बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सियासी बदले की भावना से प्रेरित होकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार ने अयोध्या में मस्जिद की त्रिस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित की थी.

इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ व धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपित हैं.

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