ललिता हत्याकांड मामले में प्रदर्शन के पीछे कौन? भीड़ जुटाने के लिए दिया गया था लालच

धरना-प्रदर्शन
Lalita Gautam Murder Case मेरठ की ललिता गौतम हत्याकांड की पुलिस जांच में बाहरी लोगों को प्रदर्शन में शामिल कराने उन्हें शस्त्र लाइसेंस और राजनीतिक लाभ का लालच देने जैसे गंभीर खुलासे हुए हैं. पुलिस को ऑडियो सबूत भी मिले हैं. जानें क्या है पूरा मामला.
Lalita Gautam Murder Case: मेरठ की छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए धरना-प्रदर्शन के बाद पुलिस जांच में कई अहम बातें सामने आई हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि प्रदर्शन में भीड़ बढ़ाने के लिए बाहरी जिलों से लोगों को बुलाया गया और उन्हें शस्त्र लाइसेंस बनवाने के साथ राजनीतिक लाभ दिलाने का लालच दिया गया. पुलिस को इस संबंध में ऑडियो इनपुट सहित कई साक्ष्य मिले हैं. वहीं, जांच में कुछ ऐसे लोगों की मौजूदगी भी सामने आई है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पहले से रहा है.
जांच में जुटीं कई एजेंसियां
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस, एलआईयू और अन्य एजेंसियों ने पूरे घटनाक्रम की संयुक्त जांच शुरू की. वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पोस्ट का विश्लेषण किया गया, जिसके आधार पर अब तक 10 से 15 लोगों की पहचान की जा चुकी है. पुलिस का कहना है कि कुछ लोग सुनियोजित तरीके से भीड़ को उकसाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस के अनुसार, धरने में शामिल कुछ लोगों ने सड़क जाम कराने और प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई थी. मामले में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है और पूरे घटनाक्रम से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है.
शस्त्र लाइसेंस और राजनीतिक लाभ का लालच देने का दावा
जांच के दौरान पुलिस को ऐसी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिली है, जिसमें कथित तौर पर मृतका के भाई को आंदोलन तेज करने के बदले शस्त्र लाइसेंस बनवाने और राजनीतिक फायदा दिलाने का भरोसा दिया जा रहा है. पुलिस इन रिकॉर्डिंग की सत्यता की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
प्रदर्शन के दौरान हुआ था बवाल
बुधवार को ललिता गौतम को न्याय दिलाने की मांग को लेकर परिजन और बड़ी संख्या में लोग कमिश्नरी पार्क से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े थे. प्रदर्शनकारी जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर दिया गया. इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी. पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने कई बार प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब सड़क जाम नहीं खुली और यातायात पूरी तरह प्रभावित होने लगा तो हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया गया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई. घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए.
पुलिस ने अराजक तत्वों की भूमिका का किया दावा
एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि मुख्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और पुलिस लगातार कानूनी कार्रवाई कर रही है. उनके अनुसार मृतका का परिवार पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट था, लेकिन कुछ बाहरी और अराजक तत्व लगातार उन्हें भड़काने का प्रयास कर रहे थे.
मिरिंडा गैंग से जुड़े लोगों की भी जांच
पुलिस जांच में सामने आया कि कलेक्ट्रेट पर हुए प्रदर्शन में डिग्गी निवासी रितिक जाटव, अजय कुमार संतराम और सूरज गौतम भी मौजूद थे. इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं. पुलिस के मुताबिक रितिक जाटव के खिलाफ पहले से कातिलाना हमला और जेल से रिहाई के दौरान गाड़ियों का काफिला निकालकर हुड़दंग मचाने जैसे मामले दर्ज हैं. अधिकारियों का दावा है कि रितिक जाटव का संबंध मिरिंडा गैंग से रहा है. सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें गैंग से जुड़े बताए जा रहे मोनू हाइडल के साथ भी सामने आई हैं. पुलिस अन्य लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाल रही है.
रवि गौतम की गाड़ी सीज, हिरासत में युवक ने की आत्महत्या की कोशिश
पुलिस ने युवा शक्ति दल संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि गौतम की स्कॉर्पियो गाड़ी को भी कब्जे में लेकर सीज कर दिया है. पुलिस के अनुसार रवि गौतम के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं और वह नोएडा के सूरजपुर का रहने वाला है. वहीं, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए रवि गौतम ने पुलिस के बंदी वाहन के भीतर गमछे से फांसी लगाने का प्रयास किया. हालांकि, पुलिसकर्मियों ने समय रहते उसे बचा लिया. इसी दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह बंदी वाहन के पास खड़े एक युवक को थप्पड़ मारते दिखाई दिए. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और विपक्ष ने इसे लेकर सरकार व पुलिस पर सवाल उठाए.
विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के नेताओं रविंद्र प्रेमी और विपिन मनोठिया ने प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज की आलोचना की. रविंद्र प्रेमी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को दी और संबंधित वीडियो भी भेजे गए. सपा नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताया. दूसरी ओर, आजाद अधिकार सेना सहित कई संगठनों ने मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग और वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
क्या है पूरा मामला?
ललिता गौतम 15 मई को लापता हुई थीं. 16 मई को परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी और 17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव स्थित गन्ने के खेत में उनका शव बरामद हुआ. पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. हालांकि, परिजनों और कुछ संगठनों का आरोप है कि मामले में सभी दोषियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई. इसी मांग को लेकर पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे, जो बुधवार को कलेक्ट्रेट के बाहर हुए धरना-प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गए.
कोमल अग्रवाल की रिपोर्ट
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By राधेश्याम कुशवाहा
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