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आरएसएस के लोग होते हैं समलैंगिक : आजम खान

Updated at : 29 Nov 2015 7:58 PM (IST)
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आरएसएस के लोग होते हैं समलैंगिक : आजम खान

रामपुर / उत्तर प्रेदश : यूपी के कैबिनटे मंत्री और सपा नेता आजम खान ने अपने बयान में आरएसएस को समलैंगिक कहकर विवाद खड़ा कर दिया है. आजम ने समलैंगिकता के सवाल पर बोलते हुए कहा कि आरएसएस वाले इसलिए तो नहीं करते हैं शादी. गौरतलब हो कि आज ही वित्त मंत्री अरूण जेटली ने […]

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रामपुर / उत्तर प्रेदश : यूपी के कैबिनटे मंत्री और सपा नेता आजम खान ने अपने बयान में आरएसएस को समलैंगिक कहकर विवाद खड़ा कर दिया है. आजम ने समलैंगिकता के सवाल पर बोलते हुए कहा कि आरएसएस वाले इसलिए तो नहीं करते हैं शादी. गौरतलब हो कि आज ही वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सैमलैंगिक संबंधों के समर्थन में एक बयान दिया है. यूपी के रामपुर पहुंचे आजम ने कहा कि समलैंगिकता पर संसद को अपनी सख्त राय बनानी चाहिए. आजम ने यहा तक कहा कि संसद इसमें पूरी तरह सक्षम है. और कोर्ट से बड़ी अदालत तो हमारी पार्लियामेंट हैं.

आजम ने कहा कि हम किसी का मतलब क्यों समझें जरूरी थोड़े हैं कि सारे लोग उन्हीं के विचारधारा के हों. आजम ने संघ पर वार करते हुए कहा कि संघ वाले होते ही ऐसे हैं. संघ पर शुरू से इल्जाम ही ऐसे लगते रहे हैं इसलिए वे लोग शादी नहीं करते.आजम के इस बयान के सामने आने के बाद संघ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है. संघ ने कहा है कि आजम खान का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है. विश्व हिंदू परिषद ने भी आजम के बयान की आलोचना की है.

इससे पहले बीजेपी नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने समलैंगिकता को लेकर 2014 में कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर अपना बयान जारी किया है. जेटली का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के अपने दिए गए फैसला पर दोबारा विचार करना चाहिए. जेटली ने कहा कि इस मसले पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सहमति से बनाए समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने गलत ठहराया था. जेटली के मुताबिक यह जरूरी है कि कोर्ट अपने इस फैसले पर वर्तमान प्रासंगिकता के हिसाब से पुन: विचार करे.

वित्त मंत्री ने कोर्ट के फैसले को रूढ़िवादी नज़रिया बताते हुए कहा कि जब लाखों लोग समलैंगिक संबंधों में शामिल हों तो आप इसे झुठला कैसे सकते हैं. उसके साथ ही जेटली ने माना कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 ने जो अभिव्यक्ति की आजादी दी है उसे देश की अदालतों ने हमेशा ही बनाए और बचाए रखा है. इस मामले में हम यूरोपियन अदालतों से टक्कर ले सकते हैं.

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