भाजपा को दोहरा झटका: सांसद सावित्रीबाई फुले ने दिया इस्तीफा, कुशवाहा ने दिखाये बागी तेवर

Published at :07 Dec 2018 7:55 AM (IST)
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भाजपा को दोहरा झटका: सांसद सावित्रीबाई फुले ने दिया इस्तीफा, कुशवाहा ने दिखाये बागी तेवर

मोतिहारी/लखनऊ : भाजपा के लिए गुरुवार का दिन अच्छा नहीं रहा. जहां उत्तर प्रदेश से दलित सांसद सावित्री बाई फुले ने पार्टी छोड़ दी, वहीं उसके सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलने की घोषणा करते हुए बागी तेवर दिखाते नजर […]

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मोतिहारी/लखनऊ : भाजपा के लिए गुरुवार का दिन अच्छा नहीं रहा. जहां उत्तर प्रदेश से दलित सांसद सावित्री बाई फुले ने पार्टी छोड़ दी, वहीं उसके सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलने की घोषणा करते हुए बागी तेवर दिखाते नजर आए.

दलित सांसद सावित्री बाई फुले ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह ‘‘विभाजनकारी राजनीति” कर रही है. बिहार के पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी में पार्टी के चिंतन शिविर के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कुशवाहा ने भाजपा पर तीखा हमला किया और कवि रामधारी सिंह दिनकर के ‘रश्मिरथी’ में दुर्योधन को दिए भगवान कृष्ण के उपदेश का जिक्र किया.

कुशवाहा ने कहा, ‘‘चूंकि मित्रता का भाव खत्म हो चुका है तो अब याचना नहीं रण होगा.” हालांकि उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से अलग होने की घोषणा नहीं की. यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ेंगे, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह एक रण है। आप मुझसे और क्या कहने की उम्मीद करते हैं?” उन्होंने नीतीश कुमार सरकार पर सभी मोर्चों पर विफल रहने का आरोप लगाया. कुशवाहा लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर अक्सर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताते रहे हैं.

लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी की बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने पार्टी से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया.

उल्लेखनीय है कि फूले कई मौकों पर पार्टी लाइन से हटकर बयान देकर पहले भी विवादों में रही हैं. वह अनुसूचित जातियों से जुड़े मुद्दों पर भाजपा की कटु आलोचना करती रहीं हैं. पार्टी इस समुदाय को लुभाने की कोशिश करती रही है. फुले के जाने से उसकी इस कवायद को धक्का लगा है. बहराइच से सांसद ने दलित नेता बी आर आंबेडकर की पुण्यतिथि को इस्तीफे के लिए चुना. उन्होंने कहा कि वह संविधान को अक्षरश: लागू करवाना चाहती हैं.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर परोक्ष रूप से इशारा करते हुए कहा, ‘‘देश के चौकीदार की पहरेदारी में संसाधनों की चोरी करायी जा रही है.” उन्होंने कहा, ”विहिप, भाजपा और आरएसएस से जुड़े संगठनों द्वारा अयोध्या में पुन: 1992 जैसी स्थिति पैदा करके समाज में विभाजन एवं सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है. इससे आहत होकर मैं भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रही हूं.”

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