दीपोत्सव पर रिकॉर्ड 21 लाख दीये से जगमग होगी अयोध्या, रामजन्मभूमि के पुजारियों को मिलेगा आवासीय भत्ता-अवकाश
Published by : Sanjay Singh Updated At : 13 Aug 2023 5:27 PM
योगी सरकार रामनगरी के विकास के लिए 35 हजार करोड़ से अधिक योजनाओं पर काम कर रही है. इसके साथ ही सरकार ने सातवें दीपोत्सव को ऐतिहासिक बनाने का प्लान तैयार किया है. इस बार 21 लाख दीप जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है. वहीं इस बार घर बैठे लोग वर्चुअल रूप से दीपोत्सव से जुड़ सकेंगे.
Ayodhya Deepotsav 2023: राम मंदिर का भव्य निर्माण जारी रहने के बीच अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां शुरू हो गयी है. इस बार दीपोत्सव बेहद खास होगा, क्योंकि इसके बाद रामलला अगले वर्ष जनवरी में अपने भव्य मंदिर में प्रवेश कर जाएंगे.
योगी आदित्यनाथ सरकार ने सातवें दीपोत्सव को ऐतिहासिक बनाने का निर्णय किया है. इस बार अयोध्या में 21 लाख दीप जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है. वहीं रामजन्मभूमि के पुजारियों को जल्द ही सरकारी स्तर की सुविधाओं का लाभ मिलेगा.
योगी सरकार रामनगरी के विकास के लिए 35 हजार करोड़ से अधिक योजनाओं पर काम कर रही है. रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होते ही देश विदेश से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ना शुरू हो जाएगी. इसके मद्देनजर पर्यटन विकास सहित अवस्थापना से जुड़ी अन्य योजनाओं पर काम च रहा है. इसके साथ ही योगी सरकार ने सातवें दीपोत्सव को ऐतिहासिक बनाने की प्लान तैयार किया है.
इस बार 21 लाख दीप जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है. वहीं इस बार घर बैठे लोग वर्चुअल रूप से दीपोत्सव से जुड़ सकेंगे. यह निर्णय राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के पत्र के बाद किया गया है.
प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यटन मुकेश मेश्राम ने अयोध्या के अधिकारियों के साथ एक वर्चुअल बैठक की. बैठक में अयोध्या मंडलायुक्त गौरव दयाल, डीएम नीतीश कुमार व क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरपी यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमुख सचिव से जुड़े. वर्चुअल बैठक में राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा की ओर से प्रमुख सचिव पर्यटन को लिखे गए पत्र पर चर्चा की गई, जिसमें सातवां दीपोत्सव वर्चुअल मनाने के लिए कहा गया था.
बैठक में तय हुआ कि दीपोत्सव इस बार वर्चुअल भी मनाया जाएगा. इसके जरिए इस उत्सव से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि इस बार नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है. राम की पैड़ी सहित पूरी अयोध्या में 21 लाख दिए जलाने का योगी सरकार का लक्ष्य है. दीपोत्सव की शुरुआत 2017 में हुई थी, यह सातवां दीपोत्सव होगा. हर दीपोत्सव में अयोध्या ने दीप जलाने का रिकॉर्ड बनाया है, इस बार भी रिकॉर्ड बनेगा.
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2017- 18,7213
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2018- 30,1152
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2019- 40,4026
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2020-60,6569
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2021-94,1551
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2022-15,76,995
पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि एक एप बनाया जाएगा जिससे लोगों को आसानी से जोड़ा जाएगा. जो लोग एप के जरिए दीपोत्सव कार्यक्रम से जुड़ेंगे उनको एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा. दीप जलाने के बाद जो लोग दीये लेना चाहें, उस दीये का शुल्क 11 व 21 रुपए रखा जाएगा. जो लोग ऑनलाइन पेमेंट करेंगे उनको दीये के साथ प्रसाद भी दिया जाएगा.
इस बीच अब रामजन्मभूमि के पुजारियों और कर्मचारियों को सरकारी स्तर की सुविधा मुहैया कराने की पहल की जा रही है. श्रीरामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि रामलला की सेवा में नियुक्त पुजारियों और कर्मचारियों को अब सरकारी स्तर की सुविधा श्रीराममंदिर ट्रस्ट देगा. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही पुजारियों व कर्मचारियों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, इस पर मंथन चल रहा है.
श्रीरामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक के मुताबिक अब पुजारी के रहने-खाने और चिकित्सीय सुविधाओं के साथ-साथ आवासीय भत्ता भी दिया जाएगा. इसके साथ ही सरकारी अवकाश होने पर पर पुजारियों को भी अवकाश दिया जाएगा. रामलला की सेवा में अभी चार पुजारी सहित कुल आठ कर्मचारी तैनात हैं. बताया कि पुजारियों के वेतन भी बढ़ाए जाने की तैयारी है.
इस बीच कहा जा रहा है कि मंदिर के उद्घाटन के बाद भी राम भक्तों को भगवान राम की प्रतिमा को छूने का अवसर नहीं मिल पाएगा. भक्तों को गर्भगृह में भी जाने की अनुमति नहीं होगी. लोग लगभग 35 फीट की दूरी से भगवान के दर्शन करेंगे.
कहा जा रहा है कि यह व्यवस्था गर्भगृह की पवित्रता को बनाए रखने के लिए की गई है. साथ ही हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार मंदिर के गर्भगृह में केवल राजा और मंदिर के पुजारी को ही जाने का अधिकार होता है. इस पारंपरिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह में केवल प्रधानमंत्री और पुजारी को ही प्रवेश मिलना तय किया गया है.
इस समय भी देश के बड़े-बड़े मंदिरों में भक्तों को गर्भगृह तक जाने की अनुमति नहीं होती. तिरुपति बालाजी और भगवान जगन्नाथ के मंदिर में भी इसी तरह की व्यवस्था है. लेकिन, भगवान शिव के मंदिर इस मामले में अपवाद होते हैं. इसका बड़ा कारण है कि भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का बहुत अधिक महत्त्व है, जिसमें भक्त शिवलिंग को छूकर ही पूजा संपन्न करते हैं. ऐसे में बिना गर्भगृह में गए रुद्राभिषेक संभव नहीं है. लेकिन, अन्य मंदिरों में गर्भगृह के बाहर दूर से ही देवी-देवताओं के दर्शन-पूजा की परंपरा है.
उद्घाटन के बाद भी राम भक्तों को लगभग 35 फीट की दूरी से भगवान के दर्शन करने की व्यवस्था रहेगी. इससे मंदिर की पवित्रता के साथ-साथ भीड़ को नियंत्रण में रखने में सहायता मिलेगी. प्रतिमा को ऊंचे स्थान पर रखा जाएगा जिससे दूर से भी लोगों को भगवान राम के बेहतर दर्शन हो सकें.
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By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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