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सपा और बसपा के तीन एमएलसी के इस्तीफे के बाद विपक्षी खेमे में खलबली

Updated at : 30 Jul 2017 1:49 PM (IST)
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सपा और बसपा के तीन एमएलसी के इस्तीफे के बाद विपक्षी खेमे में खलबली

लखनऊ : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लखनऊ पहुंचने से पहले ही समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी में खलबली मच गयी है. सपा के दो एमएलसी यशवंत सिंह व बुक्कल नवाब ने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया. इसके कुछ देर बाद ही बसपा के जयवीर सिंह ने भी अपना इस्तीफा सभापति को सौंप […]

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लखनऊ : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लखनऊ पहुंचने से पहले ही समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी में खलबली मच गयी है. सपा के दो एमएलसी यशवंत सिंह व बुक्कल नवाब ने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया. इसके कुछ देर बाद ही बसपा के जयवीर सिंह ने भी अपना इस्तीफा सभापति को सौंप दिया. सपा के दोनों एमएलसी मुलायम सिंह के करीबी हैं. हालांकि, बुक्कल लखनऊ में अवैध निर्माण के मामले में फंसे हुए हैं. सपा के एमएलसी मधुकर जेटली के भी इस्तीफे की चर्चा है.

बुक्कल ने भाजपा में जाने से इनकार नहीं करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की खूब प्रशंसा की. दावा किया कुछ और एमएलसी शीघ्र ही पार्टी छोड़ सकते हैं. नवाब ने कहा कि पिछले एक साल से मुझे बहुत घुटन महसूस हो रही थी. सपा अब ‘समाजवादी अखाड़ा’ बन गयी है. यह भी कहा कि वे अयोध्या में राम मंदिर बनाने के पक्षधर हैं. सवालिया लहजे में कहा कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा.

इधर, विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को सोची समझी रणनीति का हिस्सा मान रहा है. हाल ही में बिहार में हुए राजनैतिक उथल-पुथल को देखते हुए कयास लगाये जा रहे हैं कि भाजपा यूपी में भी विपक्ष को कमजोर कर 2019 में उनके एकजुट होने की संभावना को समाप्त करना चाहती है.

टूट की संभावित वजह ! सूत्रों के मुताबिक इस टूट की सबसे बड़ी वजह यह बतायी जा रही है कि भाजपा को अपने कैबिनेट के कई चेहरों को विधान परिषद में भेजना है. इस कड़ी में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ, दो डिप्टी सीएम दिनेश्‍ा चंद्र शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य के अलावा मोहसिन रजा और स्वतंत्र देव सिंह के नाम शामिल हैं. कैबिनेट का सदस्य होने के नाते इनको किसी सदन का सदस्य होना जरूरी है, जो अभी ये नहीं हैं.

* सत्ता की भूख, हवस में बदली

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि भाजपा के मुंह खून लग चुका है. उसकी सत्ता की भूख अब बुरी हवस में बदल गयी है. सत्ता व सरकारी मशीनरी के खुले दुरुपयोग ने लोकतंत्र के भविष्य को खतरे में डाल दिया है. मणिपुर, गोवा, बिहार, फिर गुजरात के बाद अब यूपी का ताजा राजनीतिक घटनाक्रम इसका स्पष्ट प्रमाण है. गैर भाजपा विधायकों को घुटने टेकने के बजाय शोषण व आतंक से हर प्रकार से भाजपा का मुकाबला करना होगा. तभी मोदी सरकार की विद्वेषपूर्ण, अहंकारी, दमनकारी व तानाशाही रवैये को रोका जा सकता है.

* राजनीतिक भ्रष्टाचार कर रही भाजपा

पूर्व सीएम व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि लालच देकर हमारे एमएलसी को तोड़ा है. वे बिहार से लेकर यूपी तक राजनैतिक भ्रष्टाचार करने में जुटे हैं. भाजपा को बताना होगा कि आखिर तोड़-फोड़ की जरूरत क्यों पड़ी. क्या चार महीने के अंदर ही जनता के बीच जाने से डर गये. हमारे विधायकों को लालच देकर इस्तीफा दिलवाया गया है. वैसे जनता सब देख रही है. बुक्कल ने अभी ईद पर ही सेवई खिलायी थी. फिर ऐसा क्या हुआ कि इस्तीफा देना पड़ा. यदि वे कैद न हुए हों, तो मैं उनसे एक बार बात करूंगा.

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