अस्पताल में 49 बच्चों की मौत मामला : फर्रुखाबाद में ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई कोई मौत : सरकार

Published at :04 Sep 2017 11:57 AM (IST)
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अस्पताल में 49 बच्चों की मौत मामला : फर्रुखाबाद में ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई कोई मौत : सरकार

फर्रुखाबाद / लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को साफ किया कि फर्रुखाबाद जिला अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) और मुख्य चिकित्साधीक्षक (सीएमएस) के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. सरकार ने यह भी साफ किया कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं […]

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फर्रुखाबाद / लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को साफ किया कि फर्रुखाबाद जिला अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) और मुख्य चिकित्साधीक्षक (सीएमएस) के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. सरकार ने यह भी साफ किया कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है. प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) प्रशांत त्रिवेदी ने कहा, ‘जिस तरह से यह मामला पेश किया गया, उस तरह की घटना यह नहीं है.

फर्रुखाबाद में रविवार रात सीएमओ और सीएमएस के खिलाफ प्राथमिकी हुई है, लेकिन इसके आधार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. ‘पहले हम इस मामले की जांच करेंगे, उसके बाद इस पर कोई कार्रवाई करेंगे.’ सीएमओ उमाकांत पांडेय और सीएमएस अखिलेश अग्रवाल को हटाने की बाबत पूछे गये सवाल पर त्रिवेदी ने कहा, ‘जिलाधिकारी जिला प्रशासन प्रमुख होता है, उन्हें जिलाधिकारी के साथ तालमेल बिठा कर काम करना चाहिए. अगर कोई मामला था, तो उन्हें प्रशासन की जानकारी में लाना चाहिए था. वास्तव में वहां मेडिकल की गलती से कुछ हुआ या तकनीकी गलती से, कुछ हुआ तो यह जांच में साफ हो जायेगा.’

उनसे पूछा गया कि क्या बच्चों की यह मौतें आक्सीजन की कमी से हुई, तो उन्होंने कहा, ‘हम ऑक्सीजन को लेकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं था.’ प्रमुख सचिव (सूचना) अवनीश अवस्थी ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि जिलाधिकारी, सीएमओ और सीएमएस के बीच आपसी तालमेल नहीं था. इसलिए इन लोगों को हटाया गया है. महानिदेशक स्वास्थ्य इस मामले की जांच के लिए एक विशेषज्ञों की टीम वहां भेज रहे हैं. एक बात पूरी तरह से साफ है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है.’

दिमाग में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत : डॉ कैलाश

डिलिवरी के दौरान बच्चे के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. ना कि हमारे अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी है. दिमाग में ऑक्सीजन की कमी की वजह से बर्थ एस्फिक्सिया बन जाता है. दिमाग में सूजन आ जाती है. उस बीमारी से बच्चों की मौत हुई है. उक्त बातें फर्रुखाबाद अस्पताल के चिकित्सक डॉ कैलाश ने सोमवार को कहीं.

क्या है मामला

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में पिछले महीने 48 घंटे के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों में 30 बच्चों की मौत के बाद फर्रुखाबाद जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया है. जिला अस्पताल में पिछले एक महीने के दौरान ऑक्सीजन की कमी से 49 नवजात बच्चों की मौत के मामले में जिला मुख्य चिकित्साधिकारी समेत दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. वहीं, यूपी सरकार ने फर्रुखाबाद जिला अस्पताल में पिछले एक माह के दौरान भर्ती 49 बच्चों की मौत के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जिला अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को हटा दिया है.

जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के विरुद्ध दर्ज कराया मुकदमा

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने सोमवार को यहां बताया कि जिला अस्पताल में एक महीने के अंदर 49 बच्चों की मौत का मामला कुछ दिन पहले मीडिया में आने पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले में संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे. उन्होंने बताया कि नगर मजिस्ट्रेट जयेंद्र कुमार जैन तथा उपजिलाधिकारी सदर अजीत कुमार सिंह ने मौके पर जाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. जांच में पाया गया कि ऑक्सीजन नहीं मिल पाने और इलाज में लापरवाही के कारण बच्चों की मौत हुई थी.जिलाधिकारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कल शाम नगर मजिस्ट्रेट ने जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के विरुद्ध लापरवाही के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है. उपनिरीक्षक बनी सिंह को मामले की विवेचना सौंपी गयी है.

गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की हाे चुकी है मौत

यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है जब गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में गत 10-11 अगस्त को ऑक्सीजन की कमी की वजह से कम से कम 30 बच्चों की मौत का मामला गरमाया हुआ है. घटना में मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य राजीव मिश्र समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था.बच्चों की मौत के मामले में हाल ही में डॉक्टर कफील को भी गिरफ्तार किया गया है. उनके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में आइपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. उनके ऊपर बच्चों की मौत में गैरजिम्मेदारी बरतने, निजी प्रैक्टिस न करने का झूठा हलफानामा देने गबन करने और साजिश के आरोप हैं.

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