बरेली: आय से अधिक संपत्ति में शिक्षा विभाग का बाबू होगा गिरफ्तार, 7 वर्ष पूर्व हुआ था सस्पेंड, ये है मामला...
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 19 Feb 2023 1:53 PM
बरेली में वर्ष 2016 में बीएसए ऑफिस में तैनात भूपेंद्र सिंह पाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निरीक्षक (इंस्पेक्टर) सुरेंद्र सिंह ने शहर के बारादरी थाने में आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी. जांच के बाद इस मामले में गिरफ्तारी के आदेश हुए हैं.
Bareilly: उत्तर प्रदेश के बरेली में शिक्षा विभाग के एक बाबू पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है. राजकीय कन्या इंटर कॉलेज (जीजीआईसी) में तैनात भूपेंद्र पाल सिंह की गिरफ्तारी के आदेश हुए हैं.
बरेली में वर्ष 2016 में बीएसए ऑफिस में तैनात भूपेंद्र सिंह पाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निरीक्षक (इंस्पेक्टर) सुरेंद्र सिंह ने शहर के बारादरी थाने में आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी. जांच के बाद इस मामले में गिरफ्तारी के आदेश हुए हैं.
अखिल भारतीय भ्रष्टाचार एवं शोषण निवारण समिति, राजेंद्र नगर के बीके गुप्ता ने 22 अप्रैल 2012 को मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से बीएसए के बाबू भूपेंद्र पाल सिंह की आय से अधिक संपत्ति के मामले की शिकायत की थी. शिकायत में भूपेंद्र पाल सिंह को बामसेफ का मंडल उपाध्यक्ष बताने के साथ ही आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था. अनुसूचित शशिकांत कनौजिया अनुभाग- 3 ने जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन की बरेली इकाई को सौंपी.
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इसमें इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह ने भूपेंद्र पाल सिंह पर लगे आरोपों की जांच की. आरोपी का बामसेफ का मंडल उपाध्यक्ष होना पाया गया. इसके साथ ही बसपा शासनकाल में जाति, और बामसेफ का रौब दिखाकर सहकर्मियों को परेशान करना, दुर्व्यवहार करना आदि के आरोप सही मिले. आरोपी ने पत्नी को जिला पंचायत सदस्य बनवाया था. यह भी प्रमाण मिले.
जांच के दौरान भूपेंद्र पाल सिंह ने आय से अधिक संपत्ति के आरोप में मौखिक और लिखित साक्ष्य प्रस्तुत किए था. एक नवंबर 2006 से 31 मार्च 2012 तक समस्त आय के वैध स्रोतों से भूपेंद्र पाल सिंह को कुल 23.74 लाख की आय हुई, जबकि इस अवधि में उनके द्वारा चल-अचल संपत्ति से अर्जन एंव परिवार के भरण पोषण आदि मदों पर 28.99 लाख खर्च किया. आय के सापेक्ष में खर्च 5.24 लाख अधिक था.
भूपेंद्र सिंह अधिक खर्च की गई राशि का ब्योरा नहीं दे पाए. कोई अभिलेख भी उन्होंने मुहैया नहीं कराया. जांच करने वाले निरीक्षक की तहरीर पर वरिष्ठ लिपिक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. इस मामले की विवेचना भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निरीक्षक कर रहे थे. विवेचना पूरी होने के बाद गिरफ्तारी के आदेश हुए हैं.
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की शिकायत की जांच के बाद आरोपी बाबू को बीएसए ने सस्पेंड कर दिया था. उसके बाद लगातार जांच चल रही थी. पिछले कुछ दिन पहले ही जीजीआईसी में बाबू को कोर्ट के आदेश के बाद तैनाती दी गई थी.
रिपोर्ट मुहम्मद-साजिद बरेली
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