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Padma Awards 2022: वाराणसी के पांच विभूतियों को पद्म सम्मान, 125 साल के योग गुरु शिवानंद को पद्मश्री

काशी के स्वामी शिवानन्द को पद्म श्री सम्मान के लिए चयनित किया गया है. स्वामी शिवानन्द का जन्म 8 अगस्त 1896 में वर्तमान बंगलादेश के सिलेट जिले के हरीपुर गांव में हुआ था.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Varanasi
Updated Date
पंडित शिवनाथ मिश्र, सितार वादक
पंडित शिवनाथ मिश्र, सितार वादक
फोटो - प्रभात खबर

धर्म -वेद- शास्त्र की नगरी काशी के पंच विभूतियों को पद्म पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया है. वाराणासी से जुड़े कुल 5 लोगो को यह सम्मान मिला है. सम्मान पाने वालों में गीताप्रेस के राधेश्याम खेमका को मरणोपरांत पद्मविभूषण, संपूर्णांनंद संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्वान प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी को पद्म भूषण तो वहीं सितारवादक पंडित शिवनाथ मिश्र, IMS-BHU के प्रख्यात नेफ्रोलॉजिस्ट प्रो. कमलाकर त्रिपाठी, 125 साल के बाबा शिवानंद और मीरजापुर की गायिका अजीता श्रीवास्तव को पद्मश्री के लिए चयनित किया गया.

स्वामी सच्चिदानंद को पद्म भूषण

गुजरात से स्वामी सच्चिदानंद का नाम भी पद्म भूषण के लिए चयनित हुआ है, उन्हें वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा PhD के समान वेदांतचार्य की डिग्री से सम्मानित किया गया है. मरणोपरांत पद्म सम्मान पाने वाले गोरखपुर के गीता प्रेस के अध्यक्ष व सनातन पत्रिका के सम्पादक राधेश्याम खेमका काशी के केदारघाट निवासी थे. उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस यही ली थी. गीता प्रेस व सनातन पत्रिका से जुड़कर उन्होंने काफी बर्षो तक कार्य किया है. इसके अलावा वे काशी के क़ई संस्थाओं मारवाड़ी सेवा संघ, मुमुक्षु भवन, श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल, बिड़ला अस्पताल और काशी गोशाला ट्रस्ट से भी जुड़ रहे. राधेश्याम खेमका को पद्म विभूषण सम्मान मिलना काशी के लिए गौरव की बात है.

प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी को पद्मविभूषण

संस्कृत के प्रकांड विद्वान राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी को भी पद्मविभूषण सम्मान के लिए चयनित किया गया है. मूलतः देवरिया के रहने वाले प्रोफेसर वशिष्ठ वाराणासी के नगवा में रहते हैं. उन्होंने कहा की संस्कृत भाषा ही नही राष्ट्र का गौरव है. न्याय दर्शन से ही भारत फिर से विश्व गुरु बना सकता है. संस्कृत के प्रकांड विद्वान ने कहा की संस्कृत को शुरुआती कक्षा से आरंभ करने की जरूरत है. संस्कृत भाषा को रोजगार पूरक भी बनाना होगा ताकि लोगो का रुझान बढ़े. इन्होंने अपनी शिक्षा संपूर्णांनंद सस्ंकृत विश्वविद्यालय से नव्यन्यायाचार्य और BHU से न्यायावैशेषिक शास्त्राचार्य में हासिल की है. बाद में संपूर्णांनंद सस्ंकृत विश्वविद्यालय में न्याय प्रवक्ता और न्याय वैशेषिक विद्वान के रूप में जाने गए. उन्हें 2004 में राष्ट्रपति सम्मान मिला। इसके साथ ही दो दर्जन प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है.

स्वामी शिवानन्द को पद्म श्री

अगले नाम के रूप में काशी के स्वामी शिवानन्द को पद्म श्री सम्मान के लिए चयनित किया गया है. स्वामी शिवानन्द का जन्म 8 अगस्त 1896 में वर्तमान बंगलादेश के सिलेट जिले के हरीपुर गांव में हुआ था। स्वामी शिवानन्द सरस्वती की उम्र 125 वर्ष हैं ,स्वामी शिवानन्द उम्र तक स्वस्थ्य रहकर जीने के पीछे उनका संयमित दिनचर्या और योग-प्राणायाम है। धर्म के प्रकांड विद्वान बाबा शिवानन्द बंगाल से काशी आये थे. यहां अपने गुरु ओंकारनन्द से शिक्षा लेने के बाद योग और धर्म के क्षेत्र में अपनी विद्वता काशी में साबित की. इनके माता पिता का 6 वर्ष की अवस्था में ही देहांत हो गया था। बाबा शिवानन्द कर्मकांड के घोर विरोधी रहे हैं. जिसकी वजह से इन्होंने अपने माता पिता को ही दाह संस्कार के वक्त अग्नि देने से मना कर दिया था. इसके बाद इनके गुरु के कहने पर ये विश्व भृमण पर निकल गए और 34 वर्ष तक भृमण करते रहे. अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया, रूस,लंदन आदि देशों की यात्रा कर वे भारत लौटे हैं।.

पंडित शिवनाथ मिश्र को पद्म श्री

सितार वादन के क्षेत्र में पदम् श्री सम्मान प्राप्त करने वाले बनरास घराने के पंडित शिवनाथ मिश्र को सम्मान मिलने की जानकारी मिलते ही लोगो का उनको बधाई देने का ताता लग गया। शुभचिंतकों ने घर पर पहुँच पंडित शिवनाथ मिश्र को माला पहना कर एवं मिठाई खिला कर हर्ष जताया। काशी संगीत घराने को सितारवादन के क्षेत्र में पण्डित रविशंकर के बाद पण्डित शिवनाथ मिश्र को यह सम्मान प्राप्त हुआ है।पण्डित शिवनाथ मिश्र ने यह सम्मान बनारस वालो को समर्पित किया है। इन्होंने इस सम्मान को कला का सम्मान बताते हुए इसे काशीवासियों, अपने गुरुजन और बनारस घराने को समर्पित किया है.

काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर कमलाकर त्रिपाठी जो कि किडनी के प्रसिद्ध डॉक्टर है और मूल रूप से सिद्धार्थनगर के मदनपुर गांव निवासी डा. त्रिपाठी वाराणसी के रवींद्रपुरी एक्सटेंशन में रह रहे हैं. उन्होंने कहा की इस सम्मान का श्रेय उनके गुरु व माता-पिता को जाता है। प्रोफेसर कमलाकर त्रिपाठी ने बताया कि जीवन के चौथे पड़ाव पर मिलने वाला यह सम्मान एक आदर्श है , उन्होंने इस सम्मान को पाए जाने के बाद औऱ भी ज्यादा लोगो के प्रति अच्छा करने की जिम्मेदारी बढ़ जाने की बात कहते हुवे इसे काशीवासीयो को समर्पित कर दिया. प्रोफेसर कमलाकर त्रिपाठी को दो अंतरराष्ट्रीय, 15 राष्ट्रीय अवार्ड अब तक मिल चुका हैं. प्रोफेसर कमलाकर त्रिपाठी बीएचयू की ओर से यूएसए, कनाडा, यूके व नीदरलैंड का दौरा भी कर चुके हैं.

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