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फूलपुर लोकसभा सीट पर नेहरू परिवार तो गोरखपुर पर गोरक्षनाथ पीठ का रहा है कब्जा, जानें इतिहास

Updated at : 11 Mar 2018 4:07 PM (IST)
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फूलपुर लोकसभा सीट पर नेहरू परिवार तो गोरखपुर पर गोरक्षनाथ पीठ का रहा है कब्जा, जानें इतिहास

लखनऊ : उत्तरप्रदेश में आज दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है. ये सीटें हैं गोरखपुर और फूलपुर. गोरखपुर सीट योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली की गयी है तो फूलपुर सीट केशव प्रसाद मौर्य के राज्य का उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली की गयी है. ये दोनों सीटें भाजपा की सीटिंग […]

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लखनऊ : उत्तरप्रदेश में आज दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है. ये सीटें हैं गोरखपुर और फूलपुर. गोरखपुर सीट योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली की गयी है तो फूलपुर सीट केशव प्रसाद मौर्य के राज्य का उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली की गयी है. ये दोनों सीटें भाजपा की सीटिंग सीटें रहीं हैं और ऐसे में यहां से भाजपा के लिए चुनाव जीतना प्रतिष्ठा का सवाल है. वहीं, विपक्ष की तीनों प्रमुख पार्टियों केलिए यह अवसर है, जब वे इन दोनों सीटों पर भाजपा को हार का मजा चखा कर अपनी ताकतकाअहसास करा सकती हैं. ये दोनों लोकसभा सीटें उत्तरप्रदेश औरदेश के लिए हमेशा हाइप्रोफाइल सीटें रही हैं. फूलपुर सीट से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू चुनाव लड़ा करते थे, जबकि गोरखपुर सीट से परंपरागत रूप से गोरक्षनाथ पीठ के महंत चुनाव लड़ते व जीतते रहे हैं.

यानी, फूलपुर लोकसभा जहां अतीत में कांग्रेस की उदारवादी धारा का प्रतीक रहा है, वहीं गोरखपुर सीट हिंदुत्व के गहरे भगवा रंग का प्रतीक. फूलपुर सीट से लगातार तीन बार 1952, 1957 व 1962 में जीते, उनके बाद उनकी बहन विजया लक्ष्मी पंडितयहांसेचुनाव लड़ीं और दो बार जीतीं. बाद के सालों में वीपी सिंह ने भी इसका प्रतिनिधित्व किया.

वहीं, गोरखपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर सिंहासन सिंह1952में चुनाव जीतेथे,दोबारा भी यहां से वे जीते.सिंहासनसिंह भले कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते लेकिन वेमूलत:हिंदुत्ववादी नेता था. उनका हिंदू सभा से गहरा नाता था औरदेवरियाइकाई के इसके प्रमुखभी रह चुके थे. बाद के सालों में 1967 मेंगोरक्षनाथ पीठ के महंत दिग्विजय नाथ जीते. 1970 में यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मेंमहंत अवैद्यनाथ जीते. 1989 का चुनाव महंत अवैद्यनाथ हिंदू महासभा के टिकट से लड़ कर जीते. 1991 व 1996 में वे भाजपा के उभार के बाद उसके टिकट पर चुनाव जीते. 1998 से 2014 तक लगातार पांच बार भाजपा के टिकट से यहां से योगी आदित्यनाथ जीतते रहे और वे वर्तमान में गोरक्षनाथ पीठ के महंत भी हैं.

यानी गोरखनाथ लोकसभा सीट पर ज्यादालंबेसमय तक हिंदुत्ववादियों का कब्जा रहा है और फूलपुर परलगभग समय कांग्रेस की उदार धारा या फिर समाजवादियों का कब्जा रहा. 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार भाजपा ने नरेंद्र मोदी लहर में इस सीट पर कब्जा किया और उस मिथक को तोड़ा कि भाजपाई यहां से जीत नहीं सकते हैं. यानी भाजपा के लिए इस उपचुनाव में भी यह सीट प्रतिकात्मक मायने रखती है. योगी आदित्यनाथ मौजूदा दौर में सबसे तेजी से उभरते हुए क्षत्रप हैं और उनके लिए भी इन दोनों पर को अपने आभा मंडल को बनाये रखने और उसे और मजबूत करने के लिए जीतना जरूरी है.

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