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मुगल रसोई का एक्सपेरिमेंट बना आगरा की पहचान… जानिए क्यों और कैसे हुआ पेठा इतना मशहूर

Updated at : 11 Jun 2025 3:08 PM (IST)
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मुगल रसोई का एक्सपेरिमेंट बना आगरा की पहचान… जानिए क्यों और कैसे हुआ पेठा इतना मशहूर

Agra Famous Petha: आगरा का पेठा सिर्फ मिठाई नहीं, एक ऐतिहासिक विरासत है. इसकी शुरुआत मुगल काल में हुई थी, जब ताजमहल निर्माण के दौरान मजदूरों के लिए ऊर्जा देने वाली मिठाई बनाई गई. कद्दू से बनी यह मिठास आज देश-विदेश में आगरा की पहचान बन चुकी है.

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Agra Famous Petha: उत्तर प्रदेश का शहर आगरा सिर्फ ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की मशहूर मिठाई “पेठा” के लिए भी जाना जाता है. यह सफेद, मुलायम और रस से भरपूर मिठाई आज दुनिया भर में आगरा की पहचान बन चुकी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेठा आगरा में कैसे आया और कैसे यह इतना प्रसिद्ध हुआ?

शुरुआत मुगल काल से जुड़ी है

पेठे की शुरुआत की कहानी ताजमहल से जुड़ी बताई जाती है. कहा जाता है कि जब मुगल बादशाह शाहजहां ताजमहल का निर्माण करवा रहे थे, तब उन्होंने रसोई में एक खास मिठाई तैयार करने का आदेश दिया जो शुद्ध, हल्की और श्रमिकों को ऊर्जा देने वाली हो. तब शाही बावर्चियों ने कद्दू (जिसे “अश गिलकड” या सफेद कद्दू कहा जाता है) से यह मिठाई बनाई, जिसे बाद में “पेठा” नाम दिया गया.

कद्दू से बनने वाली अनोखी मिठाई

पेठा मुख्य रूप से कद्दू, चीनी और पानी से बनाया जाता है. इसे पहले चूने के पानी में भिगोया जाता है ताकि इसका टेक्सचर नर्म बना रहे. फिर इसे चीनी की चाशनी में पकाया जाता है, जिससे मिठाई में मिठास और चमक दोनों आ जाती है.

ब्रिटिश काल में मिला बाजार

ब्रिटिश काल में आगरा एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन गया. रेलवे आने के बाद आगरा से आने-जाने वालों को पेठा एक खास तोहफा बन गया. लोगों ने इसे अपने घर ले जाना शुरू किया और धीरे-धीरे यह मिठाई उत्तर भारत के कई इलाकों में मशहूर हो गई.

ब्रांड बना ‘आगरा का पेठा’

स्वतंत्रता के बाद कई स्थानीय मिठाई दुकानों ने “आगरा का पेठा” को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया. आज आगरा की सड़कों पर आपको पेठे की सैकड़ों दुकानें मिल जाएंगी साधारण पेठा, केसर पेठा, पान पेठा, चॉकलेट पेठा, अंगूरी पेठा जैसे दर्जनों फ्लेवर इसमें आ चुके हैं.

विदेशों तक पहुंची मिठास

आज पेठा न केवल भारत के हर कोने में मशहूर है, बल्कि इसे विदेशों में भी निर्यात किया जाता है. खासकर भारतीय प्रवासियों के बीच इसकी मांग काफी अधिक है. पेठा अब आगरा आने वाले हर सैलानी की खरीदारी सूची में जरूर शामिल होता है.

GI टैग की मांग भी उठी

पेठे को आगरा की विशेष धरोहर मानते हुए इसके लिए Geographical Indication (GI) टैग की भी मांग उठ चुकी है, जिससे इसकी असली पहचान और गुणवत्ता को संरक्षित किया जा सके.

मिठाई जो बन गई विरासत

पेठा अब सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि आगरा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा बन चुका है. इसकी मिठास में ताज की नज़ाकत और इतिहास की गहराई दोनों का स्वाद मिलता है.

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Abhishek Singh

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By Abhishek Singh

Abhishek Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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