Ayodhya Ramleela : शक्ति बाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण, शोक में डूबे राम

Author : संवाद न्यूज Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Oct 2020 9:12 PM

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अयोध्या : रामलीला के छठे दिन शुक्रवार को लक्ष्मण शक्ति बाण लगने से मूर्छित होने और राम के शोकाकुल होने के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया. इसके अतिरिक्त अंगद-रावण संवाद ने भी दर्शकों का खासा मन मोह लिया.

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अयोध्या : रामलीला के छठे दिन शुक्रवार को लक्ष्मण शक्ति बाण लगने से मूर्छित होने और राम के शोकाकुल होने के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया. इसके अतिरिक्त अंगद-रावण संवाद ने भी दर्शकों का खासा मन मोह लिया. अभिनेता व सांसद मनोज तिवारी ने अंगद की भूमिका में अपने संवाद और अभिनय से वाहवाही बटोरी. उनकी मजबूत संवाद प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा.

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इससे पहले हनुमान लंका से माता सीता का पता लगाकर वापस लौटते हैं, तो राम की सेना में खुशी छा जाती है. हनुमान से राम कहते हैं कि हनुमत मैं आज से आपका ऋणी हो गया हूं. दूसरे दृश्य में वानर सेना समुद्र किनारे डेरा डालती है. अगला दृश्य लंका की राज्यसभा का होता है. रावण के दूत उसे बताते हैं कि राम की सेना समुद्र के पार पहुंच गयी है.

इसके बाद रामलीला के अगले दृश्य में लंकापति रावण के छोटे भाई विभीषण का प्रवेश होता है. रावण से विभीषण कहते हैं कि जड़ से ही राग मिटा दो. अर्पण कर उनको (राम को) सीता, जिस पर रावण क्रोधित हो जाता है और विभीषण को राज्य से बाहर निकाल देता है.

भगवान राम समुद्र से रास्ता मांग रहे होते हैं. तीन दिन बीत जाने के बावजूद समुद्र रास्ता नहीं देता. ”विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत, बोले राम सकोप तब भय बिन होए न प्रीत” राम गुस्से में खड़े हो जाते हैं और धनुष का संधान करते हैं. तभी, समुद्र देव प्रकट हो जाते हैं और समुद्र पर बांध बनाने का तरीका भगवान श्रीराम को बताते हैं.

इसके बाद नल और नील वानर सेना के साथ समुद्र पर पुल बांधते है. पुल बनने के बाद राम की सेना लंका में प्रवेश करती है. राम युद्ध से पहले अंगद को दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजते हैं, जहां राम और अंगद का करीब 20 मिनट तक संवाद होता है. इस संवाद ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच घमासान युद्ध शुरू हो जाता है. लक्ष्मण मेघनाथ के सारे अस्त्रों को विफल कर देते हैं. मेघनाथ शक्ति बाण छोड़ता है, जिससे लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं. हनुमान सुषेण वैद्य को लाते हैं. वैद्य संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं. कालनेमी संत का रूप धारण कर हनुमान को रोकने का प्रयास करते है. हनुमान बने बिंदु दारा सिंह ने भी मेरठ से आये परविंदर के अभिनय की प्रशंसा की.

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